रोइए ना जार-जार !

जिस तरह से पाक मीडिया, वहाँ के हुक्मरान चीखपुकार मचाये हैं, उससे लगता है कि यह ‘आपरेशन’ बेहद ज़रूरी था। जिन्हें ना त

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हे साईनाथ !

अपने 23-24 वर्षों की पत्रकारिता में जिन लोगों से मैं सबसे अधिक प्रभावित हुआ, उनमें स्व• प्रभाष जोशी और पालागुम्मि यान

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झोला लेके आवे ला...!

हाऊ फन्नी ! सीबीआई वाला सेंटा झोला लेके आवे ला...! दिसम्बर बीत गया, नयी जनवरी लग गई लेकिन सेंटा बाबा नहीं लौटा।यहीं य

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एक तस्वीर बनाने के वास्ते.....

एक तस्वीर बनाने के वास्ते..... क्या हम बदलते साल में कुछ नया करेंगे ? या यूँ ही हप्पी-हप्पी करते रहेंगे ? मालिक इसी तरह

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इंडिया इनसाइड साहित्य वार्षिकी-2018 आपके लिए उपलब्ध है

इंडिया इनसाइड ‘साहित्य वार्षिकी-2018’ (अखिल भारतीय समकालीन साहित्य का संयोजन), सम्पादक : अरुण सिंह मूल्य: 200/- (236 रुपये

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