क्या इस घोषणा की तरह बाकी सारी शिवराज की घोषणा है झूठी



--विजया पाठक (संपादक - जगत विजन),
भोपाल - मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।

● शिवराज सिंह चौहान झूठा है आपका वादा प्रदेश के संविदाकर्मियों से

● चुनाव से पहले खुल गई शिवराज सिंह और भाजपा की संविदाकर्मी नीति

● राज्य के पर्यावरण विभाग ईपक्को से निकाले गए संविदाकर्मी

● प्रदेश के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस का आदेश भी नहीं मानते विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा और ईडी मुज्जिबुर रहमान

चुनावी साल में शिवराज लंबी लंबी फेक कर अपना राज पिछले 18 सालों से चला रहे है। पर असल में शिवराज प्रदेश को ही मामाजी बना रहे है 'इनकी एक घोषणा की पोल तो चुनावों के नतीजे आने से पहले ही खुल गई'। दरअसल शिवराज सिंह ने इसी वर्ष प्रदेश के तमाम संविदाकर्मियों को झूठा झुनझुना पकड़ा दिया दिनांक 04 जुलाई 2023 को शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में करोड़ों रुपए का संविदाकर्मी महापंचायत का आयोजन किया। इस पंचायत में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने यह प्रमुख वायदे संविदाकर्मियों से करे थे:-

1. मध्य प्रदेश के संविदाकर्मियों का प्रति वर्ष नवीनीकरण समाप्त होगा

2.सरकारी भर्तियों में उन्हें 50 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।

3. उन्‍हें नेशनल पेंशन स्कीम, स्वास्थ्य बीमा योजना, अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिया जाएगा।

4.सरकारी कर्मचारियों की तरह अवकाश का लाभ भी मिलेगा।

5.संविदा कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर सरकार ग्रेजुएटी की व्यवस्था करेगी।

6. नियमित कर्मचारियों की तरह संविदाकर्मियों को भी अवकाश के साथ मातृत्व अवकाश भी प्रदान किया जाएगा।

7. आकस्मिक अवकाश अर्जित अवकाश भी मिलेगा।

8.हड़ताल के दौरान संविदा कर्मचारियों के काटे गए वेतन की राशि भी सरकार वापस करेगी।

इन आठ प्रमुख वायदे शिवराज ने प्रदेश के 1.5 लाख संविदाकर्मियों से किया पर इनका यह वादा भी झूठा ही निकला। मामला मध्यप्रदेश के राज्य के पर्यावरण विभाग ईपक्को का है, जहां सूत्रों से खबर मिली की तीन संविदा कर्मीयों की सेवाएं समाप्त कर दी गई है। इस मामले में जब विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा से बात की तो उन्होंने पहले फोन नहीं उठाया, मैसेज करने पर उन्होंने इस बात की जानकारी ना होना बतलाया है साथ में ईडी का मोबाइल नंबर देकर बात करने को कहा। इस मामले में ईपक्को ईडी मुज्जीबुर रहमान (आईएएस 2011 बैच) से टेलिफोन पर बाइट ली 'इस मामले में बात करने पर उन्होंने कहा की कोई काम नहीं करेगा तो उनको ना निकाला जाए ऐसा आदेश में कहां लिखा है'। इसके आगे रहमान ने कहा की विभाग में 30 से ज्यादा संविदाकर्मी कार्यरत है।इनकी बातों में दाल में काला नजर आ रहा है क्योंकि दिनांक 09-10-2023 को ईपक्को ने अपने पर्यावरण संस्थान इंस्टिट्यूट के लिए उपरोक्त संविदा पद पर नियमित नियुक्ति स्वीकृत की जबकि, संस्थान में क्लाइमेट चेंज, भोज वेटलैंड एवम अन्य में भी करीब करीब 30 संविदाकर्मी कार्यरत है।जबकि इस मामले में मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस द्वारा विभाग को निर्देश दिए थे कि विभाग में सभी पदों के लिए नियमित भर्ती निकली जाए, गौर करने वाली बात यह है की इस संस्थान में बाकी संविदा कर्मी कई वर्षों से कार्य कर रहे है जिनमें से सबका विस्तार स्वत: हो जाता है। संस्थान को मनमाफिक तरीके से एक व्यक्ति ही चला रहा है, नियम विरुद्ध काम करना, भ्रष्टाचार करना और साथ में संविदाकर्मियों का स्वत: सालों-साल एक्सटेंशन में किसी प्रकार का आर्थिक लाभ की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। अभी निकाले गए संविदाकर्मियों की नियुक्ति भी सिर्फ इसलिए हो पाई क्योंकि गुलशन बामरा से पहले के प्रमुख सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी ने विभाग में ट्रांसपेरेंसी लाने के मद्देनजर उपरोक्त पदों के लिए ओपन इंटरव्यू कराए, किंतु उनके दूसरे विभाग में जाने के बाद पुन: वहीं व्यक्ति विभाग में सर्वे सर्वा हो गया और फिर वापस एनजीओ/संस्थाओं को नियम विरुद्ध कार्य दिया जाने लगा है ,खैर वो व्यक्ति और संस्थान के भ्रष्टाचार पर मैं कभी और विस्तार से लिखूंगी। बात उन निकाले गए संविदाकर्मियों की करे को संस्थान प्रमुख ईडी की बात सरासर गलत नजर आ रही है, पहली बात निकाले गए कर्मचारी उच्च शिक्षा प्राप्त और अनुभवी है जिनकी डिग्री संस्थान के प्रिंसिपल से भी ज्यादा है और पिछले एक वर्ष से कार्यरत इन कर्मचारियों को काम ना करने के लिए विभाग ने ना तो कोई मेमो दिया गया और अगर इनका कार्य इतना खराब था तो इनकी सेवाएं "संविदा नियुक्ति नियम 2017" के कंडिका 11 के क्रमांक 3 के अनुसार एक माह के नोटिस देकर खत्म किया जा सकता था। इसके लिए एक वर्ष का इंतजार क्यों किया गया है यह एक बड़ा सवाल है। इसका सीधा सीधा अर्थ हैं उपरोक्त कर्मचारियों को षडयंत्र पूर्वक निकाला गया है। साथ ही यह भी साबित हो जाता है कि प्रदेश के संविदाकर्मियों को किया गया शिवराज सिंह का वादा झूठा है अन्यथा इन लोगों को भी सेवा विस्तार मिलता जो की शिवराज का वादा नंबर 1 है। प्रदेश की लाचार प्रशासनिक व्यवस्था की भी कलई इस मामले से खुल गईं जहां मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस का आदेश विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा और ईडी मुज्जिबुर रहमान द्वारा नहीं मानी गई और भाई माने भीं क्यों प्रदेश के मुख्य सचिव भी सेवा विस्तार अर्थात टेक्निकली संविदाकर्मी जो है। आखिरी में यही कहना सही होगा मामाजी प्रदेश के लिए आपका वायदा झूठा है और पूरी तरह चुनावी है।

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