मध्य प्रदेश : प्रतिदिन हो रहे 14 दुश्कर्म



--विजया पाठक (एडिटर- जगत विजन),
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ महिला विरोधी अपराध का गढ़ बना एमपी

■ गृहमंत्री डॉ. नरोत्तिम मिश्रा कानून व्यरवस्था संभालने में नाकाम

■ एनसीआरबी की रिपोर्ट में बलात्कार के मामले में फिर नंबर एक एमपी?

मध्य प्रदेश में महिलाएं या बच्चियां कितनी सुरक्षित हैं, इस बात का दावा करने वाले सरकारी हुक्मरान और नेताओं के बयान तो हमने सुने हैं, लेकिन हकीकत में महिला अपराधों में रोकथाम तो दूर इनमें तेज बढ़त दर्ज की गई है। साल 2020 में प्रतिदिन 137 महिलाओं के साथ कोई ना कोई अपराध हुआ है। मध्य प्रदेश पुलिस रिकॉर्ड के आंकड़े यह भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं जिसमें साल भर में महिलाओं के साथ अलग-अलग अपराधों में 49,823 मामले दर्ज किए गए। इससे लगता है कि महिला अपराधों के मामले में मध्य प्रदेश, देश की राजधानी बनने की राह पर है। तमाम दावों और प्रयासों के बावजूद भी यह कलंक मध्य प्रदेश के माथे से नहीं मिट पा रहा है। हालात यह हैं कि कोविड-19 के दौरान लगाए गए लॉकडाउन में भी प्रदेश में महिला अपराधों में कमी नहीं आई। मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से हर माह जारी किए जाने वाली रिपोर्ट में कुछ ऐसे आंकड़े निकलकर सामने आए हैं जिन्हें सुनकर हम हैरान रह जाएंगे। मध्य प्रदेश पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले 12 महीनों में ही चार हजार से ज्यादा दुष्कर्म और 6 हजार अपहरण के मामले सामने आ चुके हैं।

वहीं प्रदेश के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा अपनी शान शौकत में कोई कमी नहीं रखना चाहते हैं। अपने सरकारी बंगले पर पुलिस की फौज लगा रखी है। अपनी सुरक्षा ऐसी बनाई है जैसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा हो। प्रदेश में कौन से क्षेत्र में कौन से थाने में कितना पुलिस स्टॉफ है इससे इन्हें कोई मतलब नही है। क्या ऐसे प्रदेश में कानून व्यावस्था सुधर सकती है। क्या ऐसे असंवेदनशील होने से बलात्कार या महिला अपराध रूक सकते हैं। सुख और शांति के टापू मध्य प्रदेश में आखिर बद से बदत्तर होती इस स्थिति का जिम्मेदार कौन है?, पुलिस प्रशासन, गृहमंत्री या फिर प्रदेश की लचर कानून व्यवस्था।

एक तरफ प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान जगह-जगह पर जाकर शांति और सुरक्षा के वायदे करते हैं, लेकिन सरकार में इनके सहयोगी मंत्री अपने विभाग को संभालने में नाकाम हो रहे हैं। खुद को संवेदनशील दिखाने वाले मंत्री नरोत्तम मिश्रा प्रदेश की लचर कानून व्यवस्था से अच्छी तरह परिचित हैं, फिर भी उसे सुधारने की दिशा में कोई उचित कदम नहीं उठा रहे। सिर्फ रोज सुबह अच्छे कपड़े पहनकर मीडिया के सामने आकर बयान देने से इन्हें फुरसत कहां मिलती है।

मध्य प्रदेश में पिछले 2 महीने में दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म की वारदातों में तेजी से इजाफा हुआ है। हाल ही में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के साथ इस तरह की वारदातें देखने में आई हैं। मध्यप्रदेश में पिछले 8 महीनों में महिला अपराध के हजारों मामले दर्ज किए गए हैं। मध्यप्रदेश में हत्या के मामले 509, हत्या की कोशिश 207, मारपीट 9974, छेड़छाड़ 6479, अपहरण 5619, दुष्कर्म 3837, दहेज हत्या 519 और दहेज प्रताड़ना के 4604 मामले सामने आए हैं। महिला अपराध शाखा की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में 5600 बलात्कार के मामले सामने आए हैं। अगर पिछले पांच साल के रेप के आंकड़ों को देखे तो पांच साल में 27 हजार से अधिक रेप और 15 हजार से करीब रेप की कोशिश के केस दर्ज हुए हैं। सीधी में विधवा महिला के साथ दुष्कर्म, उमरिया में नाबालिग लड़की के साथ 9 लोगों द्वारा दुष्कर्म जैसी वारदातें सामने आई हैं।

