--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) 2026 की परीक्षा रद्द किए जाने के बाद आलोचना का सामना करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार (15 मई) को कहा कि सरकार उस संसदीय पैनल की रिपोर्ट की सिफ़ारिशों को स्वीकार नहीं करेगी, जिसने एनटीए की आलोचना की थी, क्योंकि उस पैनल में विपक्ष के सदस्य भी शामिल थे। जिसके पीछे ये आरोप थे कि प्रश्न पत्र "गैस पेपर्स" के ज़रिए लीक हो गया था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधान ने कहा, "मैं संसदीय समिति की टिप्पणियों के आधार पर नहीं चलूँगा। मैं राधाकृष्णन समिति के आधार पर चलूँगा। मैं तथ्यों के आधार पर चलूँगा, मैं कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं करना चाहता।" उन्होंने आगे कहा, "संसदीय समिति में विपक्ष के सदस्य शामिल हैं। आप मुझसे बेहतर जानते हैं कि वे रिपोर्ट कैसे तैयार करते हैं।" कांग्रेस सांसद दिग्वजय सिंह की अध्यक्षता संसदीय समिति की सिफारिशों पर प्रधान की ये टिप्पणियाँ समिति की सिफ़ारिशों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में आई थी। इस समिति ने दिसंबर में संसद में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पिछले साल एनटीए का प्रदर्शन "बहुत भरोसा जगाने वाला नहीं रहा।" इस समिति की अध्यक्षता कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह कर रहे हैं और इसमें सरकार तथा विपक्ष, दोनों पक्षों के 30 सदस्य शामिल हैं।
एनटीए, जिसकी स्थापना 2018 में हुई थी, को कई प्रमुख परीक्षाओं के आयोजन का ज़िम्मा सौंपा गया है। इनमें एनआईटी और अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में इंजीनियरिंग के स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए जेईई (मेन) और मेडिकल कॉलेजों के स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए नीट-यूजी शामिल हैं। “समिति के संज्ञान में यह बात लाई गई है कि अकेले वर्ष 2024 में, एनटीए द्वारा आयोजित 14 प्रतियोगी परीक्षाओं में से कम से कम पाँच में बड़ी समस्याएँ सामने आईं, और इसके परिणामस्वरूप, तीन परीक्षाओं - यानी यूजीसी-एनईटी, सीएसआईआर-एनईटी और नीट-पीजी - को स्थगित करना पड़ा। एक परीक्षा - यानी नीट-यूजी - में पेपर लीक की घटनाएँ सामने आईं; और एक परीक्षा—यानी सीयूईटी (यूजी/पीजी) - के परिणाम स्थगित करने पड़े,” समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था।
प्रधान ने शुक्रवार को अगले वर्ष से कंप्यूटर-आधारित परीक्षाओं की घोषणा की, और साथ ही कहा कि सरकार अनियमितताओं के प्रति “बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं” (जीरो टॉलरेंस) करेगी। दूसरी ओर, संसदीय समिति की रिपोर्ट में यह सिफ़ारिश की गई थी कि एनटीए को पेन-एंड-पेपर (कागज़-कलम) आधारित परीक्षाओं पर अधिक ज़ोर देना चाहिए। समिति ने यह पाया था कि ऐसी परीक्षाओं के कई ऐसे मॉडल मौजूद हैं जो कई वर्षों से लीक-प्रूफ रहे हैं, जिनमें सीबीएसई और यूपीएससी की परीक्षाएँ शामिल हैं।
कंप्यूटर-आधारित परीक्षाओं के मामले में, समिति ने सिफ़ारिश की कि ये परीक्षाएँ केवल सरकारी या सरकार द्वारा नियंत्रित केंद्रों में ही आयोजित की जानी चाहिए, न कि कभी भी निजी केंद्रों में। एक बयान में, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि मंत्री का संसदीय स्थायी समिति को नज़रअंदाज़ करना “उनकी अपनी पार्टी के सांसदों और भारतीय संसद की द्विदलीय परंपराओं का अपमान है।”
“तथ्य यह है कि संसद के 30 सदस्यों में से 17 सदस्य स्वयं बीजेपी के हैं। समिति की सिफ़ारिशों के एक हिस्से में के. राधाकृष्णन विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की बातों को ही दोहराया गया है, जिसका ज़िक्र स्वयं मंत्री भी करते हैं। उन्होंने कहा मंत्री का संसदीय स्थायी समिति को नज़रअंदाज़ करना उनकी अपनी पार्टी के सांसदों और भारतीय संसद की द्विदलीय परंपराओं का अपमान है।” राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी - शरदचंद्र पवार (एनसीपी–एसपी) की फ़ौज़िया खान ने कहा कि एक संसदीय समिति “हमारे बच्चों और हमारी शिक्षा प्रणाली की भलाई के लिए - दोनों पक्षों के सदस्यों के साथ मिलकर - जाँच-पड़ताल करने, विचार-विमर्श करने और सिफ़ारिशें देने के लिए बनाई जाती है।”
उन्होंने कहा “इसकी रिपोर्ट को केवल इसलिए खारिज कर देना कि इसमें विपक्षी सदस्यों की आवाज़ें भी शामिल हैं, यह दर्शाता है कि मंत्री संसदीय लोकतंत्र और हमारे युवाओं की ज़रूरतों के बजाय पार्टी की राजनीति से अधिक प्रेरित हैं।”