आतंकवाद समर्थन देशों को दंडित किया जाना चाहिए : प्रधानमंत्री मोदी



--राजीव रंजन नाग,
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ नो मनी फॉर टेरर

पाकिस्तान और चीन की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि कुछ देश अपनी विदेश नीति के तहत आतंकवाद का समर्थन करते हैं जबकि कुछ अन्य आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई को रोककर अप्रत्यक्ष रूप से इसका समर्थन करते हैं। "कुछ देश अपनी विदेश नीति के हिस्से के रूप में आतंकवाद का समर्थन करते हैं। वे उन्हें राजनीतिक, वैचारिक और वित्तीय समर्थन की पेशकश करते हैं।" प्रधान मंत्री ने नई दिल्ली में आतंकवाद के वित्तपोषण पर एक अंतरराष्ट्रीय मंत्रिस्तरीय सम्मेलन - 'नो मनी फॉर टेरर' को संबोधित करते हुए कहा। पीएम मोदी ने कहा, "आतंकवादियों के लिए सहानुभूति" पैदा करने का प्रयास करने वाले संगठनों और व्यक्तियों को अलग-थलग किया जाना चाहिए।

‘एक आतंकवादी और आतंकवाद से लड़ना दोनों अलग-अलग तरह की चीजें हैं। एक आतंकवादी को हथियारों की मदद से खत्म किया जा सकता है, लेकिन उनकी फंडिंग पर चोट किए बिना ये उपलब्धि जल्द ही हाथ से फिसल भी सकती है। आतंकवादी एक व्यक्ति है लेकिन आतंकवाद व्यक्तियों और संस्थाओं का एक संगठित नेटवर्कॉ। आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए एक व्यापक और प्रोएक्टिव सोच की जरूरत है। हमें आतंकवादियों को ढूंढकर उनके सहयोगी नेटवर्क को तोड़ना होगा और उनकी फंडिंग पर चोट करनी होगी।

टेरर फंडिंग के खिलाफ दिल्ली में शुरू हुए दो दिवसीय ‘नो मनी फार टेरर फंडिंग’ सम्मेलन में दुनिया भर के 72 देशों के प्रतिनिधि, दर्जनभर से ज्यादा मल्टीनेशनल समूह और एनजीओ के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। लेकिन आतंकवाद की फैक्ट्री माने जाने वाले पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ-साथ चीन ने इस वैश्विक सम्मेलन से किनारा कर लिया है। इससे आतंकवाद की तिकड़ी पूरी तरह एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हो गई है।

सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा कि कई दशकों से अलग-अलग नामों और स्वरूपों में आतंकवाद ने भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। हमने अपने हज़ारों लोगों का बलिदान दिया। डटकर साहस के साथ आतंकवाद का मुकाबला भी किया है। दुनिया ने जब आतंकवाद को गंभीरता से लेना शुरू किया उससे बहुत पहले भारत ने इसके भयानक दंश का सामना किया था।

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद को मानवता, स्वतंत्रता और सभ्यता पर हमला करार देते हुए कहा कि ये कोई सीमा नहीं जानता। सिर्फ यूनिफॉर्म, यूनिफाइड और ज़ीरो टॉलरेंस की नीति से ही आतंकवाद को हराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से आतंकवाद का असर गरीबों और स्थानीय अर्थव्यस्था पर पड़ रहा है।

चीन ने कई मौकों पर लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) प्रमुख हाफिज सईद सहित आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को विफल किया है। केंद्र सरकार का कहना है कि आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों को रोकने के लिए फंडिंग पर रोक लगाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने "आतंकवाद के वित्तपोषण की जड़" पर प्रहार करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। पीएम ने कहा, "यह सर्वविदित है कि आतंकवादी संगठनों को कई स्रोतों से पैसा मिलता है। एक स्रोत राज्य का समर्थन है।"

"आतंक के वित्तपोषण और भर्ती के लिए नई प्रकार की तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। नई वित्त प्रौद्योगिकियों की एक समान समझ की आवश्यकता है। कई बार, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अपराधों जैसी गतिविधियों को भी आतंक के वित्त पोषण में मदद करने के लिए जाना जाता है। ऐसे परिसर में पर्यावरण, यूएनएससी और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में मदद कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि सभी आतंकवादी हमले समान आक्रोश और कार्रवाई के पात्र हैं।

आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को दंडित किया जाना चाहिए। साथ ही ऐसा करने वाले संगठनों और व्यक्तियों को अलग-थलग किया जाना चाहिए।

टेरर फंडिंग में संगठित अपराध भी एक बड़ा स्रोत है। प्रधानमंत्री ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि संगठित अपराधों को भी इससे अलग नहीं देखा जाना चाहिए। इन गैंग्स का भी आतंकवादी संगठनों से गहरा रिश्ता है। गैंग्स की कमाई, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी से आने वाला पैसा आतंकवाद के प्रचार-प्रसार में झोंका जाता है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में संगठित अपराध पर कार्रवाई भी बेहद जरूरी है।

तकनीक के मौजूदा दौर में आतंकवादी गतिविधियां भी बदल रही हैं। दिन-ब-दिन बढ़ती तकनीक चुनौती भी है और समाधान भी। टेरर फंडिंग के खिलाफ शुरू हुए दो दिन के इस महाकुंभ में चार अलग-अलग सत्रों में इससे जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा होगी। पहले सत्र में टेरर फंडिंग के नए तौर तरीकों पर ब्रेन स्टोर्मिंग होगी। जिसमें टेरर फंडिंग के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल जैसी चिंताएं भी शामिल हैं।

एनआईए के महानिदेशक दिनकर गुप्ता कहते हैं- ‘टेरर फंडिंग के लिए अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का भी इस्तेमाल हो रहा है और हमारे पास इसके सबूत भी हैं। क्रिप्टोकरेंसी और क्राउडफंडिंग से आतंकवाद को पालने-पोसने और सोशल मीडिया की कमजोर मॉनिटरिंग जैसे विषय बेहद चिंताजनक हैं। सम्मेलन में इनपर भी चर्चा होगी।’ दूसरे सत्र में टेरर फंडिंग में शामिल औपचारिक और अनौपचारिक वित्तीय संगठनों पर चर्चा है। जबकि तीसरे में टेरर फंडिंग्स को रोकने की तकनीक पर व्यापक चर्चा का प्रस्ताव है। चौथे सत्र में टेरर फंडिंग को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा होगी।

"आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों और आतंकवादियों के लिए सहानुभूति पैदा करने की कोशिश करने वाले संगठनों और व्यक्तियों पर भी कीमत लगाई जानी चाहिए। उन्हें अलग-थलग भी किया जाना चाहिए। दुनिया को एकजुट होने की जरूरत है।" प्रधानमंत्री ने कहा, "दुनिया के गंभीर रूप से संज्ञान लेने से बहुत पहले ही हमारे देश ने आतंक की विभीषिका का सामना किया था। दशकों से आतंकवाद ने विभिन्न रूपों में भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन हम बहादुरी से लड़े हैं।"

उन्होंने कहा “आतंकवादी लगातार हिंसा करने, युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए नए तरीके खोज रहे हैं। आतंकवादी सामग्री को फैलाने और अपनी पहचान छिपाने के लिए 'डार्कनेट' का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, आभासी संपत्ति जैसे उपयोग में वृद्धि हुई है। क्रिप्टोक्यूरेंसी। हमें पैटर्न को समझने और उनके समाधान खोजने की जरूरत है।"

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