मध्‍यप्रदेश विधानसभा चुनाव: क्या प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के भरोसे जीत का परचम लहरायेगी भाजपा?



--विजया पाठक (एडिटर, जगत विजन),
भोपाल - मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।

● क्‍या मध्‍यप्रदेश में अब नहीं है कोई चुनाव जिताउ चेहरा?

● आयोजन पर शिवराज सरकार खर्च कर रही करोड़ों रूपये

● हजारों करोड़ का कर्ज लेकर बड़े आयोजनों का क्‍या औचित्‍य?

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल अब से कुछ माह में बजने को है। ऐसे में प्रदेश में सक्रिय राजनीतिक पार्टियां भी अपनी चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। प्रदेश में सत्तारुढ़ शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी अपनी चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। यही कारण है कि बीते एक वर्ष के अंदर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह खुद पांच से छह बार मध्यप्रदेश का दौरा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के लगातार दौरों ने प्रदेश की भाजपा और सत्ता, सगंठन पर सवालियां निशान खड़ा कर दिया है। भाजपा के शीर्ष नेताओं के लगातार हो रहे दौरों से इस बात का आंकलन भी लगाया जाने लगा है कि प्रदेश में भाजपा के पास कोई ऐसा बड़ा चेहरा नहीं है जिसके नाम पर प्रदेश भाजपा जनता से वोट मांग सके यही कारण है कि मोदी और अमित शाह लगातार प्रदेश में डेरा डाले हुए हैं।

• सात महीने में 05 दौरे कर चुके मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगर बात करें तो मोदी खुद सात महीने में पांच बार मध्यप्रदेश का दौरा कर चुके हैं। मोदी के इस दौरे की शुरुआत सितंबर 2022 में कूनो पालपुर से हुई थी। इसके बाद महाकाल कॉरिडोर का शुभारंभ, वंदे मातरम् ट्रेन का शुभारंभ और हाल ही में रीवा में पंचायती राज दिवस का आयोजन। केंद्र सरकार के प्रमुख आयोजनों का मध्यप्रदेश में होना और उनमें शामिल होने मोदी का आना साफतौर पर इस बात की ओर इशारा करता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश भाजपा की स्थिति को लेकर शीर्षस्थ नेता भी खतरा महसूस कर रहे हैं।

• शाह ने भोपाल, छिंदवाड़ा किया एक

दूसरी तरफ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मोदी की राह पर चलते हुए निरंतर प्रदेश के अलग-अलग दौरे कर भाजपा के सत्ता और संगठन को मजबूती देने का प्रयास कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार मोदी की प्रदेश यात्रा की शुरुआत जबलपुर से हुई। जिसके बाद वे लगातार दो से तीन बार भोपाल पहुंचे और हाल ही में वे छिंदवाड़ा के दौरे पर पहुंचे। छिंदवाड़ा में देखा गया कि अमित शाह की रैली को सफल बनाने के लिए शिवराज सरकार के आला मंत्रियों को भी ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा। क्योंकि कमलनाथ के किले को भेदने के जिस उद्देश्य के साथ शाह वहां पहुंचे थे वे वहां पूरी तरह से इस काम को करने में असफल रहे।

• जितनी रैलियां उतना खर्चा, परिणाम जीरो

अगर हम मोदी और शाह की रैलियों पर नजर डाले और इनके आवभगत में होने वाले खर्चों पर नजर डाले तो शायद हम इस बात का आंकलन भी नहीं कर पायेंगे कि प्रदेश सरकार ने इनके आवभगत में कितना करोड़ रुपये फूंक दिया। सूत्रों के अनुसार एक-एक आयोजन में प्रदेश सरकार ने 50 करोड़ से अधिक की राशि को खर्च किया। जबकि देखा जाये कि इतने आयोजन में खर्च हुए बजट से अगर सरकार चाहती तो जनता के हितों में कई प्रमुख फैसले करती जिसका फायदा जनता को मिलता। लेकिन प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने इस तरह का काम करना बिल्कुल उचित नहीं समझा। अब देखने वाली बात यह है कि क्या सच में इन रैलियों का कोई फायदा आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिलेगा या फिर यह महज एक दिखावा बनकर रह जायेगा जिसके खर्च का भुगतान प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ेगा।

• क्या मोदी और शाह के चेहरे पर जीतेगी भाजपा?

मोदी और शाह के लगातार प्रदेश के दौरों को लेकर सियासी गलियारे में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या इस बार भाजपा मोदी और शाह के चेहरे पर ही चुनावी मैदान में उतरना चाहती है। क्या प्रदेश में ऐसा कोई जनप्रिय और लोकप्रिय नेता नहीं है जिसके चेहरे पर प्रदेश में भाजपा सत्ता पर कायम रह सके। अब देखने वाली बात यह है कि क्या शाह और मोदी के दौरों का परिणाम प्रदेश भाजपा को मिलेगा या फिर एक बार फिर मोदी और शाह को यहां से निराश होकर जाना होगा।

• विंध्य, महाकौशल पर ज्यादा फोकस

सूत्रों के अनुसार इस बार शीर्षस्थ नेता इस बात को लेकर भी संतुष्ट दिखाई नहीं पड़ रहे हैं कि प्रदेश में भाजपा एक बार फिर सत्ता कायम करने में सफल होगी। यही कारण है कि मोदी, शाह सहित प्रदेश संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी विगत कई महीनों से विंध्य, महाकौशल पर अधिक फोकस कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि विंध्य, महाकौशल दो ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भाजपा को कमजोर बताया जा रहा है। यही कारण है कि प्रदेश संगठन इन क्षेत्रों पर अधिक फोकस कर रहा है।

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