क्या बस्तर के 03 किसानों के खून से रंगे हैं भूपेश बघेल के हाथ?



--विजया पाठक (एडिटर- जगत विजन),
रायपुर-छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ क्या सिलगेर में गोली चलवाने वाले मुख्यमंत्री नैतिकता के आधार पर त्याग पत्र देंगे?

■ भूपेश सरकार दे रही उप्र के मृत किसानों के परिवारों को 50-50 लाख की सहायता

■ उत्तर प्रदेश के किसानों से हमदर्दी, अपने प्रदेश के किसानों से बेमानी कर रहे भूपेश बघेल

अपने आपको किसान पुत्र और किसान का आडंबर दिखाने वाले भूपेश बघेल लखीमपुर खीरी कांड में भी किसानों के हितैषी बताने में कोई मौका नहीं गंवा रहे हैं। हाल ही में छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल ने घोषणा की है कि लखीमपुर खीरी कांड में जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को उनकी सरकार 50-50 लाख रूपये की सहायता देगी। अब सवाल उठता है कि किसानों की मृत्‍यु तो उनके प्रदेश में भी हुई हैं वहां तो भूपेश बघेल ने सहायता नहीं दीं। यही बात कांग्रेस के नेता अमित जोगी ने कही है। अमित जोगी ने अपने ट्वीट में कहा है कि भूपेश बघेल के पास लखीमपुर खीरी कांड में मारे गये किसानों के लिए 50-50 लाख रूपये हैं लेकिन सिलगेर में मारे गये किसानों को देने के लिए फूटी कोड़ी नही है। बात सही भी है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी और किसानों का दमन अपने चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ धान और गोबर के निकली स्कीम ने किसान को पहले ही आर्थिक तौर पर कमजोर किया। उसके बाद भूपेश बघेल ने किसानों पर गोली चलवा दी। दरअसल बस्तर के सिलगेर में सीआरपीएफ कैंप का विरोध वहां के स्थानीय आदिवासी किसान कर रहे थे पर भूपेश बघेल ने वहां आदिवासी किसानों पर गोली चलवा दी, जिसमें 03 आदिवासी किसान मारे गए थे। सरकार की असंवेदनशीलता का आलम यह था कि उस समय सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया जो कि उस समय उन किसान-आदिवासीयों को संवेदना देने जा रही थी। शासन ने उन्हें सिल्गर नहीं जाने दिया। इस पुरे "सिल्गर गोली कांड" में 03 आदिवासी किसान मारे गए और करीब 17 किसान घायल हुये थे।

मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल की दोहरी नीति पर कांग्रेस हाईकमान को कुछ एक्‍शन जरूर लेना चाहिए। क्‍योंकि वर्तमान समय में प्रदेश में सरकार के प्रति किसानों का भारी आक्रोश है। इसके बावजूद मुख्‍यमंत्री उत्तर प्रदेश में किसानों को तो सहायता बांट रहे हैं और अपने ही राज्‍य के किसानों के साथ भेदभाव कर रहे हैं। इस तरह के रवैये से गलत संदेश ही जायेगा। ऐसे समय में लखीमपुर खीरी हत्याकांड से कांग्रेस की प्रति पूरे देश में एक लहर चली है। कहीं भूपेश बघेल के कारण उस पर कुठाराघात न हो जाये।

भूपेश बघेल कहीं लखीमपुर खीरी कांड में कांग्रेस का विरोध कुंद ना कर दे। एक तरफ इस मुद्दे पर कांग्रेस पूरे देश में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन कर रही है, प्रियंका गांधी के जुझारुपन से जहाँ पूरी कांग्रेस पार्टी में जान फूंक दी, पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कारण झुकना ना पड़े। छत्तीसगढ़ में आदिवासी और किसानों का दमन अपने चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ धान और गोबर के निकली स्कीम ने किसान को पहले ही आर्थिक तौर पर कमजोर किया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को तो नैतिकता के आधार पर लखीमपुर खीरी हत्याकांड का विरोध करना बनता ही नहीं है। वहीं छत्तीसगढ़ का कवर्धा दंगे में जल रहा है, कबीरधाम कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी रमेश कुमार शर्मा ने लोक शांति बनाए रखने के लिए सम्पूर्ण नगरपालिका क्षेत्र कवर्धा में कर्फ्यू लगा दिया है। कवर्धा शहरी क्षेत्र में पहले से धारा-144 लागू है। कलेक्टर ने आम नागरिकों से शांति, संयम बरतने की अपील की है। एक तरफ जहां छत्तीसगढ़ का कवर्धा दंगे में जल रहा है। वहां भूपेश बघेल लखनऊ हवाई अड्डे में धरने का नाटक कर रहे हैं। दरसअल भूपेश बघेल का पूरा ध्यान सिर्फ राहुल गांधी, प्रियंका गांधी पर रहता है। वो कहा जा रहे हैं। उसके बीच में अपना एजेंडा फिक्स कर लेते हैं। अभी बहुत पुरानी बात नहीं हुई जब राहुल गांधी वैष्णो देवी यात्रा में थे, तब अपने चहेते नान घोटाले के प्रमुख आरोपी आईएएस अफसर के किसी रिश्तेदार के माध्यम में सीधे वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में घुसपैठ कर यात्रा के बीच में अपने किसान को प्लांट करा दिया था।

• भूपेश बघेल ने बनाया कांग्रेस का तमाशा

छत्‍तीसगढ़ के राजनीतिक संकट के कारण भूपेश बघेल ने कांग्रेस का जो तमाशा बना दिया, वो पूरे देश में जग हंसाई का कारण बन रहा है। बार-बार अपने विधायकों की परेड दिल्‍ली कराई जा रही है। छत्‍तीसगढ़ में किसानों, आदिवासियों का दमन की परिकाष्‍ठा का अंदाजा इसी से लग सकता है कि जिस लेमरू खदान जो अदानी की है, जिसका विरोध स्‍वयं राहुल गांधी ने किया था उस खदान पर से किसानों का अधिकार खत्‍म कर जमीन पूंजीपति को सौंप दी गई। छत्‍तीसगढ़ में हजारों एकड़ जमीन किसानों से छीनकर कारोबारियों में बांटी जा रही है। आज मैंने इनके राजनीतिक सलाहकार और रिश्‍तेदार का ट्वीट पढ़ा कि आज योगी सरकार का हठयोगियों से पाला पड़ने वाला है। इस पर बड़ी हंसी आती है। हठयोगी वह होता है, जो किसानों की, गरीबों की आवाज तानाशाहों के सामने उठाये। भले ही उसके लिये उनकी नेता प्रियंका गांधी की तरह जेल में रहना पड़े। हठ योगी भूपेश बघेल और उनके रिश्‍तेदार जैसे नही होते जो कि पोर्न वीडियो बनाने के मामले में जेल गये हों।

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