मध्य प्रदेश में दुष्कर्म जैसे अपराधों के लिए कठोर कानून मौजूद हैं। बावजूद इसके यहां हर रोज करीब 14 लड़कियों का रेप होता है। इन दिनों हुईं दुष्कर्म और गैंगरेप की वारदातों से एक बार फिर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कड़े कानूनी प्रावधान भी इन घटनाओं पर लगाम लगाने में असफल दिखाई पड़ रहे हैं। प्रदेश में 12 साल की कम उम्र की लड़की से दुष्कर्म की सजा फांसी है। ऐसे मामलों में करीब 30 आरोपियों को फांसी की सजा भी सुनाई जा चुकी है, लेकिन वारदातें कम नहीं हो रहीं हैं। 14 मार्च 2019 को बंडा थाने में एक लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। दूसरे दिन खेत में उसके सिर और धड़ अलग-अलग मिले थे। मध्य प्रदेश की तत्कालीन शिवराज सरकार ने दिसंबर 2017 में कानून बनाया था कि 12 साल की लड़की या उससे कम उम्र की लड़की के साथ दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर सजा-ए-मौत दी जाएगी। इन मामलों को लेकर सरकार प्रदेश की कानून व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक व्यवस्था को भी दोषी मानती है।

बढ़ते हुए महिला अपराध के आंकड़ों को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने जहां ऐलान किया है कि हर सरकारी कार्यक्रम कन्या पाद पूजन के साथ शुरू होगा। वहीं गृह विभाग सम्मान कार्यक्रम चला रहा है। जिसमें महिलाओं के प्रति सम्मान के लिए समाज को प्रेरित किया जा रहा है।

● रेप (बलात्कार) के आंकड़े

• 2016-रेप 4882, रेप की कोशिश 1628
• 2017- रेप 5562, रेप की कोशिश 2147
• 2018- रेप 5433, रेप की कोशिश 2857
• 2019- रेप 6600, रेप की कोशिश 3707
• 2020- रेप 5600, रेप की कोशिश 3717

• 1 जनवरी 2020 से लेकर 31 दिसंबर 2020 तक यानी कि 12 महीनों में ही 4532 महिलाएं और बालिकाओं के साथ दुष्कर्म हुआ।

• यदि प्रतिदिन के हिसाब से आंकड़े देखें तो 14 रेप की घटनाएं रोजाना घटित हुई हैं।

• प्रति माह के मुताबिक जनवरी में 372, फरवरी में 365, मार्च में 358, अप्रैल में 206, मई में 357, जून में 434, जुलाई में 439, अगस्त में 382, सितंबर में 418, अक्टूबर में 486, नवंबर में 376 मामले और दिसंबर में 339 मामले दुष्कर्म के दर्ज किए गए।

● महिला अपहरण

जनवरी में 675, फरवरी में 773, मार्च में 645, अप्रैल में 207, मई में 381, जून में 624, जुलाई में 566, अगस्त में 569, सितंबर में 638, अक्टूबर में 601, नवंबर में 659 और दिसंबर में 611 अपरहण किए गए हैं। यानी कि साल 2020 में कुल 6949 अपहरण के मामले दर्ज हुए और रोजाना औसत 20 अपहरण हुए। मध्यप्रदेश में महिला अपराध पर रोक लगाने के लिए सरकार ने सख्त कानून बनाया है। इसके तहत उस दुष्कर्मियों को फांसी की सजा तो सुनाई गई लेकिन आज तक कोई भी फांसी के तख्ते तक नहीं पहुंच पाया।

● दुष्कर्म के मामलों में सजा की दर मात्र 27.2 प्रतिशत

दुष्कर्म के मामलों में देश में सजा की दर अब भी मात्र 27.2 प्रतिशत ही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक 2018 में दुष्कर्म के 1,56,327 मामलों में मुकदमे की सुनवाई हुई। इनमें से 17,313 मामलों में सुनवाई पूरी हुई और सिर्फ 4,708 मामलों में दोषियों को सजा हुई। आंकड़ों के मुताबिक 11,133 मामलों में आरोपी बरी किए गए जबकि 1,472 मामलों में आरोपियों को आरोपमुक्त किया गया। खास बात यह है कि 2018 में दुष्कर्म के 1,38,642 मामले लंबित थे। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक दुष्कर्म के मामलों में सजा की दर 2018 में पिछले साल के मुकाबले घटी है। 2017 में सजा की दर 32.2 प्रतिशत थी। उस वर्ष दुष्कर्म के 18,099 मामलों में मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई और इनमें से 5,822 मामलों में दोषियों को सजा हुई।

