नशीले पदार्थ में टैक्स बढ़ाकर पेट्रोल, डीजल और गैस में राहत दे सकती है राज्य सरकार



--विजया पाठक (एडिटर- जगत विजन),
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

दो दिन पहले पेश हुए मध्य प्रदेश राज्य के बजट से प्रदेश की जनता को काफी उम्मीदें थी। लेकिन राज्य सरकार के वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा विधानसभा में पेश किए गए बजट के बाद सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठी जनता को सिर्फ निराशा हाथ लगी। दरासअल प्रदेश की जनता आसमान छूती पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों को कंट्रोल करने और राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स में कमी की उम्मीद लगाए बैठी थी। लेकिन शिवराज सरकार ने ऐसा कोई भी फैसला नहीं लिया, जिससे जनता को इन बढ़ती कीमतों में कुछ राहत मिल पाए।

देखा जाए तो पिछले दो से तीन महीनें में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमते तेजी से बढ़ी है। यदि राज्य सरकार को जनता के हितों की इनती ही चिंता थी तो उन्हें इन सभी जरूरतमंद वस्तुओं से कर कम करने जैसा फैसला लेना चाहिए था। इनता ही नहीं यदि राज्य सरकार अपना राजस्व बढ़ाना ही चाहती है तो उन्हें नशीले पदार्थ, तंबाकू, गुटखा, शराब आदि पर टैक्स में बढ़ोत्तरी कर देती, लेकिन कम से कम जरूरतमंद की चीजों पर टैक्स तो घटाया जा सकता था। लेकिन शिवराज सरकार ने फिलहाल अभी तक ऐसा कोई फैसला लेने का विचार नहीं किया है।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि देश में सबसे महंगा पेट्रोल-डीजल मध्यप्रदेश और राजस्थान में बिक रहा है। राज्यों में तेल की औसत प्राइस की बात करें तो इनमें मध्य प्रदेश सबसे आगे है। कुछ पड़ोसी राज्यों में पेट्रोल की औसत कीमत 90 रुपए से भी कम हैं। उत्तर प्रदेश में पेट्रोल 89.13 रुपए प्रति लीटर, छत्तीसगढ़ में कीमत 89.39 रुपए, गुजरात में 88.88 रुपए और अंडमान में 76.54 रुपए थी। इतना ही नहीं जरूरतमंद की चीजों से सबसे अधिक टैक्स वसूलने के मामले में भी मध्य प्रदेश सबसे आगे है। मध्य प्रदेश में 33 प्रतिशत कर वसूला जाता है जो कि सबसे ज्यादा है।

बढ़ती कीमतों के देख मप्र हाईकोर्ट ने पेट्रोल मंत्रालय और तेल कंपनियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि पेट्रोल डीजल के बराबर इथेनॉल और बायो डीजल की कीमत क्यों वसूली जा रही है। जस्टिस मो• रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की बैंच ने 6 सप्ताह से दोनों ही कंपनियों को जवाब देने का नोटिस जारी किया है। मप्र हाईकोर्ट में उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के मनीष शर्मा की ओर से दायर यचिका को संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने यह नोटिस दिया। कुल मिलाकर राज्य सरकार को इस दिशा में अब सख्त कदम उठाना चाहिए ताकि आम जनता को बढ़ती कीमतों से कुछ राहत मिल पाए।

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