कृषि कानूनों पर गंभीरता से विचार की जरूरत, ताकि दोबारा न दिखे 26 जनवरी जैसी आंदोलन की तस्वीर



--विजया पाठक (एडिटर - जगत विजन),
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

बीते चार महीनें से कृषि कानूनों को लेकर चल रहा किसानों का देशव्यापी आंदोलन अभी भी शांत होता नहीं दिखाई दे रहा है। किसान संगठनों के साथ केंद्र सरकार के नुमाइंदो की कई दौर की बैठके भी हो चुकी है फिर भी सरकार अब तक कोई उचित निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है। कृषि कानून को रद्द करने की मांग को लेकर देश की राजधानी दिल्ली की चारों दिशाओं पर धरने पर बैठे किसान और उनके परिजन अपने फैसले पर पूरी तरह से अडिग है, वहीं सरकार का रवैया भी अभी तक कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार के इस अड़ियल रवैये के चलते ही किसानों ने 26 जनवरी 2021 को लाल किले की तरफ ट्रेक्टर रैली निकाली, जिसमें बुरी तरह से कानून व्यवस्था ध्वस्त होती दिखाई दी। बावजूद इसके केंद्र सरकार ने अभी तक इस दिशा में कोई भी संज्ञान लेना उचित नहीं समझा। यही वजह है कि किसान नेता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार को एक बार फिर खुली चुनौति दे डाली, कि अगर केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया तो इस बार आह्वान संसद घेरने का होगा और वहां चार लाख नहीं चालीस लाख ट्रैक्टर जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने किसानों से तैयार रहने को कहा क्योंकि कभी भी दिल्ली जाने का आह्वान हो सकता है।

उन्होंने कहा, कान खोलकर सुन ले दिल्ली, ये किसान भी वही हैं और ट्रैक्टर भी वही होंगे। अब की बार आह्वान संसद का होगा। उन्होंने कहा कि किसान इंडिया गेट के पास के पार्कों में जुताई करेगा और फसल भी उगाएगा। साथ ही संसद को घेरने के लिए तारीख संयुक्त मोर्चा तय करेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 26 जनवरी की घटना के मामले में देश के किसानों को बदनाम करने की साजिश की गई, देश के किसानों को तिरंगे से प्यार है, लेकिन इस देश के नेताओं को नहीं। कुल मिलाकर किसान नेताओं से मिली इस चुनौति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गंभीरता से लेते हुए इस बिल के विषय पर फिर से विचार करना होगा। प्रधानमंत्री न किसी पार्टी का होता है और न हीं कि दल का। वो देश हित के लिए चुना गया व्यक्ति है, जिसे देश और जनता के हित में फैसले लेने का स्वतंत्र अधिकार प्राप्त है। लेकिन कृषि बिल को लेकर लिया गया फैसला कहीं न कहीं किसानों के अहित में है और देश के बड़े उद्योगपतियों के हित में, तभी देश का किसान इस पूरे बिल के विरोध में कई महीनों से आंदोलन करता दिखाई दे रहा है। खैर, अब यह तो आने वाला वक्त बताएगा कि इस बार किसानों का संसद कूच का परिदृश्य कैसा होता है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से यही अपील है कि किसानों के हित में एक बार फिर विचार करें ताकि 26 जनवरी 2021 जैसा हुड़दंग फिर से देखने को न मिले।

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