शांत, सौम्य और संवेदनशील मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की यह बौखलाहट आखिर किसलिये?



--विजया पाठक (संपादक - जगत विजन),
भोपाल - मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ कमलनाथ पर भद्दी टिप्पणियां कर प्रदेश की जनता का अपमान कर रहे मुख्‍यमंत्री चौहान

■ अपनी सरकार के 20 सालों का हिसाब-किताब लेकर चुनाव में जाएं मुख्‍यमंत्री शिवराज, झूठे आरोप और भद्दी टिप्पणियां क्यों?

कहते हैं ना जब नाश मनुष्‍य पर छाता है तब पहले विवेक मर जाता है। यह बात अब मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर चरितार्थ कर रही है। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान अभी हुआ भी नहीं है लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बौखलाहट बाहर आना शुरू हो गई है। कभी शांत, सौम्य और संवेदनशील व्यक्तित्व रखने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बातचीत का स्तर दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है। राज्य के मुखिया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ को लेकर भद्दी टिप्पणियां करने से खुद को तनिक भी पीछे नहीं रख पा रहे हैं। दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ पर जो टिप्पणियां की उसको लेकर पूरे देश में चर्चा है। शिवराज सिंह चौहान पद की संवेदनशीलता को छोड़ते हुए कमलनाथ को कभी कपटनाथ, कभी कहते हैं उम्र हावी हो गई है, कभी पागल जैसे भद्दे शब्दों का उपयोग करते हैं, कभी सड़क छाप नेता कहते हैं। सवाल यह उठने लगे हैं कि आखिर शिवराज सिंह चौहान की यह बौखलाहट किसलिये है। कहीं उन्हें यह लगने तो नहीं लगा कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी सरकार सत्ता से बाहर जाने वाली है। चुनाव परिणाम चाहे जो हो, लेकिन प्रदेश में राजनेताओं द्वारा एक दूसरे पर जिस तरह से भद्दी टीका टिप्पणियां की जा रही हैं, उससे कहीं न कहीं प्रदेश की छवि राष्ट्रीय स्तर पर खराब होती है।

● संगठन और उच्च पदाधिकारियों को देना चाहिए ध्यान

प्रदेश के मुखिया द्वारा बीते लगभग दो वर्षों से कमलनाथ पर जो भी भद्दी टिप्पणियां की जा रही हैं उन टिप्पणियों पर संगठन और पार्टी के पदाधिकारियों को ध्यान देना चाहिए। क्योंकि अगर संगठन और पदाधिकारी ऐसे ही चुप्पी साधे बैठे रहे हैं तो निश्चित ही वो दिन दूर नहीं जब सवाल जबाव का यह दौर व्यक्तिगत दुश्मनी में बदल सकता है जिससे प्रदेश को बड़ा नुकसान हो सकता है।

● नरोत्तम की तरह बदजुबान हो रहे हैं शिवराज

अभी तक जहां हमने प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को ही बदजुबानी करते हुए देखा है और सुना है। मिश्रा ही एक मात्र पूरी पार्टी में वो शख्स थे जिन्हें कमलनाथ और कांग्रेस सहित अलग-अलग मुद्दों पर टिप्पणियां देते थे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की दखलअंदाजी के बाद नरोत्तम मिश्रा तो शांत हो गये लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उन्हीं की तर्ज पर चलकर बदजुबान होते चले जा रहे हैं।

● कमलनाथ ने शिवराज को बताया सड़क छाप राजनेता

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान की भद्दी टिप्पणियों का सटीक जबाव देते हुए उन्हें सड़कछाप नेता बताया है। कमलनाथ ने कहा कि ‘शिवराज, कुछ दिन पहले आप मेरा अंत करना चाहते थे और आज आपने मुझे पागल कहा है। पूरी दुनिया देख रही है कि मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री कैसी हरकतें कर रहे हैं? उसके भीतर की सारी सभ्यता, मर्यादा और संस्कार समाप्त हो चुके हैं। वह सड़क छाप गुंडों की भाषा बोल रहे हैं।

● प्रदेश की जनता का अपमान है - कमलनाथ

कमलनाथ ने कहा कि मुझ पर की गई अपमानजनक टिप्पणियां प्रदेश की जनता का अपमान है। उन्होंने बड़ा मन दिखाते हुए कहा कि मुझे अपने अपमान की फिक्र नहीं है। मैं तो पिछले 44 साल से मध्यप्रदेश की जनता की सेवा कर रहा हूं और आखिरी सांस तक करता रहूंगा। लेकिन मुझे दुख इस बात का है कि मध्यप्रदेश जैसे महान राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ऐसे कुंठित विचारों वाला व्यक्ति बैठा है। ऐसे व्यक्ति का मुख्यमंत्री होना प्रदेश की 08 करोड़ जनता का अपमान है।

