--विजया पाठक (एडिटर- जगत विजन),
रायपुर-छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
■ तत्कालीन आईजी मुकेश गुप्ता को राहत देने वाली याचिका हुई खारिज
■ जगत विजन पत्रिका की सच्ची पत्रकारिता की हुई जीत
■ तब जो छापा था वो भी सच था, जो आज छाप रहे हैं वो भी सच है
राजनांदगांव जिले के मदनवाड़ा गांव के पास 12 जुलाई 2009 को नक्सलियों ने घात लगाकर पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया था। इसमें तत्कालीन एसपी विनोद चौबे समेत 29 जवानों की शहादत हो गई थी। इस घटना को लेकर जगत विजन पत्रिका में सितंबर 2017 के अंक में ''मदनवाड़ा नक्सली हत्याकांड, जवान शहीद, सवाल जिंदा'' शीर्षक से 46 पन्नों की आवरण कथा छापी थी। जगत विजन पत्रिका में इस मदनवाड़ा कांड में तत्कालीन आईजी मुकेश गुप्ता की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए थे। पत्रिका में प्रकाशित आवरण कथा के आधार पर 2020 में जस्टिस शंभूनाथ श्रीवास्तव की अध्यक्षता में जांच आयोग बिठाया था। जिनकी रिपोर्ट में मुकेश गुप्ता दोषी पाए गए हैं।
मदनवाड़ा हत्याकांड में जांच आयोग द्वारा पेश रिपोर्ट की फाइंडिंग को चुनौती देते हुए निलंबित आइपीएस मुकेश गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें अंतरिम राहत के रूप में जांच आयोग द्वारा पेश रिपोर्ट के आधार पर उन पर होने वाली कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। मुकेश गुप्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पैरवी की थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करने और अंतरिम राहत के आवेदन के फैसले को सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को कोर्ट ने याचिकाकर्ता मुकेश गुप्ता की अंतरिम राहत की मांग को खारिज कर दिया है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर जगत विजन पत्रिका की सच्ची पत्रकारिता की जीत हुई है। पत्रिका के माध्यम से हमने मुकेश गुप्ता पर जो आरोप लगाये थे वे सभी सही साबित हो रहे हैं। जिस समय मैंने मदनवाड़ा कांड में मुकेश गुप्ता के खिलाफ स्टोरी की थी, उस समय छत्तीसगढ़ में मुकेश गुप्ता की तूती बोलती थी। उसके खिलाफ लिखना तो दूर, कोई लिखने की सोच भी नहीं सकता था। इनके खिलाफ लिखने पर मुझ पर केस लादे गए, डराने के लिए फोन करवाए गए। पर मैं सच्चाई के साथ अडिग रही। इसके बदले मुझे काफी मानसिक रूप से परेशान किया गया था। मुझे परेशान करने के लिए विभिन्न मामलों को लेकर चार-चार झूठे केस लगाए गए थे।
● मुकेश गुप्ता की लापरवाहियां हुईं उजागर
राजनांदगाँव के मदनवाड़ा कांड को लेकर पहले जस्टिस शंभुनाथ श्रीवास्तव की अध्यक्षता में न्यायिक जांच में दुर्ग रेंज के तत्कालीन आईजी मुकेश गुप्ता की मुठभेड़ के दौरान क़ई लापरवाही सामने आयी हैं। जिसकी रिपोर्ट छत्तीसगढ़ विधानसभा में 16 मार्च 2022 को पेश की गई। आयोग के चेयरमैन जस्टिस श्रीवास्तव ने तत्कालीन आईजी मुकेश गुप्ता को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए माना कि लड़ाई के मैदान में अपनाए जाने वाले गाइडलाइनों तथा नियमों के विरुद्ध काम किया। मदनवाड़ा में हुए नक्सली हमले में मुकेश गुप्ता की भूमिका संदिग्ध पाई गई। आयोग ने साफ कहा कि अगर कमांडर/आइजी जोन ने बुद्धिमता पूर्ण कृत्य किया होता या साहस दिखाया होता तो नतीजा बिल्कुल अलग आता। आइजी के पास सीआरपीएफ या सीएएफ को बुलाने का पर्याप्त समय था। मुकेश गुप्ता घटना क्षेत्र में सुबह 9.30 बजे से शाम 5.15 बजे मौजूद थे। उनकी मौजूदगी में ही सारी जनहानि हुई। आयोग की रिपोर्ट में सामने आया कि ऐसा प्रतीत होता है कि मुकेश गुप्ता अपने जीवन के लिए डर रहे थे। उन्होंने एसपी विनोद चौबे को नक्सलियों से मुकाबला करने के लिए ढकेल दिया। मुकेश गुप्ता अपनी बुलेटप्रूफ कार में बैठे रहे। यह कोई बहादुरी नहीं है कि आप नक्सलियों के सामने खामोश दर्शक बनकर खड़े रहे।
बरहहाल सरकार बदल गई पर परिस्थिति नहीं बदली हैं। तब मुकेश गुप्ता सरकार के सिरमौर थे आज नान घोटाले के प्रमुख अभियुक्त अनिल टुटेजा, सीडी कांड कर्ताधर्ता विनोद वर्मा और महिला अधिकारी प्रदेश चला रहे हैं। जैसी परिस्थिति 2018 में भाजपा की छत्तीसगढ़ में हुई, उससे बुरी परिस्थिति 2023 में कांग्रेस की चुनाव में होंगी। आखिर में हम तब भी सही थे, हम आज भी सही थे, तब जो छापा वो भी सच था जो आज छाप रहे हैं वो भी सच है।