--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
रायपुर - छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■खाकी के खौफ के आगे बेबस-लाचार इंसाफ
■माणिक की संदिग्ध मौत से दफन हो गये सैंकड़ों इंसाफ
■माणिक मेहता के पास फाईलों में मौजूद थे कई लोगों के राज
■माणिक मेहता की मौत की होनी चाहिए सीबीआई जांच
■रिटायरमेंट के बाद डीजी के पद से नवाजा गया मुकेश गुप्ता को
माणिक मेहता की मौत की खबर सुनकर मैं काफी स्तब्ध हूं। मन वेदना से भर आया है। पिछले डेढ़ दशक से माणिक मेहता मेरे काफी करीब रहे हैं। संदिग्ध परिस्थितियों में हुई माणिक की मौत से मैं बहुत अचंभित हूं। माणिक ने अपनी पूरी जिंदगी संघर्ष और मुसीबतों के बीच बिताई। लेकिन एक ज़िंदादिल इंसान की तरह अपने मकसद से पीछे नहीं हटे और हार न मानते हुए प्रयासरत रहे। लेकिन आखरी समय तक भी माणिक को इंसाफ नहीं मिल पाया। क्योंकि खाकी के ख़ौफ़ और रसूख़ के आगे इंसाफ बेबस तथा लाचार नजर आया। अब माणिक की संदिग्ध मौत के साथ ही सैंकड़ों इंसाफ दफन हो गये। जिसकी लड़ाई माणिक लड़ रहा था। मेहता परिवार में इंसाफ की मुहिम में तीन मौतें हो गई हैं। अधूरा इंसाफ और सिस्टम पर उठते सवालों के बीच मेहता परिवार की आखिरी उम्मीद भी पंचतत्व में विलीन हो गई। अब माणिक मेहता के परिजनों ने साफ़ कर दिया है कि वे अब इन्साफ से तौबा करते हैं। भविष्य में छत्तीसगढ़ जैसे शांत प्रदेश में कभी भी ऐसी दुःखद वारदात किसी घर परिवार में ना हो? चर्चित डॉ. मिक्की मेहता हत्या-आत्महत्या कांड की गुत्थी अभी सुलझी भी नहीं थी कि पीड़ित परिवार के एक मात्र सगे भाई माणिक मेहता की संदिग्ध हालातों में मौत हो गई। 55 वर्षीय माणिक मेहता का शव उनके घर पर संदिग्ध हालत में पाया गया। उनकी लाश किचन के वॉश बेसिन पर गिरी हुई अवस्था में पाई गई। छत्तीसगढ़ में मिक्की मेहता की 2001 में हुई संदिग्ध मौत के मामले में माणिक ने मिक्की मेहता की संदिग्ध मौत को संदिग्ध नहीं होने की बात करते हुए कहा था कि उसकी हत्या हुई हैं। माणिक की बहन मिक्की मेहता से मुकेश गुप्ता ने पहले से शादीशुदा होते हुए भी 1999 विवाह किया था।
• कहीं माणिक के पास मौजूद सैंकड़ों फाईल तो नहीं मौत का कारण!
• यदि माणिक जिंदा होते तो शायद कई हाई प्रोफाईल लोग कानूनी शिकंजे में होते
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार माणिक मेहता की जिस मकान में रहस्यमयी तरीके से मौत हुई है, उस मकान के एक कमरे में सैंकड़ों फाईलों का ज़ख़ीरा था। जो कई राजनीतिक लोगों और बड़े-बड़े अधिकारियों से संबंधित थी। जिसका ज़िक्र माणिक सोशल मीडिया या अन्य तरीकों से करते रहते थे। वर्तमान में DG पद पर आसीन मुकेश गुप्ता की फाईल भी माणिक के पास थी। कहा जा सकता है कि कई लोगों को यह आशंका सता रही होगी कि उन फाईलों में क्या है। शायद माणिक की इस तरह की प्रतिक्रियाएं नागवार गुज़र रही हों। यदि माणिक जिंदा होते तो शायद कई हाई प्रोफाईल लोग कानूनी शिकंजे में होते।
• पुलिस की चुप्पी से गहराता रहस्य
इस पूरे संवेदनशील मामले में रायपुर पुलिस का रवैया गंभीर सवालों के घेरे में है। लोग लगातार यह पूछ रहे हैं कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी रायपुर पुलिस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पत्रकार वार्ता क्यों नहीं की गई है? पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले में रहस्यमयी चुप्पी क्यों साधे हुए है। खाकी की यह खामोशी ही इस शक को पुख़्ता कर रही है कि दाल में कुछ काला जरूर है। स्थानीय पुलिस की लीपापोती और किसी भी तरह के दबाव से बचने के लिए माणिक मेहता की मौत की त्वरित और निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए। लोगों का स्पष्ट कहना है कि जब तक किसी स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक समिति से इस पूरे प्रकरण की जांच नहीं होती, तब तक असली गुनहगार सामने नहीं आएंगे। मेरी मांग है कि माणिक मेहता की मौत की सीबीआई न्यायिक जांच कराई जाए।
• मिक्की मेहता पार्ट- 2 बनने का डर
लोगों के ज़हन में मिक्की मेहता की मौत का अनसुलझा अध्याय आज भी ताज़ा है। उस मामले में भी न्याय सिर्फ फाइलों में भटकता रह गया। माणिक मेहता प्रकरण में पुलिस की इसी हीलाहवाली ने लोगों के मन में यह ख़ौफ़ पैदा कर दिया है कि कहीं यह केस भी मिक्की मेहता पार्ट-2 की तर्ज पर हमेशा के लिए एक डार्क मिस्ट्री न बन जाए।
• माणिक की संघर्ष भरी कहानी
माणिक मेहता पिछले लगभग 25 सालों से अपनी स्वर्गीय बहन डॉ. मिक्की मेहता को इंसाफ दिलाने के लिए पुलिस मुख्यालय की कार्यप्रणाली के साथ-साथ डीजी मुकेश गुप्ता के साथ भी कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। मिक्की मेहता को इंसाफ दिलाने के लिए माणिक मेहता ने दिन-रात एक कर दिया था। रायपुर-बिलासपुर से लेकर दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट तक वे अपनी बहन की रहस्यमयी मौत की उच्च स्तरीय जाँच की मांग के सिलसिले में कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। उन्होंने रायपुर के तत्कालीन एसपी पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, प्रकरण में कई स्तर की जाँच विवादों के घेरे में है, इसके चलते डॉ. मिक्की मेहता को उनकी मौत के लम्बे अरसे बाद भी “ना तो इंसाफ” मिल पाया और “ना ही जाँच प्रकरण” अंजाम तक पहुंच पाया था। इस बीच माणिक मेहता की मौत ने राज्य में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उनकी अचानक मौत से एक बार फिर मुकेश गुप्ता का नाम सुर्खियों में है। इस मामले में डीजी और माणिक मेहता के बीच खुली कानूनी जंग भी जारी रही। इस बीच वर्ष 2018 में कांग्रेस के सत्ता में आते ही विवादित आईपीएस मुकेश गुप्ता को एडीजी पद से निलंबित कर दिया गया था। इस दौरान मिक्की मेहता हत्या आत्महत्या मामले की नए सिरे से जाँच भी शुरू हुई थी। मुझे उम्मीद है कि आज भले ही जीते जी माणिक को इंसाफ नहीं मिल पाया हो लेकिन ईश्वर एक न एक दिन माणिक के परिवार को न्याय जरूर दिलवायेंगे।
जगत विज़न परिवार की ओर से स्व. माणिक मेहता को भावभीनी श्रद्धांजलि।