क्या छिंदवाड़ा विकास मॉडल बनेगा 2024 लोकसभा चुनाव का मुद्दा?



--विजया पाठक (संपादक - जगत विजन),
भोपाल - मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● देश के सबसे अच्छे डेवलपमेंट मॉडल पर अब भाजपा की नजरें क्यों?

● पिछले 40 सालों की कमलनाथ की मेहनत का फल है "छिंदवाड़ा विकास मॉडल"

2024 के लोकसभा चुनावों का शंखनाद भाजपा के चाणक्य अमित शाह ने मध्यप्रदेश के छिन्दवाड़ा से शुरू किया है। कोई 40 वर्ष पहले भारत के नक्शे में पिछड़े आदिवासी जिले को तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने यह कहकर कमलनाथ को सौंपा कि आज मैं अपने तीसरे बेटे को छिन्दवाड़ा सौंपती हूं। कमलनाथ ने पिछले 40 वर्षों से बेटे बनकर ही छिन्दवाड़ा की सेवा की है और राजनीति से इतर आज देश में "छिन्दवाड़ा विकास मॉडल" की चर्चा हो रही है। साथ ही साथ छिन्दवाड़ा भाजपा के लिए ऐसा अभेद किला बन गया जिसे वो भविष्य में भी शायद ही तोड़ पाए। यह एक ऐसा विकास मॉडल बना जिसकी विकास संरचना में कमलनाथ सरकारी डेवलपमेंट के साथ-साथ उद्योगों से अपने व्यक्तिगत रिश्तों से स्किल डेवलपमेंट मॉडल खोलते गए। आज छिन्दवाड़ा शायद भारत का एक ऐसा जिला होगा जहां होलस्टिक डेवलपमेंट हुआ है। जिले में कोने-कोने पर रोजगार के लिए स्किल डेवलपमेंट इंडस्ट्री, कॉल सेंटर, साइंटिफिक खेती, बेस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे काम किये हैं। जिसके कारण ही आज कमलनाथ का "छिन्दवाड़ा मॉडल" की गूंज पूरे विश्‍व में है। उन्होंने छिन्दवाड़ा को एक पिछड़े आदिवासी क्षेत्र से एक डेवलपड जिला बना दिया है।

● अमित शाह भी कमलनाथ के छिंदवाड़ा मॉडल को भेदने में होंगे विफल

मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने विगत दिनों छिंदवाड़ा के चुनावी सभा में देश के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह प्रमुख रूप से उपस्थित हुए और उन्होंने चुनाव की तैयारियों को हरी झंडी दिखाई। बड़ा सवाल यह है कि भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह आखिर छिंदवाड़ा क्यों गये। इस चुनावी सभा का संकेत सीधे इस बात की तरफ इशारा करता है कि जिस तरह से कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस नेता पूरे प्रदेश में चुनाव की तैयारियां कर रहे हैं, उससे भाजपा को बड़ा नुकसान हो सकता है। वहीं, राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो अमित शाह का छिंदवाड़ा दौरा करने के कोई खास मायने सामने निकलकर आने वाले नहीं हैं। कमलनाथ को छिंदवाड़ा का गढ़ कहा जाता है और उन्होंने वहां पर स्थानीय लेवल पर जो विकास के कार्य किये हैं वो जनता के सामने उन्हीं का परिणाम है कि आज भी उस क्षेत्र में कमलनाथ के नाम की जय जयकार होती है।

● छिंदवाड़ा तो पहले से विकसित है

शाह की रैली से यह सवाल भी उठने लगे हैं कि जब भाजपा सरकार खुद यह बात स्पष्ट तौर पर जानती है कि छिंदवाडा को कमलनाथ ने पूरी तरह से चमका कर रखा है तो फिर उन्हें वहां विकास के नाम पर यात्रा करने की क्या आवश्यकता है। क्यो जनता को झूठा वायदा कर रहे हैं कि हम ऐसा कर देंगे वैसा कर देंगे। जबकि हकीकत कुछ और ही है। कमलनाथ को छिंदवाड़ा के लोग भगवान मानते हैं औऱ उन्होंने पिछड़े जिले से अग्रणी जिला अगर बनाने का काम किया है तो वह जनता के स्नेह और प्रेम से ही।

