--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
बिहार की राजधानी पटना में बिहार एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी जानवरों पर पहली बार आयुर्वेदिक दवाओं का प्रयोग करेगी। और जानवरों पर इसका असर जांचा जाएगा। देश में ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब एमओयू प्रोटोकॉल के साथ इंसानों की आयुर्वेदिक दवाओं का जानवरों पर प्रयोग कर इसका असर जांचा जाएगा। फिर इंसानों पर इस दवा का प्रयोग होगा।
आयुर्वेदिक कॉलेज का कहना है कि प्रयोग नहीं हो पाने के कारण ही औषधि का निर्माण नहीं हो पा रहा था। इस दिशा में काफी दिनों से प्रयास किया जा रहा था। काफी प्रयास के बाद अब एमओयू साइन हुआ है जिससे दो संस्थान मिलकर शाेध और प्रयोग करेंगे। यह प्रदेश के लिए ही नहीं पूरे देश के लिए बड़ी बात होगी। राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ• दिनेश्वर प्रसाद का कहना है कि ऐसा देश में पहली बार होने जा रहा है जब प्रोटोकॉल के तहत दवाओं का प्रयोग जानवरों पर होगा।
आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य का कहना है कि जानवरों के दूध में दवा के असर की बात आती है। हम इस पर भी शोध करेंगे कि किस तरह से जानवरों को दी जाने वाली दवाओं का असर यानी साइड इफेक्ट दूध में आने से रोका जा सके। इस दिशा में भी काम किया जाएगा। एमओयू में इस पर भी चर्चा हुई है।
डॉ• प्रसाद का कहना है कि देश में आज भी जड़ी बूटी से जानवरों का इलाज हो रहा है। कई गंभीर बीमारियां भी पशुपालक जड़ी बूटी से ठीक कर रहे हैं। जानवरों पर इसका बड़ा असर देखने को मिला है लेकिन इसका कोई क्लीनिकल डेटा नहीं है। अब ऐसे में दवाएं आयुर्वेदिक कॉलेज में बनेगी और दोनों संस्थानों की तरफ से प्रयोग किया जाएगा।
प्राचार्य का कहना है कि शुक्रवार को एमओयू साइन हो गया है। अब खतरनाक बीमारियों पर शोधकर दवा का निर्माण करना आसान हो जाएगा। एनिमल ट्रायल के लिए बिहार एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी से करार हो गया है। एलोपैथ में ऐसा होता है लेकिन आयुर्वेद में नहीं है। इसके लिए अभी तक कोई प्रोटोकॉल नहीं बना था। ऐसा पहली बार हो रहा है जब प्रोटोकॉल बनाकर दवाओं का प्रयोग जानवरों पर किया जाएगा। दोनों तरफ से डिस्कशन कर यह काम होगा। इसमें दोतरफा संवाद से काम आसान होगा। एक दूसरे की थेसिस पर एक दूसरे के कोगाइड होंगे। दोनों मिलकर रिसर्च करेंगे।