कोरोना को मात देना हो प्राथमिकता



--एकलव्य कुमार,
कोलकाता-प• बंगाल,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

चीनी कोरोना वायरस ने भारत सहित दुनिया के अन्य देशों में कहर बरपा रखा है। आये दिन यह वायरस रूप बदलने के साथ और भी घातक होता जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि देश में कोरोना के मामले को शुरुआत में गंभीरता से नहीं लिया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तेजी से फैल रहे संक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए आनन फानन में देशभर में लॉकडाउन लगा दिया। लोगों को बचाव के लिए मास्क, रुमाल या गमछा लगाने, घर में ही रहने और अल्कोहल युक्त सैनीटाईजर का इस्तेमाल करने और साबुन से बार बार हाथ धोने की सलाह दी गयी। सरकार के इस कदम की आलोचना भी हुई। विपक्ष ने इसे बिना सोचे समझे उठाया गया कदम बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालाँकि दुनिया के कुछ देशों को छोड़ दें तो सबने कोरोना से लड़ने के लिए लॉकडाउन को ढाल की तरह इस्तेमाल किया। इसका फायदा भी हुआ। अचानक से आई यह महामारी दुनिया के लिए बिल्कुल नई थी जिसका इलाज कैसे हो यह कोई नहीं जानता था। भारत सहित दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना के खात्मे के लिए वैक्सीन या कारगार दवा के लिए अनुसन्धान में जुट गये। उनकी दिन रात की मेहनत रंग लाई लेकिन वैक्सीन कितना कारगर होगा इसपर संशय के बीच ट्रायल शुरु हुआ। आज वैक्सीन कोरोना से होने वाले मौत के खतरे को काफी हद तक कम करने में सहायक साबित हुआ है। वर्ष 2020 के अंत के साथ कोरोना के संक्रमण और उससे होनेवाली मौतों में तेजी से गिरावट आई। ऐसा लगा मानों दुनिया से कोरोना का खतरा अब समाप्ति की कगार पर है। लॉकडाउन हटने के बाद महीनों से घरों में कैद लोग ऐसे निकले मानों जेल से छूटे हों। चुनाव आयोग ने भी पांच राज्यों में चुनाव का बिगुल फूंक दिया। राजनितिक दल भी लाव लश्कर के साथ चुनावी मैदान में कूद पड़े। रैलियों में बेतहाशा भीड़ जुटाकर शक्ति प्रदर्शन किया जाने लगा। इस समय कोरोना गाइड लाइन की जमकर धज्जियाँ उड़ती रही। चुनाव की समाप्ति होते हि एक बार फिर कोरोना के मामले ने रफ़्तार पकड़नी शुरू कर दी। नतीजा दूसरी लहर के रूप में सामने आया। यह पहली लहर से भी ज्यादा भयावह रहा। लाखों लोग कोरोना की भेंट चढ़ गये। अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, रेमडेसिविर दवा की किल्लत और कालाबाजारी तक सामने आई। यहाँ तक की श्मशान में लाशों के अंतिम संस्कार के लिए लम्बी कतार लगने लगी। समाचार पत्रों, न्यूज़ चैनलों और सोशल मीडिया पर गंगा में लाशों को बहाने, एकसाथ कई शवों को दफनाने की खबर और तस्वीरें भी सामने आई। दूसरी लहर से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन लगाने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया और इसे राज्यों पर छोड़ दिया। खैर, राज्यों ने नाईट कर्फ्यू, आंशिक छूट के साथ लॉकडाउन, वैक्सीनेशन, मास्क की अनिवार्यता का सहारा लिया। संक्रमण दर में फिर से लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। वहीं तीसरी लहर आने की आशंका भी जाहिर कर दी गई है।

● कोरोना गाइड लाइन की अनदेखी पड़ी भारी

कोरोना महामारी से लड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने गाइड लाइन जारी की। लोगों को खांसी, सर्दी, बुखार आदि के लक्षण दिखने पर कोरोना जाँच कराने के लिए कहा गया। दो गज की आपसी दूरी, भीड़ न लगाने, बेवजह घर से न निकलने की हिदायत दी गयी। वैक्सीन लगवाने पर भी जोर दिया जा रहा है। एक तरफ डॉक्टर और हेल्थ वर्कर संक्रमण के खतरे के बीच अपनी जान की परवाह किये बगैर संक्रमितों को बचाने की कोशिशों में जुटे रहे। वहीं दूसरी तरफ पुलिस बल के जवानों को लोगों ख़ासकर घुम्मकड़ी के शौक़ीन युवाओं से कोरोना गाइड लाइन पालन करवाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। मेरा मानना है कि मास्क की अनदेखी करना, बेवजह बहाने से इधर उधर घूमना, जहाँ तहाँ थूकना और रैलियों में शामिल होकर भीड़ का हिस्सा बनना कोरोना की दूसरी लहर का जिम्मेदार बना।

● कैसे ख़त्म होगा यह खतरा?

अब सवाल उठता है कि आखिर कब और कैसे ख़त्म होगा कोरोना का खतरा? देश की मौजूदा सरकार एक तरफ वैक्सीनेशन और मास्क के उपयोग पर जोर दे रही है। वायरस का संक्रमण बढ़ते ही लॉकडाउन लगा कर क्या कोरोना से जंग जीती जा सकती है? मेरा मानना है शायद नहीं। कोरोना से प्रभावी लड़ाई के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को सबसे पहले चुनावों से किनारा करना होगा। सिर्फ सत्ता के लिए देश के लोगों की जान से खेलने का हक़ जन प्रतिनिधियों को बिल्कुल नहीं है। चुनाव टाले जा सकते हैं। चुनाव टाले जाने चाहिए, यह जनहित में और राष्ट्रहित जरूरी है। कोरोना से मुक्ति के लिए लोगों को भी गंभीरता से सरकार के दिशा निर्देशों को मानना होगा। देश में आई इस आकस्मिक आपदा से निपटने के लिए राजनैतिक विद्वेष को कुछ समय के लिए तिलांजली देने की जरूरत है। इस महामारी ने जाति-धर्म देखकर तो लोगों की जानें नहीं ली। वैक्सीनेशन के प्रति अनावश्यक संशय और अफवाह पर ध्यान देकर हम खुद का अहित करेंगे। कोरोना से जंग में जीत के लिए हम सब को मोर्चा संभालने की जरूरत है। जब हम स्वयं बचाव के लिए जागरूक होंगे और तभी इस महामारी को खत्म किया जा सकता है।

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