● 2018 में हर दिन 80 हत्याएं, 91 बलात्कार

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2018 में समूचे देश में हर दिन औसतन हत्या की 80 घटनाएं, अपहरण की 289 घटनाएं और बलात्कार की 91 घटनाएं दर्ज की गईं हैं। बलात्कार के मामले में एक बार फिर मध्यप्रदेश अव्वल रहा है। वर्ष 2018 में देश में बलात्कार की कुल 33,356 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से 5,433 घटनाएं (करीब 16 प्रतिशत) मध्यप्रदेश में हुईं, जिनमें पीड़िताओं में छह साल से कम उम्र की 54 बच्चियां भी शामिल हैं। वर्ष 2016 और वर्ष 2017 में भी मध्यप्रदेश बलात्कार के मामलों में देश में नंबर एक पर था। वर्ष 2016 में प्रदेश में 4,882 बलात्कार की घटनाएं हुई थीं, जबकि वर्ष 2017 में प्रदेश में 5,562 घटनाएं हुईं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश में 18 साल से कम उम्र की 2,841 लड़कियों के साथ बलात्कार की घटनाएं हुईं. इनमें से छह साल से कम उम्र की 54 बच्चियां, छह से 12 साल की 142 बच्चियां, 12 से 16 साल की उम्र की 1,143 बालिकाएं और 16 से 18 साल की 1,502 लड़कियां शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में बलात्कार के मामलों में मध्यप्रदेश के बाद राजस्थान 4,335 घटनाओं के साथ दूसरे और उत्तरप्रदेश इस तरह की 3,946 घृणित घटनाओं के साथ तीसरे स्थान पर रहा। मध्य प्रदेश अभियोजन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बच्चियों के साथ बलात्कार के 18 मामलों में अदालत ने वर्ष 2018 में दोषियों को मौत की सजा सुनाई।

• आंकड़ों के अनुसार 2018 में पूरे देश में हर दिन औसतन हत्या की 80 घटनाएं, अपहरण की 289 घटनाएं और बलात्कार की 91 घटनाएं दर्ज की गईं है।

• 2018 में कुल 50,74,634 संज्ञेय अपराधों में 31,32,954 मामले भारतीय दंड संहिता के तहत और 19,41,680 मामले विशेष एवं स्थानीय कानून के तहत अपराध की श्रेणी में दर्ज किए गए जबकि 2017 में यह संख्या 50,07,044 थी।

• 2018 और 2017 के दौरान हत्या के मामले में 1.3 का इजाफा हुआ। 2018 के दौरान हत्या के 29,017 मामले जबकि 2017 में 28,653 मामले दर्ज किए गए थे।

• आंकड़े के अनुसार 2018 के दौरान हत्या के मुख्य वजहों में 9,623 मामलों में ‘विवाद’, इसके बाद 3,875 मामलों में ‘निजी रंजिश या दुश्मनी’ और 2,995 मामलों में ‘फायदा हासिल करना’ रहा है।

• एनसीआरबी के अनुसार 2018 में अपहरण के मामलों में 10.3 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इस संबंध में 1,05,734 प्राथमिकीयां दर्ज की गईं जबकि 2017 में ऐसे 95,893 मामले दर्ज किए गए और 2016 में यह संख्या 88,008 रही।

• 2018 के आंकड़े के अनुसार अपहरण के कुल 1,05,536 (24,665 पुरूष और 80,871 महिलाएं) दर्ज किए गए जिनमें से 63,356 (15,250 पुरूष और 48,106 महिलाएं) बच्चे और 42,180 (9,415 पुरूष एवं 32,765 महिलाएं) वयस्क थे।

• एनसीआरबी के अनुसार 2018 के दौरान 92,137 अपहृत व्यक्तियों (22,755 पुरूष और 69,382 महिलाओं) को बरामद कर लिया जिनमें से 91,709 कसे जीवित और 428 को मृत बरामद किया गया।

• 2018 में ‘महिलाओं के खिलाफ अपराध’ की श्रेणी में 3,78,277 मामले दर्ज किए गए थे जो 2017 के 3,59,849 और 2016 के 3,38,954 मामलों से अधिक है। 2018 में आईपीसी की धारा 376 के तहत बलात्कार के मामलों की संख्या 33,356 रही।

• आंकड़े के अनुसार 2017 में बलात्कार के 32,559 मामले दर्ज किए गए थे जबकि 2016 में यह संख्या 38,947 थी।

• एनसीआरबी के अनुसार 2017 (50,07,044 मामलों) की तुलना में अपराध की कुल संख्या में 1.3 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

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