शिवराज सरकार बांट रही नौनिहालों को कीटनाशक युक्‍त मूंग



--विजया पाठक (एडिटर- जगत विजन),
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ कीटनाशकों पर बैन लगाने में क्‍यों कतरा रही है सरकार?

■ क्‍या जैविक खेती को बढ़ावा देना एक मुगालता भर है?

मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार पोषण आहार के वितरण को लेकर एक बार फिर चर्चा में है। तीन दिन पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में विदिशा जिले में हुए एक आयोजन में बच्चों को पोषण आहार के रूप में मूंग दाल के पैकेट वितरित किये गये। ये वहीं मूंग दाल के पैकेट हैं जिनकी खेती के दौरान किसान उसमें बड़ी मात्रा में कीटनाशक का उपयोग करते हैं। यानि की अब प्रदेश के मुखिया कीटनाशक के उपयोग बंद करने के बजाय अपने हाथों से खुद छोटे-छोटे बच्चों को कीटनाशक युक्त पोषण आहार के पैकेट वितरित कर रहे हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार किसानों से जैविक खेती करने का अनुरोध कर रहे हैं। वहीं उन्हीं के मंत्रालय के आला अफसर उनके इस कथन का पालन करवाने में असफल है। इस मूंग के कारण बच्‍चों पर बुरा असर होना निश्चित है।

• मध्य प्रदेश और पोषण आहार का है पुराना नाता

पोषण आहार के वितरण को लेकर प्रदेश की शिवराज सरकार हमेशा से ही विवादों में रही है। कभी पोषण आहार के तहत वितरित किये जाने वाले समान की गुणवत्ता तो कभी पोषण आहार वितरित करने वाली एजेंसी को ठेका देने का मामला चर्चा में रहता है। खैर इन सबसे उलट अभी मामला प्रदेश के लाखों छोटे बच्चों से जुड़ा है, जिनके स्वास्थ्य के साथ खेलने का अधिकार न तो सरकार के पास और न ही किसी अफसर के पास है। इसलिए शिवराज सरकार को पोषण आहार के तहत वितरित की जाने वाले अन्न की गुणवत्ता को नये सिरे से जांचने की आवश्यकता है।

• बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रही सरकार

मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार भले ही खुद को बच्चों का हितैषी बताती हों, लेकिन सच क्या है ये अब सामने आ गया है। यह सरकार बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने में कोई कोताही नहीं बरत रही है। लगातार बच्चों को कीटनाशक मिले पोषण आहार को वितरित किया जा रहा है, जो कि अपने आप में स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद खतरनाक है। बच्चों को पोषण आहार में कीटनाशक के उपयोग का सिलसिला यही नहीं रूका तो वो दिन दूर नहीं जब प्रदेश भर के बच्चों का स्वास्थ्य अस्थिर हो जायेगा और परिवारों में बीमार व्यक्तियों की संख्या बढ़ जाएगी।

• अब मध्य प्रदेश में यह ट्रेंड लाना चाहती है सरकार

प्रदेश सरकार की उदासीनता और किसानों को आसानी से बाजार में उपलब्ध हो रहे कीटनाशकों के कारण मध्य प्रदेश ही बहुत जल्दी तरह-तरह की बीमारियों से पीड़ित वाले राज्यों की सूची में शामिल होगा। मध्य प्रदेश में भी अब यह परंपरा देखने को मिल रही है। यहां भी किसान तीन रबी की खेती के लिए गेहूं की कटाई के बाद उसमें मूंग की खेती करते हैं। खासतौर से नर्मदा नदी किनारे स्थित जिले नर्मदापुरम, खंडवा, हरदा, विदिशा सहित ये वो जिले हैं जहां सबसे ज्यादा मूंग की खेती की जाती है। लगभग प्रदेश में अभी 9 लाख हेक्टेयर में 01 करोड़ 35 लाख क्विंटल मूंग पैदा की जाती है। जिस प्रकार से अधिक फसल लेने की लालसा में किसान खेतों में कीटनाशकों का उपयोग कर रहे है। उससे यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाला समय मध्य प्रदेश के लोगों के लिए भयावह स्थिति लाने वाला है।

• वैज्ञानिकों की राय घातक है कीटनाशक का उपयोग

वैज्ञानिकों की मानें तो मूंग की खेती में कीटनाशक का उपयोग बेहद खतरनाक है। यह सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि जानवरों के चारे, दूध पर भी बुरा असर करता है। एक बार कीटनाशक डालने के बाद इसका असर पांच साल तक मिट्टी पर रहता है। मूंग की खेती में जो अभी कीटनाशक का उपयोग हो रहा है उससे खून, लीवर, किडनी, कैंसर जैसी बीमारियों को आमंत्रण देने जैसा है।

• कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के दौरान देश में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग 54.38 मिलियन टन, 56.21 मिलियन टन और 33.85 मिलियन टन उर्वरक उत्पाद का इस्तेमाल हुआ है। पूरे देश में पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना वो राज्य है जहां सबसे ज्यादा खेती में कीटनाशक का उपयोग किया जाता है। इस कारण से न सिर्फ मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम हुई है बल्कि राज्यों के करोड़ों लोगों में बीमारियों का संचार हुआ है। बात करें अगर सिर्फ पंजाब की तो देश के कुल कीटनाशकों का 18 प्रतिशत पंजाब की खेती में उपयोग होता है। पंजाब में मालवा क्षेत्र की कपास बेल्ट पूरे 15 प्रतिशत है और इसमें पूरे पंजाब का 70 प्रतिशत कीटनाशक उपयोग होता है। फिरोजपुर, फरीदकोट, मुक्तसर, बठिंडा, मानसा और संगरूर रसायनों के अत्यधिक प्रयोग वाले जिले हैं।

• कैंसर बेल्ट के नाम से जाना जाता है पंजाब

अधिक उपज की लालसा में पंजाब की जमीन कीटनाशक के छिड़काव और खादों से फसलों के रूप में जहर उगल रही है। कैंसर यहां आम बीमारी की तरह हो गया है। यही वजह है कि अब पंजाब की पहचान कैंसर बेल्ट के रूप में होने लगी है। पंजाब में हुए एक सर्वे के मुताबिक राज्य के अंदर कैंसर की सबसे बड़ी वजह है कि खेतों में उपयोग होने वाले कीटनाशक का छिड़काव। खेती किसानी में उपयोग होते कीटनाशक बीमारियों को घर देने का काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के चट्टेवाला गांव में वर्ष 2021 में 15 लोगों की जान महज कैंसर से गई थी। यही नहीं 2011 से 2018 तक पीजीआई चंडीगढ़ रीजनल कैंसर सेंटर में कुल 55,861 कैंसर के मरीज आए। इनमें से 51,807 कैंसर के व्यस्क मरीज थे। जिनमें कैंसर से पीड़ित 24,022 महिला और 27,785 पुरुष थे। यही नहीं हर साल हजारों नये कैंसर पीड़ित मरीज सामने आ रहे हैं।

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