--अभिजीत पाण्डेय,
बक्सर-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
बिहार के बक्सर में स्थित सेंट्रल जेल एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह फिर वही है- फांसी की रस्सी। इस जेल को को एक बार फिर से फांसी की रस्सी बनाने का ऑर्डर मिला है। इस बार आजाद भारत में संभवत: पहली महिला शबनम को फांसी दी जानी है। फांसी की रस्सी बनाने के लिए मथुरा जेल से हाल ही में बक्सर सेंट्रल जेल को निर्देश मिले हैं।
गौरतलब है कि पूरे भारत में फांसी की रस्सी केवल बक्सर जेल में ही बनाई जाती है, क्योंकि इंडियन फैक्ट्री लॉ के हिसाब से बक्सर सेंट्रल जेल के अलावा कोई और जेल में यह रस्सी नहीं बनाई जा सकती है। फांसी की रस्सी बनाने की मशीन अंग्रेजों ने इसी जेल में लगाई थी। अंग्रेजों के समय में ही यहां फंदा तैयार किया जाता है। जेलर से मिली जानकारी के मुताबिक गंगा किनारे सेंट्रल जेल अवस्थित होने के कारण फंदा बनाने के लिए जो नमी चाहिए वह प्राकृतिक रूप से प्राप्त होती है। फंदा 16 फीट लम्बी रस्सी से बनता है। रस्सी को बनाने के लिए पंजाब से विशेष सूत मंगाया जाता है।
जानकारी के मुताबिक, ये फांसी की रस्सी शबनम के लिए तैयार हो रही है। शबनम उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र के गांव के बावनखेड़ी की रहने वाली है। उसके पिता शौकत अली टीचर थे। उनकी इकलौती बेटी शबनम ने 14 अप्रैल 2008 की रात प्रेमी सलीम के साथ मिलकर जो खूनी खेल खेला था, उससे पूरा देश हिल गया था। शबनम ने माता-पिता और 10 माह के मासूम भतीजे समेत परिवार के 7 लोगों को कुल्हाड़ी से काट डाला था।
इस मामले में निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने उसकी फांसी की सजा को बरकरार रखा। इसके बाद शबनम ने राष्ट्रपति से दया की गुहार लगाई लेकिन अब राष्ट्रपति भवन ने भी उसकी दया याचिका को खारिज कर दी है। यही वजह है कि आजाद भारत के इतिहास में शबनम पहली ऐसी महिला होगी जिसे फांसी की सजा दी जाएगी। गौरतलब है कि मथुरा जेल में 150 साल पहले महिला फांसीघर बनाया गया था। लेकिन आजादी के बाद से अब तक किसी भी महिला को फांसी की सजा नहीं दी गई।
शबनम को फांसी देने के लिए मथुरा की जेल में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। हालांकि फांसी की तारीख अभी तय नहीं है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र कुमार मैत्रेय ने बताया कि अभी फांसी की तारीख तय नहीं है, लेकिन हमने तैयारी शुरू कर दी है। डेथ वारंट जारी होते ही शबनम को फांसी दे दी जाएगी।