वर्तमान पीढ़ी का त्याग, ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा ही हमारे भविष्य को कर सकती है उज्जवल!



--प्रमोद दूबे
कोलकाता - पश्चिम बंगाल, इंडिया इनसाइड न्यूज।

...और उस दिन उन बुजुर्ग से मिलने गया, जो नब्बे के दशक में मेरी पत्रकारिता पर लगातार सवाल उठाते रहते थे। वाक्पटुता में उन्हें कौन पा सकता है और मूर्ति पूजा के विरोधी, ब्रम्ह को मानते हैं, वह भी निराकार।

उनके मकान के आगे चारदीवारी थी, जो उनके ही निर्देश पर प्रोफेसर बेटे ने निर्मित कराई थी। भाई से थोड़ी जमीन के लिए मुकदमेबाजी, पास ही शिव जी का मंदिर है, पर कभी दर्शन करने नहीं जाते। भारतीय संस्कृति के कट्टर समर्थक, पर सिर्फ बयानों से, उनके परिवार में ही पाश्चात्य सभ्यता को अपनाने वालों की कोई कमी नहीं है।

उनका दर्शन सिर्फ भाषणबाजी तक ही सीमित है। बुजुर्ग हो चले हैं, करोड़ों रुपए की सम्पत्ति के मालिक जरूर हैं। गाजीपुर में मकान बनाकर रहते हैं। आज मैंने उनके कलेजे से असली बात उगलवाने की कोशिश की, और थोड़े ही प्रयास से उन्होंने अपनी आपबीती बता दी।

उनका कहना था कि ज्ञान वही जो व्यवहारिक रूप से दिखता है। दुनिया के सिद्धांत तबतक किसी काम के नहीं हैं, जबतक उनका उपयोग न किया जाए। संन्यास आश्रम समाज के लिए होना चाहिए, पर हम परिवार मोह में इस व्यवस्था का सर्वनाश कर रहे हैं। हम ब्रम्ह की खोज तो कर लेते हैं, पर सृष्टि के प्रत्येक प्राणी में वह है, इसे व्यवहारिक तौर पर ही नहीं मानते हैं। जब हम दूसरे को अपने से अलग मानेंगे तब विवाद होना स्वाभाविक ही है। हम वर्तमान में सिर्फ निज स्वार्थ सिद्धि के लिए मार-काट करते हैं, पर हम कभी भविष्य की पीढ़ी के लिए कुछ नहीं सोचते हैं। पत्रकार, वकील, प्रोफेसर, जज, वैज्ञानिक, राजनेता बनकर हम जिस संस्कृति के साथ जीते हैं, वह सर्वनाश का संदेश देती है। शहरों में बस जाना और वहां कूप मंडूक बनकर जीना, समाज व देश के लिए कुछ न करना, यह साबित करता है कि ईश्वर ने हमें जीवन देकर पाप किया है। वाहन, मकान पर नाम व पद लिख लिए, थोड़ा बहुत समाचार पत्रों में छप गये, बस यही अहंकार लेकर समाज व देश के विभिन्न हिस्सों में घुमते हैं। शादी विवाह, श्राद्ध आदि कार्यक्रम में जाते और वहां स्वयं को वीवीआईपी होने का दंभ भरते हैं।

यह जीवन समाज और देश को समर्पित होना चाहिए, पर हम जो कुछ कर रहे हैं, ईश्वर की दृष्टि में तो वह नाबदान का कीड़ा ही है। सोचिए कि हमारे मरने के पश्चात समाज हमें किस रूप में स्मरण करेगा?

ताजा समाचार

National Report



Image Gallery
इ-अखबार - जगत प्रवाह
  India Inside News