--विजया पाठक (एडिटर - जगत विजन),
भोपाल - मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।
● मध्यप्रदेश में ''कमल'' पर नहीं ''कमलनाथ'' पर भरोसा
● बीजेपी पर भारी पड़ रहे कमलनाथ सरकार के वो 15 महीने
● भाजपा चुनाव मैदान में दिग्गज नेताओं को उतारने को हुई मजबूर
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो गया है। इस शंखनाद के साथ ही अगले दो महीने में यह तस्वीर पूरी तरह से साफ हो जायेगी कि प्रदेश का अगला मुखिया कौन होगा, कौन सी पार्टी अगले पांच वर्ष प्रदेश में सरकार चलायेगी। आमतौर पर बहुत कम ऐसे नेता होते हैं जो अपने संसाधनों से, अपने बल से, अपने खर्च से लोगों का, क्षेत्र का, अपनी पार्टी का और अपने प्रदेश का कल्याण करते हों। ऐसे नेताओं में कमलनाथ का नाम प्रथम स्थान पर आता है। वह चाहे 2018 का मध्यप्रदेश का आम चुनाव हो या 2019-2020 को कोरोनाकाल का समय हो या छिंदवाड़ा का विकास मॉडल हो। इन मामलों में कमलनाथ ने अपने व्यक्गित संबंधों से और अपने संसाधनों से लोगों के कल्याण के काम किये हैं। मध्यप्रदेश में आज ऐसे ही नेता की आवश्यकता है जो कर्ज में डूबे प्रदेश को उबारने में सफलता हासिल कर सके। कमलनाथ ही वह नेता हैं जिन पर पूरे राजनीतिक जीवन में एक भी भ्रष्टाचार करने का दाग नहीं लगा है। शायद यहीं कारण है कि प्रदेश की जनता आज कमलनाथ पर भरोसा कर प्रदेश की कमान कमलनाथ को सौंपना चाहती है।
खैर, प्रदेश में विधानसभा चुनाव में जीत के लिये दोनों ही प्रमुख राजनीतिक पार्टी कांग्रेस और भाजपा ने इस बार काफी जोर लगा लिया है। लेकिन प्रदेश की जनता की तरफ से जो संकेत मिल रहे हैं उससे एक बात तो साफ है कि एक बार फिर मध्यप्रदेश में कमलनाथ ही खिलेगा। यह इसलिये भी है क्योंकि बीते साढ़े तीन वर्षों में सरकार जाने के बाद से पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से जिस कुशलता के साथ संगठनात्मक संरचना को मजबूती प्रदान करने का काम किया है उसी का परिणाम है कि आज प्रदेश की जनता में एक बार फिर कमलनाथ पूरी तरह से रच-बस गये हैं। स्थानीय स्तर पर कमलनाथ की लोकप्रियता बढ़ गई है और लोग उन्हें एक बार कर्जे में डूबे मध्यप्रदेश को बाहर निकालने के लिये सत्ता सौंपना चाहते हैं।
वहीं प्रदेश में बीजेपी कमलनाथ की लोकप्रियता से इतनी घबरा गई है कि उसे चुनाव मैदान में केन्द्रीय मंत्री, सांसद और कई दिग्गजों को उतारना पड़ गया है। प्रदेश में इतनी बैचेनी पहली बार देखने को मिल रही है। इससे पहले कभी भी प्रदेश में भाजपा को इतनी घबराहट में नहीं देखा है। यह सब पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कारण ही हुआ है। कमलनाथ जिस तरह से पिछले पांच वर्षों से प्रदेश को अपना पूरा समय दे रहे हैं और पार्टी को संगठनात्मक रूप से मजबूत कर रहे है उससे प्रदेश में इस बार फिर कांग्रेस की सरकार बनते दिख रही है।
• कुशल संगठनात्मक शक्ति है कमलनाथ में
प्रदेश के गांव-गली और मोहल्लों में सिर्फ इसी बात को लेकर चर्चा आम हो गई है कि कमलनाथ ही हैं जो कर्ज में डूबे प्रदेश को अपनी कुशलता से कर्ज मुक्त कर सकते हैं। प्रदेश की जनता का यह विश्वास और अपनापन निश्चित ही इतने वर्षों में कमलनाथ द्वारा गांव-गांव, शहर-शहर पहुंचकर जनता से अर्जित किया हुआ स्नेह का परिणाम है। लोग अब कांग्रेस को नहीं बल्कि कमलनाथ को देखकर वोट करने की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं और उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में अपना नया राजा भी स्वीकार करने लगे हैं।
