शिवराज के ‘लाडले’ रहे आईएएस राधेश्याम जुलानिया पर करोड़ों रुपए कमीशन लेने का आरोप



--विजया पाठक (संपादक- जगत विज़न),
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ कमीशन लेकर शासन को लगाया दो हजार करोड़ का चूना

■ जल संसाधन विभाग में प्रमुख सचिव रहते ठेकों में फेरबदल कर मेंटाना ग्रुप सहित कई कंपनियों को दिलाया लाभ

■ पुत्र अभिमन्यु को दिलाई फ्रांस की नागरिकता, पुत्री लावण्या को भी भेजा विदेश

■ आईएएस राधेश्यालम जुलानिया भाग सकते हैं विदेश

मध्यप्रदेश के एक कथित ईमानदार और ‘तेज तर्रार’ कहे जाने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लाडले रहे मध्य प्रदेश के सीनियर आईएएस राधेश्याम जुलानिया पर मेंटाना ग्रुप को लाभ पहुंचाकर करोड़ों रुपए कमीशन लेने के आरोप लगे हैं। इन्होंने महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए कई काले कारनामे कर अरबों की सम्पत्ति अर्जित की है। इतना ही नहीं कई कंपनियों को गैर कानूनी तरीके से लाभ पहुंचाकर शासन को करोड़ों का चूना लगाया है। आईएएस राधेश्याम जुलानिया के खिलाफ एक पूर्व विधायक ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय को शिकायत की है कि जुलानिया कभी भी विदेश भाग सकते हैं। यहां बता दें कि कमलनाथ सरकार के दौरान ई-टेंडरिंग घोटाले में मेंटाना ग्रुप का नाम आने के बाद कंपनी के मालिक श्रीनिवास राजू को गिरफ्तार किया गया था। ई-टेंडरिंग में यह सबसे पहली गिरफ्तारी थी।

पूर्व विधायक ने केन्द्रीय गृह विभाग को की गई शिकायत में कहा है कि जल संसाधन विभाग में प्रमुख सचिव रहते जुलानिया ने मेंटाना ग्रुप के ठेकों में कंपनी को अत्याधिक लाभ पहुंचाकर करोड़ों रूपये का कमीशन लिया गया है। विधायक का आरोप है कि जुलानिया ने अपने पुत्र अभिमन्यु को फ्रांस की नागरिकता दिलाई और फ्रांस में अरबों रुपए की संपत्ति खरीद ली। इतना ही नहीं जुलानिया ने अपने पुत्र के साथ अपनी पुत्री लावण्या को भी विदेश भेज दिया तथा रिटायरमेंट के बाद जुलानिया भी विदेश भागने की तैयारी में हैं। इन्होंने गृह विभाग से मांग की है कि मेंटाना ग्रुप का मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में है, जब तक यह जांच पूरी न हो जाए आईएएस राधेश्याम जुलानिया का पासपोर्ट जब्त किया जाए। साथ ही इनके पुत्र अभिमन्यु और पुत्री लावण्या का भी पासपोर्ट जब्त कर उन्हें फ्रांस से पूछताछ के लिए बुलाया जाए।

ज्ञात हो कि जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव रहे आईएएस अरविंद जोशी के यहां आयकर विभाग ने छापे मारे थे। उस दौरान उनके यहां से करीब 3 करोड़ रुपए नगद तथा करोड़ों की संपत्ति मिली थी। छापे के बाद राधेश्याम जुलानिया को इस विभाग की कमान सौंपी गई थी। उस दौरान यह कहा गया था कि जुलानिया ईमानदार अधिकारी हैं।

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