विचारों के आदान-प्रदान के जरिये आगे बढ़ने का समय : उपराष्ट्रपति



--राम विलास,
राजगीर, नालंदा-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ भारत का विश्वास शांति और सह अस्तित्व में : उपराष्ट्रपति

■ कोविड नेचुरल नहीं आर्टिफिशियल है : नीतीश कुमार

■ चुनौतियों के बीच धर्म ही आशा : पवित्रा

रविवार को नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय छठे इंटरनेशनल धर्म-धम्म सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि विजडम यानि दृष्टि का प्रतीक रहा है। भारतवर्ष के प्राचीन गौरव को फिर से प्रतिष्ठित करने की आवश्यकता है। हमारी कोशिश हो कि नए नालंदा विश्वविद्यालय में भी पूरे विश्व के विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आएं. विश्वविद्यालयों को समाज और राजनीति के लोगों को वैचारिक रूप से मार्गदर्शन देना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि कोविड की चुनौती ने हमें विचारों के आदान-प्रदान के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया है। शांति ही विकास की सबसे बड़ी शर्त है। हम अपने जीवन में शांति कैसे लाएं, तनाव कैसे कम करें, जीवन को सुखमय कैसे बनाएं - यह विचार करना आज के समय की जरूरत है। हिन्दू धर्म और बौद्ध धर्म के बीच सामंजस्य के साथ हमें उसे आचरण में भी उतारने की जरूरत है। भारत अपने ज्ञान को साझा करने में विश्वास करता है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने धर्म के अनुपालन का संदेश दिया। कोविड ने हमें जीवन शैली, विचार और खानपान के दृष्टिकोण से अपने मूल की ओर लौटने का संदेश दिया है।

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने ‘कोविड उपरांत विश्व व्यवस्था के निर्माण में धर्म-धम्म परंपराओं की भूमिका’ विषय पर अपना विचार रखा। उन्होंने कहा कि कई मायनों में कोरोना संकट ने शिक्षक की भूमिका निभाई है। अगर हम इससे सीखना चाहें तो बहुत कुछ सीख सकते हैं।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल फागू चौहान ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के विध्वंस के 800 सौ साल बाद फिर से नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना हुई है। नालंदा विश्वविद्यालय ज्ञान के माध्यम से दुनिया को जोड़ने में सेतु का काम कर सकता है। विश्व जिन समस्याओं का सामना कर रहा है, उस पर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारतीय धर्म और ज्ञान परंपरा ने हमेशा सत्य, अहिंसा, प्रेम, करुणा और निष्ठा का संदेश दिया है। आज समाज और प्रकृति के सामंजस्य की आवश्यकता है। साथ ही, दुनिया में सामने आ रही समस्याओं से निपटने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास की जरूरत है। यह महत्वपूर्ण बात है कि इस आयोजन में व्यापक विचार-विमर्श करने के लिए दुनिया के 150 विद्वान और विचारक एक मंच पर जुटे हैं। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पौधारोपण किया गया। समारोह को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा श्रीलंका की परिवहन मंत्री पवित्रा वन्नियारच्ची ने विचार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुनैना सिंह ने आगत अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में इंडिया फाउंडेशन के पूर्व अध्यक्ष राम माधव, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, सांसद कौशलेन्द्र कुमार एवं अन्य प्रमुख हस्तियां उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि कोविड विचित्र तरह की बीमारी है। आज तक ऐसी बीमारी कभी देश और दुनिया में नहीं हुई है। यह काफी खतरनाक है। कोविड निश्चित रूप से नेचुरल नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल है। इसकी शुरुआत चीन के बुहान से हुई थी। चीन में क्या हो रहा है। यह किसी को पता नहीं चलता है। उन्होंने कहा कि कोविड विश्व व्यवस्था के निर्माण में धर्म -धम्म परंपराएं विषय पर आयोजित नालंदा विश्वविद्यालय के इस सम्मेलन से देश और दुनिया को नई दिशा की उम्मीद की जा रही है। नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित धर्म इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड दो साल से प्रभावी है। ऐसे तो कोविड के निदान के लिए दुनिया में काम हुआ है। लेकिन भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आश्चर्यजनक काम हुए हैं। फिर भी कोविड से सतर्क रहने की आवश्यकता है। देश में एक करोड़ से अधिक टीकाकरण किया जा चुका है। बिहार की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पांच करोड़ लोगों को पहला और दो करोड़ लोगों को दूसरी डोज का टीकाकरण हो चुका हैं। सीएम ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में दुनिया के लोग जूटे हैं। उन्हें कोविड के निदान के लिए कोई न कोई रास्ता निकालना चाहिए। नालंदा विश्वविद्यालय के अतीत की चर्चा करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि वहां 10 हजार छात्र पढ़ते थे। वह दुनिया के आकर्षण का केंद्र था। उन्हें विश्वास है कि नालंदा विश्वविद्यालय फिर से दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करेगा। नालंदा विश्वविद्यालय में हो रहे निर्माण कार्य और इसकी गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए वर्ष 2007 से ही प्रयास किए गए। यह कोई सामान्य विश्वविद्यालय नहीं है। विश्वविद्यालय के विकास के लिए जो कुछ भी जरूरी हो, वह किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म-धम्म सम्मेलन में विमर्श से कुछ ऐसी बात निकलनी चाहिए जो देश-दुनिया के लिए उपयोगी हो। कोरोना संकट को अभूतपूर्व और कृत्रिम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत ही खतरनाक बात है। कोरोना ने पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले लिया। राजगीर की पौराणिकता और मगध साम्राज्य की राजधानी की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत पुरानी जगह है। पंच पहाड़ियों के बीच मगध साम्राज्य की राजधानी थी। वर्तमान भारत से भी बड़ा उसका क्षेत्रफल था। यह भगवान बुद्ध, तीर्थंकर महावीर, मखदूम साहब, गुरु नानक देव एवं अन्य की पावन धरती रही है। राजगीर के पंच पहाड़ियों पर अनेकों जैन मंदिरें हैं।