• पार्टी से ज्यादा कमलनाथ पर विश्वास
लगभग पांच दशकों से अधिक की राजनीति में कमलनाथ ने कई मील के पत्थर गाड़े हैं। छिंदवाड़ा से लेकर केंद्र सरकार में उद्योग मंत्री सहित कई प्रमुख पदों पर रहते हुए कमलनाथ ने पार्टी को मजबूती देने का काम किया है। यही कारण है कि आज लोग पार्टी को नहीं बल्कि कमलनाथ पर विश्वास करते हुए उन्हें प्रदेश की सत्ता सौंपने को लेकर उत्साहित है। बताया तो यह भी जा रहा है कि कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लेकर आगामी कई महीनों तक के कार्यक्रमों की रूपरेखा भी स्थानीय लोगों ने तैयार कर ली है। बस सभी को इंतजार है कि जल्द ही प्रदेश में वोटिंग हो और उन्हें कमलनाथ के रूप में अपना नया मुख्यमंत्री चुनने का अवसर मिले।
• कमलनाथ की कूटनीति से घबराई भाजपा
भाजपा भी कमलनाथ की कूटनीति से इतनी घबरा गई उन्होंने इस विधानसभा चुनाव की अधिकतर सीटों पर विधायक कैंडिडेट्स को टिकट देने के बजाय अपने सांसदों को टिकट देकर मैदान में उतारा है। भाजपा की यह सोच पार्टी की हिली डुली परिस्थितियों को उजागर करती है। अब देखने वाली बात यह है कि क्या भाजपा के यह सांसद सच में भाजपा को इन सीटों पर चुनाव जीताने में सफल होते हैं या फिर यह भी अन्य लोगों की तरह फुस्सी निकलते हैं।
• पार्टी कार्य़कर्ताओं और नेताओं को एक सूत्र में पिरोया
कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की एक सबसे बड़ी खासियत है कि उन्होंने बिखरी हुई कांग्रेस पार्टी को एक सूत्र में पिरोया। कार्यकर्ताओं, मंत्रियों औऱ नेताओं के बीच की दूरियों को कम करके उन्हें एक साथ एक मंच पर लाकर खड़ा किया है। अगर सभी राजनेताओं को एक जुट कर चुनाव के लिये मैदान तैयार करने का साहस किसी में था तो वह सिर्फ कमलनाथ में था। यही कारण है कि कमलनाथ ने पिछले साढे तीन साल में एक-एक कार्यकर्ता से मुलाकात की, नेताओं से बातचीत की और विधायकों को आपसी समन्वय बनाकर काम करने के लिये तैयार किया। कमलनाथ की इस मेहनत और संगठनात्मक संरचना से कांग्रेस आज कई गुना मजबूत हो गई है और इसके परिणाम आगामी चुनाव में देखने को मिल जायेंगे।
• छिंदवाड़ा मॉडल है कमलनाथ की कुशलता का परिणाम
कोई भी विधायक, मंत्री या मुख्यमंत्री अपने विधानसभा क्षेत्र में सरकार से बजट पास करवाकर विकास तो करवा सकता है। लेकिन कमलनाथ ने सांसद रहते हुए छिंदवाड़ा में जो किया उसकी मिसाल देश से लेकर विदेशों तक दी जाती है। किस तरह से कमलनाथ ने छिंदवाड़ा मॉडल को एक आदर्श विकसित जिले के रूप में खड़ा किया है। खास बात यह है कि पूरे जिले में कमलनाथ ने स्वरोजगार, रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा, उद्योग, अधोसरंचना सहित चहुंमुखी विकास कर लोगों के जीवन को रोशन कर दिया। यही नहीं यह सब काम कमलनाथ ने प्रदेश की भाजपा सरकार से बजट प्राप्त करके नहीं किया, बल्कि उन्होंने अपनी कार्यकुशलता, कार्य के प्रति जुनून और कुशल संगठनात्मकता से किया है। इस पूरे काम के लिये उन्होंने कई बड़े उद्योगपतियों से सीएसआर फंड के तहत बजट पास करवाया और अपने बल पर उन्होंने छिंदवाड़ा को एक रोल मॉडल जिले के रूप में खड़ा किया है।