आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि पीएम से लेकर सीएम तक सब ने साधी रखी है चुप्पी



--विजया पाठक (एडिटर, जगत विजन),
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ 2.15 लाख पेड़ों की बलि देकर कौन सा हीरा पैदा करना चाहती है प्रदेश सरकार

■ अपने फायदे के लिए लाखों लोगों की सांसे छीनने को तैयार है बिड़ला समूह

एमपी अजब है सबसे गजब है…, यह टैग लाइन सिर्फ मध्य प्रदेश पर बिल्कुल सटीक बैठती है। प्रदेश की स्थिति भी इस समय बिल्कुल अजब और गजब है। चार महीने पहले जिस ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गवां दी। उसी ऑक्सीजन देने वाले जंगलों को चंद रूपयों की लालच में राज्य सरकार निपटाने में जुटी हुई है। विकास के नाम पहले राजधानी भोपाल में करोड़ों पेड़ काटकर स्मार्ट सिटी की योजना को आकार देने का काम शुरू हुआ। वहीं, अब  छतरपुर जिले में बकस्वाहा की बंदर हीरा खदान के लिए 2.15 लाख पेड़ कटवाने की तैयारी की जा रही है। दिन प्रतिदिन जंगलों के स्थान पर बड़े पिल्लर की इमारते खड़ी की जा रही है, जिसे हम विकास का नाम दे रहे है। कुछ लाख करोड़ के हीरों के लिए राज्य सरकार बेशकीमती पेड़ों से मिलने वाली सांसों को आम आदमी से छीनने को तैयार है।

अफसोस इस बात का है कि प्रदेश में इतना कुछ चल रहा है, स्थानीय जनता सड़कों पर विरोध करने उतरी हुई है और प्रदेश भाजपा सरकार को कोई फर्क ही नहीं पड़ता। बताया जाता है कि सरकार 3.42 करोड़ कैरेट हीरों के लिए इस जंगल के 2.15 लाख पेड़ कटवा रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि बकस्वाहा के जंगल की जमीन में 3.42 करोड़ कैरेट के हीरे दबे हैं। इन हीरों को निकालने के लिए सरकार 382.131 हेक्टेयर जंगल की बलि देने से भी पीछे नहीं हट रही। इस जमीन पर वन विभाग ने पेड़ों की गिनती की है, जो 2 लाख 15 हजार 875 हैं। हीरे निकालने के लिए इन सभी पेड़ों को काट दिया जाएगा। इसमें से करीब 40 हजार पेड़ सागौन के हैं, इसके अलावा केम, पीपल, तेंदू, जामुन, बहेड़ा, अर्जुन जैसे औषधीय पेड़ भी हैं। बड़ा सवाल यह है कि पेड़ों की बलि भला किसके लिए। क्या फायदा हो जाएगा राज्य सरकार को अगर वो इसे बिड़ला ग्रुप को 50 साल की लीज पर देगी। कंपनी पेड़ों को नष्ट करके कुछ लाख करोड़ रुपए सरकार की झोली में डाल देगी और और पूरा जंगल तहस-नहस कर देगी।

जानकारी के अनुसार बंदर डायमंड प्रोजेक्ट के तहत इस जगह का सर्वे 20 साल पहले शुरू हुआ था। दो साल पहले प्रदेश सरकार ने इस जंगल की नीलामी की। आदित्य बिड़ला समूह की एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने सबसे ज्यादा बोली लगाई थी। अब कंपनी ने जंगल में से 62.64 हेक्टेयर क्षेत्र हीरे निकालने के लिए चिन्हित किया है। यहीं पर खदान बनाई जाएगी। इस काम में कंपनी 2500 करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है। इन जंगलों को बचाने के लिे प्रयासरत जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री, प्रदेश के मुखिया समेत कलेक्टर, कमिश्नर सहित सभी से गुहार लगा ली, लेकिन कोई भी अब तक इस काम को रोकने के लिए आगे नहीं आया। आगे आएगा भी भला कैसे, देश में केवल तीन लोग अंबानी-अडानी और बिरला है जिन्हें जो पसंद आ जाए वो बस उनका होना चाहिए फिर चाहे इसके लिए राज्य और लोगों को कितनी बड़ी भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े।

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