26 लाख किसानों का साढ़े 11 हजार करोड़ का कर्जा किया था माफ



--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
भोपाल - मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।

●महज 18 माह के शासन में किसानों के मसीहा बन गये थे कमलनाथ

●कमलनाथ के विजन और मिशन से प्रभावित था प्रदेश

●मुख्‍यमंत्री मोहन यादव को भी किसानों के हित में करनी चाहिए कर्जमाफी

●कांग्रेस हाईकमान को कमलनाथ के मिशन और विजन से लेना चाहिए लाभ

कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और मध्‍यप्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में महज 18 माह के शासन में किसानों के लिए जो काम किए, वो वाकई काबिल-ए-तारीफ थे। कमलनाथ सरकार ने किसानों की ऋण माफी योजना शुरू की, जो राज्य में कृषि संकट को लेकर बड़ा कदम था। इस योजना के तहत किसानों को कर्ज से राहत मिली और उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ। इसके अलावा, कमलनाथ ने बिजली बिलों की माफी, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। इन कदमों ने किसानों के बीच उनकी लोकप्रियता को बढ़ाया और उन्हें "किसानों के मसीहा" के रूप में स्थापित किया। हालाँकि, उनका शासन 18 महीने का ही था, लेकिन इतने कम समय में किसानों के लिए जो योजनाएं लागू कीं, वो किसानों के जीवन में बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुईं। यह सरकार महज एक साल 97 दिन ही चल पाई। कमलनाथ 17 दिसंबर 2018 से 23 मार्च 2020 तक सीएम रहे। 2018 में सत्ता में आई कमलनाथ सरकार ने किसानों से किया गया कर्ज माफी का वादा सिर्फ चुनावी जुमला नहीं रहने दिया, बल्कि सत्ता संभालते ही इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। “जय किसान फसल ऋण माफी योजना” के तहत सरकार ने सीधे उन किसानों को राहत देने का प्रयास किया जो कर्ज के बोझ तले दबे हुए थे और लगातार आर्थिक संकट का सामना कर रहे थे। पहले ही चरण में 02 लाख रुपये तक के फसली कर्ज माफ करने का निर्णय लिया गया, जिससे यह स्पष्ट संकेत गया कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है और त्वरित कार्रवाई के मूड में है। जून 2009 के बाद के कर्जदार किसानों की कर्ज माफी होती जिससे करीब 33 लाख किसानों को फायदा होता। इस कदम से लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय भार सरकार पर आता। कांग्रेस ने अपने 'वचन पत्र' में भी कहा था कि सरकार बनने के 11 दिनों में किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। इसके साथ ही कमलनाथ ने महज तीन मि‍नट में अपना वादा निभा दिया।

आंकड़ों के मुताबिक 26 लाख से अधिक किसानों को इसका लाभ मिला और करीब 11,646.96 करोड़ का अल्पकालीन फसल ऋण माफ किया गया। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि योजना का दायरा कितना व्यापक था। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखते हुए सहकारी बैंकों से जुड़े किसानों को प्राथमिकता दी गई, जो सबसे ज्यादा आर्थिक दबाव में थे। गांवों में इस फैसले का असर साफ नजर आया। कई किसानों को तत्काल राहत मिली और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में कुछ हद तक गति आई।

• शिवराज सरकार ने किसानों के अरमानों पर फेरा पानी

कमलनाथ सरकार के गिरते ही प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्‍व में बीजेपी की सरकार बनी। शिवराज सरकार ने सत्‍ता संभालते ही किसानों के हितकारी इस योजना को ठंडे बस्‍ते में डाल दिया और किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। कर्जमाफी की पूरी प्रक्रिया जितनी तेजी से शुरू हुई, उतनी ही तेजी से राजनीतिक घटनाक्रम ने इसे प्रभावित कर दिया। कांग्रेस का दावा रहा कि मौजूदा सरकार ने इसे बंद कर दिया। निश्चित ही कमलनाथ सरकार की कर्ज माफी योजना एक ऐसा कदम थी जिसने लाखों किसानों को राहत देने का प्रयास किया, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता परिवर्तन के चलते इसकी पूरी क्षमता सामने नहीं आ सकी। आज भी यह मुद्दा मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बड़ा संदर्भ बना हुआ है।

• क्‍या मोहन यादव कर सकते हैं कर्जमाफी जैसी योजना को पुन: प्रारंभ?

वर्तमान मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के लाखों किसानों के हितों को ध्‍यान में रखते हुए कमलनाथ की कर्जमाफी योजना को पुन: प्रारंभ कर सकते हैं। क्‍योंकि वर्तमान समय में प्रदेश का हर एक किसान कर्जदार है और इसके चलते काफी परेशान है। यदि मोहन यादव ऐसा करते हैं तो सही मायने में किसानों के लिए यह सबसे बड़ी सौगात होगी।

• कमलनाथ के विजन और मिशन से प्रभावित था प्रदेश का हर वर्ग

कमलनाथ का विजन और मिशन सच में प्रदेश के लिए प्रेरणादायक था। उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने विकास के नए रास्ते अपनाए, जिनका प्रभाव अब भी महसूस किया जा रहा है। कमलनाथ के इस विजन और मिशन ने प्रदेश के विकास को एक नई दिशा दी थी। उनके नेतृत्व ने प्रदेश में एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा खड़ा किया था, जिससे मध्यप्रदेश को एक नया पहचान मिला था। उन्होंने प्रदेश को एक समग्र और संतुलित तरीके से विकास की दिशा में आगे बढ़ाने की योजना बनाई थी। उनका सबसे बड़ा फोकस था किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारना और कृषि को लाभकारी बनाना।

• विकास के समग्र मॉडल का निर्माण किया

कमलनाथ का मिशन था कि प्रदेश में हर क्षेत्र का विकास हो, चाहे वो कृषि, उद्योग, पर्यटन, या इन्फ्रास्ट्रक्चर हो। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि विकास सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न हो, बल्कि ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में भी समान विकास हो। मध्यप्रदेश की राजनीति में कमलनाथ का मुख्यमंत्री कार्यकाल भले ही सीमित समय का रहा हो, लेकिन इस दौरान लिए गए फैसलों ने प्रदेश की राजनीति और नीतियों की दिशा तय कर दी। उनकी सरकार ने आते ही किसानों, युवाओं और आम जनता को केंद्र में रखते हुए कई योजनाओं की शुरुआत की। ऐसी योजनाएं जिनका असर सीधे जमीन पर दिखने लगा था। कमलनाथ सरकार का कार्यकाल अचानक समाप्त हुआ। राजनीतिक उठापटक के बीच। इसके बाद नई सरकार ने कई योजनाओं की समीक्षा की, कुछ को बदला, कुछ को रोका और कई को नए नामों के साथ लागू किया। कमलनाथ सरकार का कार्यकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन उसने कई ऐसी पहलें शुरू कीं, जिनकी गूंज आज भी सुनाई देती है।

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