● दो समूहों के बीच में तनाव पैदा करना चाहते हैं शिवराज

बीते दिनों कमलनाथ द्वारा छिंदवाड़ा में स्थानीय समूह के साथ रोजा इफ्तार में बैठना शिवराज सिंह चौहान को बिल्कुल पसंद नहीं आया। इसका कारण यह है कि छिंदवाड़ा में अमित शाह की रैली पूरी तरह से फैल हो गई और रैली की यह स्थिति का भांडा पार्टी ने शिवराज सिंह चौहान के ऊपर फोड़ा। इसके जबाव में शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ को घेरते हुए बयान दिया कि कमलनाथ प्रदेश में दंगा करवाना चाहते हैं। एक तरफ वह रोजा इफ्तार में बैठते हैं दूसरी तरफ सुंदरकांड और हवन में बैठकर राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम करते हैं। चौहान के बयान से उनकी बौखलाहट साफ दिखाई पड़ती है कि अमित शाह की रैली फ्लॉप होने का खामियाजा शिवराज सिंह चौहान को अपनी कुर्सी गवांकर देना पड़ सकता है। खैर, 2023 के चुनाव पास है सरकार को अपने शासनकाल का हिसाब तो जनता को देना ही होगा।

● यह कैसा तरीका है मुखिया का सवाल पूछने का, अब लाश पर राजनीति कर रहे हैं शिवराज

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रोजाना स्मार्ट सिटी पार्क में मीडिया से चर्चा के दौरान कमलनाथ से सवाल पूछते हैं। लेकिन एक मुख्यमंत्री का इतना स्तर हीन सवाल पूछने का तरीका बिल्कुल शोभा नहीं देता। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कभी कमलनाथ को कपटनाथ कहते हैं, तो कभी पागल जैसे भद्दे शब्दों का उपयोग करते हैं। एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का इस तरह से भद्दी टिप्पणियां करना कहां की राजनीति का हिस्सा है। शिवराज सिंह ने कमलनाथ के ऊपर यहां तक कह दिया कि वो कोरोना में हुई मौतों पर खुश होते थे, पर आपके काल में तो मृत्यु का तांडव इस प्रदेश ने देखा वो जलती हुई चिताओं की कतारें अभी तक लोगों के जेहन से नहीं गई है। आपके मंत्री और स्वास्थ विभाग ने तो उस महातांडव को भी कमाई का जरिया बना दिया था। दिनांक 21 मई 2021 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी विश्व स्वास्थ्य आंकड़े की वार्षिक रिपोर्ट- 2021 (https://www.who.int/data/gho/publications/world-health-statistics) दी थी, इस रिपोर्ट में अंकित किया गया था कि महामारी से विश्व के कुल संक्रमितों की संख्या 166,466,762 (https://www.worldometers.info/coronavirus/) में से भारत में संक्रमितों की संख्या 26,285,069 है, जो कि विश्व का 16% है। रिपोर्ट-2021 के 80 लाख मृत्यु के 16% के हिसाब से भारत में करीब 13 लाख लोगों की मृत्यु कोरोना महामारी से हुई है। देश की कुल आबादी जो कि 135 करोड़ है, उसमें मध्यप्रदेश की कुल आबादी 8.66 करोड़ है। जिसका अनुपात प्रतिशत 6.41% है। उसमें आबादी प्रतिशत के आधार से मध्यप्रदेश में करीब 83,330 लोगों की मृत्‍यु हुई है। इस रिपोर्ट में प्रदेश के गांवों में हुई मृत्‍यु को नहीं जोड़ा गया है। यदि गांवों में हुईं मृत्‍यु को जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा 1,50,000 के पार हो जाएगा। शिवराज सिंह ने हरेक मृत्यु पर 01 लाख देने की घोषणा की थी, उसी हिसाब से 1500 करोड़ के लगभग का मुआवजा आपको बांटना था। झूठी घोषणाएं आपकी फितरत सी बन गई है। 2020 में फसल खराब होने का मुआवजा हो या अभी आपकी लाडली बहना योजना और बेरोजगार युवाओं को प्रतिमाह 8000 रुपए आपके सब योजनाएं ही हवा-हवाई हैं। प्रदेश में हर साल इन दोनों योजनाओं का वास्तविक आबादी के हिसाब से खर्च 1.80 लाख करोड़ बनता है जबकि मध्यप्रदेश का कुल बजट ही 3.5 लाख करोड़ के लगभग है।

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