● कमलनाथ के छिंदवाड़ा मॉडल से कैसे पार पायेंगे

अगर हम कमलनाथ के छिंदवाड़ा मॉडल की बात करें तो वो अपने आप में एक बड़ा काम है, जो किसी भी नेता द्वारा किये गये कार्य में प्रमुख हैं। छिंदवाड़ा ये वो आदिवासी इलाका है जो कभी देश का सबसे पिछड़ा इलाका माना जाता था। लेकिन आज छिंदवाड़ा के पास विकास का अपना मुकम्मल मॉडल है। जिसका श्रेय कमलनाथ को जाता है। कहा जाता है कि कमलनाथ ने जिस भी मंत्रालय को संभाला उससे छिंदवाड़ा को कोई न कोई सौगात जरूर मिली है। आज छिंदवाड़ा से तीन राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं। यही नहीं, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज के अलावा फुटवेयर डिजाइन सेंटर, नॉलेज सिटी, 06 केंद्रीय विद्यालय, एक नवोदय स्कूल आदि वहां तैयार करवाये गये। उद्योग की बात करें तो हिंदुस्तान यूनी लीवर, ब्रिटानिया, रेमंड, भंसाली समेत कई निजी कंपनियों ने जिले में उद्योग लगाए हैं। यस बैंक, स्टैण्डर्ड चार्टर का लाभ लोगों को आज मिल रहा है। वहीं जिले के पातालकोट का जो विकास कमलनाथ ने किया है उसे वहां के निवासी कई पीढि़यों तक नहीं भूल पायेंगे।

● 40 साल से कमलनाथ का गढ़ है छिंदवाड़ा जिला

पिछले 40 साल से कमलनाथ का गढ़ है। वे यहां से लंबे समय तक सांसद रहे और अब विधायक हैं। उनके पुत्र नकुलनाथ सांसद हैं। कमलनाथ ने वर्षों पहले ही छिंदवाड़ा को जिस गति के साथ विकसित किया है वह अपने आप में एक मिसाल है। भाजपा नेता विकास के इस मॉडल को देखकर बुरी तरह परेशान हैं और अब कमलनाथ द्वारा किए गए इन कार्यों को अपना बताकर वोटों की राजनीति करने की योजना बना रहे हैं। जबकि भाजपा नेताओं को उन जिलों में जाकर काम करना चाहिए जो आज भी पिछड़े हैं जहां आज भी विकास नहीं हुआ, लोग आज भी परेशान हो रहे हैं। लेकिन भाजपा ने व्यक्ति विशेष को केंद्र में रखकर चुनाव जीतने की योजना पर यह भद्दा खेल रचा है जिसमें कामयाबी मिलना मुश्किल है।

● विधानसभा चुनाव में दे चुके हैं मात

2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जिले की सभी सात (छिंदवाड़ा, जुन्नारदेव, अमरवाड़ा, चौरई, सौंसर, परासिया और पांढुर्ना) विधानसभा सीटें जीती थीं। कमलनाथ मुख्यमंत्री बने तो छिंदवाड़ा से विधायक दीपक सक्सेना ने त्यागपत्र देकर सीट खाली कर दी और उपचुनाव में कमलनाथ ने फिर जीत दर्ज की। इसके बाद नगरीय निकाय के चुनाव हुए इसमें भी नगर निगम छिंदवाड़ा का महापौर कांग्रेस का चुना गया। इसी तरह जिला पंचायत के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष कांग्रेस के बने। कुल मिलाकर छिंदवाड़ा को अमित शाह और भाजपा जिस उद्देश्य के साथ चुनाव का मैदान बनाना चाहती है उसमे उनका सफल होना मुश्किल ही नहीं नामुकिन है।

● शिवराज ने कमलनाथ को कहा था कपटनाथ, झूठनाथ

मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छिंदवाड़ा में पूर्व सीएम कमलनाथ पर तीखा हमले करते हुए अमर्यादित भाषा का उपयोग किया। उन्होंने कमलनाथ को कपटनाथ और झूठनाथ भी कहा। ये कमलनाथ नहीं झूठनाथ हैं, रोज नई घोषणाएं करते हैं! छिंदवाड़ा तुम्हारी जागीर है क्या कमलनाथ, कोई ठेका लेकर रखा है क्या? पूरी कांग्रेस हो गई अनाथ। ऐसे कमलनाथ की छुट्टी करो छिंदवाड़ा से। मुख्‍यमंत्री को राजनीतिक द्धेष के चलते इस तरह की भाषा का उपयोग शोभा नहीं देती है।

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