--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
भोपाल - मध्यप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।
●कमलनाथ की कर्जमाफी से मंडी सुधार तक हर कदम किसानों के नाम
●जब-जब किसान परेशान हुए, तब-तब उनकी आवाज बने कमलनाथ
●किसानों के भरोसे का नाम कमलनाथ, हर मुद्दे पर सरकार को घेरा
●यदि कमलनाथ राज्यसभा जाते हैं तो कई मामले अपने आप सध जायेंगे
●कमलनाथ की योजनाओं को आगे बढ़ा रही मोहन सरकार
●2028 के लिए अभी से हाईकमान को करनी चाहिए मप्र की चिंता
मध्यप्रदेश की राजनीति में जब भी किसानों के मुद्दों की बात होती है, तो पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ का नाम प्रमुखता से सामने आता है। प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है और यही कारण है कि कमलनाथ ने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता दी। आज जब भीषण गर्मी और अनियमित व्यवस्थाओं के कारण किसान परेशान हैं, तब एक बार फिर कमलनाथ किसानों की आवाज बनकर सामने आए हैं। हाल ही में प्रदेश की अनाज मंडियों में गेहूं खरीदी को लेकर किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर किसानों को घंटों धूप में खड़े रहना पड़ा, कहीं भुगतान में देरी हुई तो कहीं पंजीयन और तौल प्रक्रिया में अव्यवस्था देखने को मिली। इस स्थिति को लेकर कमलनाथ ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से किसानों के लिए तत्काल राहत और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार को किसानों से जुड़ी योजनाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और संवेदनशील बनाना चाहिए, ताकि अन्नदाता को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
• कमलनाथ जैसे नेता को मुख्य धारा से अलग नहीं रख सकते
कमलनाथ की कुशलता और परिपक्वता को प्रदेश की जनता 18 माह के शासन में देख चुकी है। इन 18 माह में प्रदेश का हर वर्ग खुश था। खासकर किसानों के लिए तो वे मसीहा थे। किसानों की हर समस्या को उन्होंने हल किया था। आज ऐसे नेता को प्रदेश की राजनीति की मुख्यधारा अलग नहीं रखा जा सकता है। कांग्रेस मध्यप्रदेश से कमलनाथ को राज्यसभा भेजकर संदेश दे सकती है कि आज भी प्रदेश में कमलनाथ की जरूरत है। 2028 के चुनाव में यह कदम बहुत प्रभावी साबित होगा। इसके साथ ही पार्टी के मामलों को अपने आप साधा जा सकता है।
• किसानों के दर्द को समझने वाले नेता
कमलनाथ की राजनीति का सबसे मजबूत पक्ष यह रहा है कि उन्होंने केवल भाषणों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीनी स्तर पर किसानों की समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने का प्रयास किया। जब वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने किसानों के आर्थिक संकट को गंभीरता से लिया। उनका मानना था कि यदि किसान आर्थिक रूप से मजबूत होगा, तभी प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है। उनके कार्यकाल की सबसे चर्चित और ऐतिहासिक योजनाओं में से एक थी “जय किसान फसल ऋण माफी योजना”। इस योजना के माध्यम से लाखों किसानों के कर्ज माफ किए गए। उस समय प्रदेश के अनेक किसान कर्ज के बोझ तले दबे हुए थे और आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आ रही थीं। कमलनाथ सरकार ने किसानों को राहत देने के उद्देश्य से सहकारी बैंकों के ऋण माफ करने का बड़ा निर्णय लिया।
• कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने की सोच
कमलनाथ केवल राहत योजनाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने की दिशा में भी काम किया। उनका मानना था कि किसान केवल मेहनतकश नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का निर्माता है। इसलिए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए। उनकी सरकार ने मंडियों की व्यवस्था सुधारने, फसल खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में कई कदम उठाए। किसानों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रियाओं को आसान बनाने की कोशिश की गई। कमलनाथ सरकार ने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया। किसानों के लिए बिजली व्यवस्था में सुधार और कृषि पंपों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए गए।
• आज भी किसानों के मुद्दों पर मुखर
राजनीति में सत्ता बदलती रहती है, लेकिन किसानों के प्रति कमलनाथ की संवेदनशीलता आज भी वैसी ही दिखाई देती है। वर्तमान समय में जब प्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है, तब मंडियों में किसानों को हो रही परेशानी को लेकर उन्होंने सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि जिस किसान की मेहनत से पूरा देश अन्न प्राप्त करता है, उसी किसान को यदि खुले आसमान के नीचे घंटों खड़ा रहना पड़े तो यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
• कमलनाथ की योजनाओं को आगे बढ़ा रही वर्तमान सरकार
यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि कमलनाथ सरकार द्वारा शुरू की गई कई किसान हितैषी योजनाओं को वर्तमान सरकार भी आगे बढ़ा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी नीतियां केवल राजनीतिक घोषणा नहीं थीं, बल्कि किसानों के हित में बनाई गई व्यावहारिक योजनाएं थीं। कृषि क्षेत्र में सुधार, किसानों को राहत और मंडी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की जो सोच कमलनाथ ने प्रस्तुत की थी, वह आज भी प्रासंगिक मानी जा रही है। वर्तमान सरकार द्वारा उन योजनाओं को जारी रखना इस बात का प्रमाण है कि वे योजनाएं किसानों के लिए उपयोगी और प्रभावी थीं।
• किसान और कांग्रेस की पुरानी प्रतिबद्धता
कांग्रेस पार्टी का इतिहास किसानों और मजदूरों के हितों से जुड़ा रहा है। मध्यप्रदेश में कमलनाथ ने इस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने हमेशा यह संदेश दिया कि सरकार का पहला दायित्व किसानों के जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। कमलनाथ कई बार यह कह चुके हैं कि किसान केवल वोट बैंक नहीं बल्कि देश की रीढ़ है। यही कारण है कि विपक्ष में रहते हुए भी वे लगातार किसानों की समस्याओं को उठाते रहे हैं। चाहे प्राकृतिक आपदा हो, फसल नुकसान हो, बिजली संकट हो या समर्थन मूल्य का मुद्दा कमलनाथ ने हर विषय पर किसानों के पक्ष में आवाज उठाई।