भूपेश के भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों ने बढ़ाई कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें



--विजया पाठक (संपादक, जगत विज़न),
रायपुर - छत्तीसगढ, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ नेताओं के बीच मतभेद से कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन पर आएगी आंच

■ क्‍या आदिवासी मुख्‍यमंत्री की मांग के कारण मोहन मरकाम से बौखला गए भूपेश बघेल?

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन इसी महीने के अंतिम सप्ताह में होने जा रहा है। लेकिन उससे पहले ही राज्य की नौकरशाही और पार्टी नेताओं में गहमागहमी शुरू हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच खुली जंग शुरू हो गई है। भूपेश बघेल ने इस जंग का बदला लेने के लिए पार्टी आलाकमान से शिकायत की, जिसका परिणाम यह निकला कि पार्टी ने कार्यवाही करते हुए महामंत्री अरमजीत चावला को नोटिस जारी कर दिया है। यही नहीं पार्टी ने अमरजीत चावला के साथ ही अरविंद नेताम को भी नोटिस जारी किया है। अमरजीत चावला अरविंद नेताम के करीबी नेताओं में से एक हैं। जबकि अरविंद नेताम का आदिवासी सामाजिक नेताओं के साथ गहरा संबंध बताया जाता है। सूत्रों के अनुसार अरविंद नेताम के कारण ही बस्तर में कांग्रेस की जय-जयकार हो रही है। लेकिन इस मतभेद के बाद और बघेल के भ्रष्टाचार, आरक्षण विरोध के कारण कांग्रेस को बस्तर की आदिवासी सीटों से सफाई का अंदेशा जारी है।

● भूपेश बघेल के भ्रष्टाचार से परेशान है नेता

विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस को विपरीत परिस्थिति में चुनाव जिताने वाले अऱविंद नेताम के साथ भूपेश बघेल की पटरी नहीं बैठ पा रही है। आदिवासी इलाकों में संचालित विकास की योजनाओं में भ्रष्टाचार का विरोध और घूसखोरी से परेशान अरविंद नेताम ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की है। नेताम ने आदिवासी मुद्दों पर सरकार को आइना दिखाया है। नेताम की कुशलता के कारण ही बस्तर में कांग्रेस जन आकांक्षाओं में खरी उतरी है। लेकिन अब बस्तर में अपने गुटों को महत्व देने के लिए भूपेश बघेल ने अरविंद नेताम और मोहन मरकाम के खिलाफ मोर्चा खोला है। दोनों नेताओं के बीच भ्रष्टाचार को लेकर जमकर विवाद है। सूत्रों की मानें तो ईडी ने सौम्या चौरसिया और गिरोह के खनिज अधिकारियों से पूछताछ के बाद बड़ी कार्यवाही की थी। बताया जाता है कि उपसचिव सौम्या चौरसिया ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के इशारे पर बड़े पैमाने पर आदिवासी योजनाओं को सिर्फ कमीशनखोरी के लिए बाधित किया। इससे आदिवासी इलाकों में सरकार की कार्यशैली को लेकर खासी नाराजगी है। भूपेश बघेल के भ्रष्टाचार को संरक्षण देने से पार्टी के आदिवासी नेताओं के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।

● अधिवेशन की सफलता के लिए होड़ शुरू

कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन से पूर्व कामयाबी का श्रेय लेने की होड़ शुरू हुई है। सूत्रों के अनुसार नेतृत्व परिवर्तन की मांग के चलते अरविंद नेताम और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच शीतयुद्ध जारी है। आदिवासी विधायकों ने सामाजिक फोरम में खुलकर आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग की है। इस बात से चिंतित भूपेश बघेल ने अमरजीत चावला और मरकाम के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है।

● 40 करोड़ से अधिक होंगे खर्च

छत्तीसगढ़ में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन में लगभग 40 करोड़ रुपये का खर्चा होना है। इसकी व्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी और निजी संस्था से चंदा एकत्रित करने का कार्य किया जा रहा है। पहले भ्रष्टाचार और फिर चुनाव के पहले चंदा मांगने से जनता, उद्योगपतियों के बीच वसूलीबाज की छवि बन रही है। इसको लेकर राज्य के नेताओं में खासी नाराजगी है। जिस तरह से बीते चार सालों से बघेल के करीबियों द्वारा पार्टी की छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है, उससे उबर नहीं पाये और अब अधिवेशन के नाम पर चंदा खोरी शुरू हो गई है। आम लोगों के बीच चुनाव के पहले बिगड़ती छवि से पार्टी नेता खतरा महसूस कर रहे हैं।

● राज्य का हो सकता है नेतृत्व परिवर्तन

दावा है कि पार्टी आलाकमान छत्तीसगढ़, राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है। राज्य में ऐसी सुगबुगाहट है कि बघेल के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव जीतना लागतार कठिन है। इस बात को पार्टी आलाकमान भी स्वीकार कर चुका है। क्योंकि चार सालों से पूरा राज्य भ्रष्टाचार और बघेल के अत्याचारों से परेशान है। लीक से हटकर कार्य करने के चलते बघेल के करीबी अफसर, आज जेल की हवा खा रहे हैं। आईटी-ईडी की चार्जशीट में अखिल भारतीय सेवा के कई अफसरों के नाम दर्ज हैं। पार्टी नेताओं की मुश्किल बढ़ रही है और उन्हें जेल जाने का खतरा है। सत्ता, संगठन के नेताओं ने नौकरशाहों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही का मुद्दा उठाया। ईडी के आरोपी में लगभग सभी अधिकारी, मुख्यमंत्री बघेल, सौम्या चौरसिया के करीबी के नाम शामिल हैं। उनके कारनामों से कांग्रेस को नुकसान है। अफसरों के हावी होने से विधायक नेताओं को भी जनता कटघरे में खड़ा कर रही है। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी नेताओं के बीच सिरफुट्टोवल की नौबत बन सकती है।

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