▪︎ सांस्कृतिक सेतु बनेगा नालंदा विश्वविद्यालय

राज्यपाल फागू चौहान ने कहा कि कोविड वैश्विक महामारी है। इसने देश और दुनिया को परेशान किया है। इसका निदान आवश्यक है। नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय धर्म-धम्म सम्मेलन में बोलते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस पर गहन मंथन और निदान होना चाहिए। नालंदा के गौरवशाली अतीत की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वह उच्च शिक्षा का प्रधान केंद्र था। विध्वंस के 800 साल बाद नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित किया गया है। नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया को जोड़ने में सांस्कृतिक सेतु की भूमिका फिर से निभाएगा। कोविड जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है। विश्व की समस्याओं के समाधान के लिए यह सम्मेलन मील का पत्थर साबित होगा।

▪︎ धर्म सार्वभौमिक और उदार : प्रो सुनैना सिंह

नालंदा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुनैना सिंह ने स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और भारत की संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की विचारधारा पर आधारित है। कोरोना काल में भारत ने दुनिया के कई देशों में दवाओं की आपूर्ति की तो दुनिया के कई देशों में फंसे भारतीयों को स्वदेश लाने के लिए ‘वंदे भारत मिशन’ जैसा अभियान चलाया गया। ऐसे समय में जब दुनिया अनिश्चितता के साथ ही सामाजिक और आर्थिक परेशानियों से घिरी है, भारत धर्म के जरिए समग्र विकास की धारणा के प्रति समर्पित है। उन्होंने कहा कि धर्म कभी भी खांचों में विभक्त नहीं हो सकता है। धर्म सार्वभौमिक और उदार होता है।

नालंदा विश्वविद्यालय और इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में फाउंडेशन की निदेशक ललिता कुमारमंगलम, पूर्व निदेशक राम माधव, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, सांसद कौशलेन्द्र कुमार एवं अन्य प्रमुख हस्तियां और प्रतिनिधि उपस्थित थे।

▪︎ नालंदा अंगवस्त्रम पा खुश हुए उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू को नालंदा मेमोरियल फाउंडेशन द्वारा नवनिर्मित पहला नालंदा अंगवस्त्रम भेंट किया गया। इसे देखकर उपराष्ट्रपति काफी प्रभावित और प्रसन्न हुए। उनके अलावा इंडिया फाउंडेशन के पूर्व निदेशक डॉ. राम माधव को भी फाउंडेशन के अध्यक्ष नीरज कुमार द्वारा नालंदा अंगवस्त्रम भेंट किया गया।

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