क्‍या टुटेजा और शुक्‍ला जैसे भ्रष्‍टाचारियों को हटाएंगे भूपेश बघेल?



--विजया पाठक (एडिटर: जगत विजन),
रायपुर-छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित नान घोटाला..........

■ टुटेजा और शुक्‍ला के खिलाफ न्‍यायाधीश ने किया चार्ज फ्रेम

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान घोटाला मामले में दिनांक 30 जून 2021 का दिन अहम रहा। विशेष न्यायालय लीना अग्रवाल के कोर्ट में आरोपी के रूप में नान के मुख्य आरोपी आईएएस अनिल टुटेजा एवं आईएएस आलोक शुक्ला को कटघरे में पूरा दिन खड़ा होना पड़ा। ये प्रयास में लगे रहे कि इनके ऊपर लगे आरोप खारिज हो जाए पर माननीय विशेष न्यायालय की न्यायाधीश ने आखिरकार अन्ततः चार्ज लगा ही दिया।

सूत्रों की माने तो कोई एक धारा स्व-विवेक से पृथक से न्यायालय के द्वारा लगाया गया। इस प्रकार अब ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है। अब देखने वाली बात यह है कि चार्जशीट न्यायालय में डालने के बाद टुटेजा और आलोक शुक्ला को छत्तीसगढ़ सरकार निलंबित करती है या नही, जबकि नियमानुसार चार्ज लगने के पश्चात सरकार को दोनों ही आरोपियों को फैसला आने तक कार्य से पृथक करते हुए निलंबित कर देना चाहिए। पर अब देखना यह है कि अब चार्ज फ्रेम हो जाने के बाद सरकार इन्हें निलंबित करती है या छोटे और बड़े अधिकारी के बीच की विभाजन रेखा कायम रहेगी। शासन के नियमानुसार तत्काल निलंबन की तलवार गिरनी चाहिए।

सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार 5 जुलाई 2021 को पुनः इन अधिकारियों को न्यायालय के सामने उपस्थित होना है। गौरतलब है कि 2015 में जब नान घोटाले का पर्दाफाश हुआ था तब टुटेजा नान के एमडी थे और शुक्‍ला नान के चैयरमेन थे। इन दोनों की ही सरपरस्‍ती में 35 हजार करोड़ का बड़ा घोटाला हुआ था। बावजूद इसके वर्तमान में मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल की मेहरबानी से मलाईदार पदों पर बैठे हैं। सीएम भूपेश बघेल ने आलोक शुक्ला को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग का प्रभार दिया है। यह वही भूपेश बघेल हैं जो कभी इनकी गिरफ्तारी के लिए चिट्‌ठी लिखते थे।

● साल 2020 में इडी मामले में हाईकोर्ट से मिली थी जमानत

अनिल टुटेजा और डॉ. आलोक शुक्ला ने छत्तीसगढ़ के माननीय उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया था। न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल की एकल पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय के मामले में अधिवक्ता अवी सिंह और अधिवक्ता आयुष भाटिया द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को स्वीकार किया गया था। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला जनवरी, 2019 को दर्ज किया गया था जो कि एन्टी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा द्वारा वर्ष 2015 में पंजीकृत अपराध से उत्त्पन्न हुआ है जिसमें नागरिक आपूर्ति निगम के 28 ठिकानों पे छापा मारकर करोड़ों रूपये बरामद किए थे, इस मामले में 28 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसमें अनिल टुटेजा और डॉ. आलोक शुक्ला का नाम नहीं था। ऐन चुनाव के पहले करीब ढाई साल बीतने के बाद राज्य सरकार ने पूरक चालान पेश करते हुए दोनों ही अधिकारी के नाम शामिल किए थे।

● डीओपीटी के आदेश से टुटेजा का होना चाहिए था निलंबन

अनिल टुटेजा पर नान घोटाले में प्रिवेंशन करप्शन एक्ट (1) डी एवं 11 के अंतर्गत फौजदारी मामले के आर्थिक अपराध के रूप में अनुपूरक चालान प्रस्‍तुत किया एवं मामला दर्ज किया। मामला यह बनता है कि शासन के कानून का मखौल उड़ाते हुए अनिल टुटेजा का निलंबन नही किया था। अलबत्‍ता भूपेश बघेल ने ऐसे भ्रष्‍ट अफसर को संयुक्‍त सचिव स्‍तर के पद पर बैठा दिया। जबकि किसी भी फौजदारी मामले के या आर्थिक प्रकार के मामले में फंसे अधिकारी पर भारत के कार्मिक मंत्रालय के Handbook For Inquirty of Officers and Disciplinary Aothorities 2013 में पेज 58, भाग 10 सस्‍पेंशन में Rule 10 of CCS (CCA) में पैरा 3.0 में वर्णित है कि सरकारी कर्मचारी नौकर को नियम-10 (1) में निलंबन कब कर सकते हैं। जब भी ऐसे कर्मचारी या सरकारी नौकर के उपर कोई फौजदारी मामले में विवेचना, जांच या परीक्षण चालू है तो उन्‍हें निलंबित करना चाहिए। लेकिन अनिल टुटेजा और आलोक शुक्‍ला के मामले में मंत्रालय के सर्कुलर का खुला उल्‍लंघन हो रहा है। डीओपीटी के सर्कुलर के मुताबिक कोर्ट में चालान पेश होने के पश्‍चात संबंधित अधिकारी को सस्‍पेंड करना चाहिए।

● जगत विजन पत्रिका उठा चुका है मामला

सितम्‍बर 2020 के जगत विजन पत्रिका के अंक में नान घोटाले के दोनों आरोपियों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्‍ला के कारनामों को प्रकाशित कर चुका है। करीब 45 पेज की कवर स्‍टोरी में जगत विजन के नान घोटाले के एक-एक बिंदु को प्रकाशित किया था और टुटेजा और शुक्‍ला की संलिप्‍तता को भी प्रकाशित किया था।

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