छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के सिस्टम को सेंट्रलाइज कर दिया भूपेश बघेल ने?



--विजया पाठक (एडिटर- जगत विजन),
रायपुर-छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■राजा मस्त प्रजा त्रस्त

■ असम के साथ छत्तीसगढ़ भी हार बैठे हैं भूपेश बघेल

असम में कांग्रेस की हार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की व्यक्तिगत हार रही, इस हार के साथ भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ की जनता को भी हरा दिया। पूरे प्रदेश को अपने महा-भ्रष्टाचारी अवैध वसूली गैंग के भरोसे छोड़ कर चले गए। इस गैंग में एक आरोपी आईएएस अधिकारी, एक महापौर के छोटे भाई एवम् एक पूर्व मुख्य सचिव है जिन्होने भ्रष्टाचार के ऐसे-ऐसे नायाब फार्मूले निकाले जिसका कोई सानी नहीं है।

खैर मुख्यमंत्री इस गैंग के लिये सुपर सीएम जरुर छोड़ गये थे जो प्रदेश की एक महिला अधिकारी भी हैं। उस गैंग के अनेको नायब अवैध वसूली के फार्मूले का एक उदाहरण अवैध कोयला वसूली है, जिसमें कोयला व्यापारियो को संबंधित कलेक्टर तब तक फोर्म नहीं देते जब तक कुल टन कोयला का 10-15 % पैसा या अवैध टैक्स इस गैंग के पास न पहुंच जाये। इस समय प्रदेश में जो भ्रष्टाचार का कोहराम इन्होने फैला दिया है उसकी चुभन आम छत्तीसगढ़िया महसूस कर रहा है। छत्तीसगढ़ मे भ्रष्टाचार का एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम बना दिया गया है। प्रदेश की ढाई करोड़ जनता को यह उम्मीद थी कि कोंग्रेस की सरकार बनने के बाद प्रदेश मे विकास की गंगा बहेगी पर खोखले वादों तथा सत्ता पाने के लिए आम जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करने वाली इस भूपेश बघेल सरकार के लिए आने वाले दिन बहुत भारी पड़ने वाले हैं।

मुख्यमंत्री बने रहने के लिए जनता के गाढ़े पसीने की कमाई के करोड़ों अरबों रुपए लुटाए जा रहे हैं तथा मुख्यमंत्री बघेल राष्ट्रीय हीरो बनने की चाहत में विज्ञापनों में पानी की तरह पैसा बहा कर आम जनता के मूलभूत अधिकारों का हनन कर रहे है। नरवा, गरुवा घूरवा और बारी की हकीकत बेनकाब हो चुकी है। गोठान की सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीन पर रसूखदार कांग्रेसियों तथा भू-माफियाओं का कब्जा हो चुका है। ढाई साल के अल्प काल में ही पूरे प्रदेश के सैकड़ों तालाब पाटकर बेच दिए गए हैं।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार डी एम एफ फंड से किसी भी जिले में 25 फ़ीसदी से अधिक का काम नही हुआ है और भुगतान उठा लिया गया है। इस प्रकार राज्य के आर्थिक ढांचे को तबाह कर खजाने को खाली कर दिया। जिन किसानों की बात यह करते है उनको फसल का पुरा पैसा नहीं दिया गया। पैसा इतनी किश्तो मे दिया गया कि किसानों को उसका वास्तविक लाभ ही नहीं मिल पाया। जिस न्याय योजना का बखान मे करोड़ों रुपये देश भर के विज्ञापनों में फूंक दिए गए और जब उसकी पुरी किश्त नहीं दे पाए तो ठीकरा केंद्र पर फोड़ दिया।

असम में कांग्रेस की वापसी की गारंटी देने वाले मुख्यमंत्री बघेल असम चुनाव में पानी की तरह पैसा बहाते रहे। यहां तक कि चुनाव खत्म होने के बाद असम के कांग्रेसी एवं सहयोगी दल के विधायक उम्मीदवारों को शानदार रिसोर्ट में सरकारी खर्चे पर मेहमान नवाजी कराते रहे। उन उम्मीदवारों के चुनाव में पराजित होने के बाद, उन पर खर्च हुए लाखों रुपए भी डूब गए। कोई ढाई महीने असम में रहने वाले भूपेश बघेल ने अनेकों बार अपने बड़बोलेपन से छत्तीसगढ़ का मान घटाया। इसका एक उदाहरण उनका लल्लंनटाप को दिये साक्षात्कार है जिसमें उन्होने हेमंतबिश्व शर्मा का मजाक उड़ाया और बाद मे हेमंतबिश्व शर्मा ने अपने साक्षात्कार में कहा कि जब वे कांग्रेस में थे तब उन्होने भूपेश बघेल का नाम तक नहीं सुना था छत्तीसगढ़ से टी. एस. सिंहदेव का ही नाम सुना था।

यह वही भूपेश बघेल है, जिन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर रहते हुए भाजपा के समय हुये विभिन्न घोटाले और नान घोटाले में निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उस राज्य का क्या हाल होगा जिस राज्य में मुख्यमंत्री अपने प्रिय के चक्कर में बेड़ा गर्क कर दे। नक्सल प्रभावित राज्य जहां मुख्यमंत्री को डीजीपी से रोज़ ब्रिफिंग लेनी चाहिए पर मुख्यमंत्री पुलिस मुखिया से मिलना तक जरूरी नहीं समझते, उनके कनिष्ठ स्टाफ ही पुलिस मुखिया से बातें कर लेते हैं। उस प्रदेश का क्या ही हाल होगा जहां प्रदेश का प्रशासनिक मुखिया मुख्य सचिव मुख्यमंत्री के कनिष्ठ अधिकारी के लिये छाता लेकर खड़ा हो और वो कनिष्ठ अधिकारी मुख्य सचिव का नाम ले बोले कि आप से मुख्यमंत्री नहीं मिल सकते। कहावत है "राजा मस्त प्रजा त्रस्त" वही हाल छत्तीसगढ़ का हो गया है पर जरुरी नहीं कि ऐसे मदमस्त राजा हमेशा रहे उन्हे पता होना चाहिये जून मे सरकार के ढाई साल खत्म हो रहे है।

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