--विजया पाठक (एडिटर - जगत विजन),
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
इन दिनों मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में सिर्फ एक ही मुद्दा है शराब। जी हां पिछले एक सप्ताह से शराब पर राजनीति बहुत तेज हो गई है। डेढ़ वर्ष पहले कमलनाथ सरकार के शासनकाल में शराब की दुकाने खोले जाने, महिलाओं द्वारा शराब की दुकान के संचालन और शराब की बिक्री किए जाने का विरोध करने वाली भाजपा सरकार ने गिरगिट की तरह अब रंग बदल लिया है। अब स्वयं खुद भाजपा सरकार कभी शराब की नई दुकाने खोले जाने को लेकर योजना बनती है तो कभी ऑनलाइन शराब की बिक्री पर। कुल मिलाकर सरकार का पूरा फोकस अपने राजस्व पर है, किसी भी तरह से सरकार अपने राजस्व का पेट भरना चाहती है इसलिए आए दिन शराब पर अलग-अलग रणनीति पर काम कर रही है।
प्रदेश में जहरीली शराब पीने से लोगों की मौतें हो रही है, घर बर्बाद हो रहे है, लोग सड़कों पर आ रहे है, इन सब की चिंता करने और रोक लगाने के बजाय सरकार का पूरा ध्यान शराब की बिक्री और राजस्व बढ़ाने पर है। अब भाजपा सरकार एक नया झुनझुना लेकर आई है घर -घर शराब की बोतल पहुंचाने का। प्रदेश सरकार वर्ष 2021-22 के लिए नई आबकारी नीति लाने जा रही है। इसका ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। इसमें शराब की ऑनलाइन बिक्री का प्रस्ताव किया गया है। इसके साथ ही दुकानों से खरीदी पर भुगतान का बिल भी अनिवार्य किया जा सकता है। फिलहाल यह ड्राफ्ट वाणिज्यिक कर व आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा के पास पहुंच चुका है। यहां से मंजूरी के बाद इसे मुख्यमंत्री के पास भेजा जाएगा।
खास बात यह है कि प्रदेश में शराब पर चल रहे इस सियासी ड्रामे को लेकर अभी तक प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कोई टिप्पणी नहीं की है। इससे पहले जब आबकारी आयुक्त द्वारा नई दुकानें खोलने संबंधी आदेश जारी कर आवेदन आमंत्रित किए गए थे तब माननीय ने तुरंत एक्शन लेते हुए प्रदेश में शराबबंदी किए जाने का समर्थन किया था। खेर, देखने वाली बात यह है कि शराबबंदी पर रोक लगाने और प्रदेश को शराब मुक्त कराने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आबकारी विभाग के इस फैसले पर अब क्या एक्शन लेते है क्योंकि शराब अंतत: प्रदेश के लिए घातक है और इसकी बिक्री पर रोक लगना ही चाहिए।