--विजया पाठक (एडिटर - जगत विज़न),
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
■ सीबीडीटी की अप्रेजल रिपोर्ट में जिक्र कमलनाथ सरकार के लिए 20 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई थी बनर्जी, माने, मधुकुमार और मिश्रा ने
कमलनाथ सरकार के कार्यकाल के दौरान उनसे ही जुड़े प्रमुख लोगों के ठिकानों पर पड़े आयकर छापों में घिरे आईपीएस व राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही है। आईपीएस सुशोभन बनर्जी, संजय माने, बी मधुकुमार और राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी अरुण मिश्रा के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जा सकती है। चुनाव आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के मप्र कैडर में पदस्थ तीन अधिकारियों के समेत उन सभी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं जिन पर 2019 के आम चुनाव के दौरान कालाधन ले जाने के आरोप लगे थे। मप्र के मुख्य सचिव से भी इसी तरह की कार्रवाई करने को कहा गया है।
आयकर विभाग ने छापों में पाया था कि 2019 के आम चुनाव में भारी मात्रा में नकदी का इस्तेमाल किया गया था। इसकी रिपोर्ट आयकर विभाग की शीर्ष संस्था केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने चुनाव आयोग को भेजी थी। आयोग ने कहा कि उसने इस रिपोर्ट के सभी पहलुओं पर विचार विमर्श के बाद ही यह निर्देश दिए हैं। जाहिर है कि यदि राज्य सरकार इन अफसरों के लिए खिलाफ एफआईआर दर्ज कार्यवाही करती है तो यह प्रदेश सरकार के उन अधिकारियों के लिए एक सबक होगा जो लगातार प्रदेश की जनता से लूट खसोट करने का काम कर रहे है।
अधिकारियों को एक बात समझना चाहिए कि सरकार द्वारा उन्हें जब पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराई जाती है तो फिर इस तरह का भ्रष्टाचार करने की जरूरत क्या है। यह भी समझना चाहिए कि अधिकारी किसी व्यक्ति विशेष के लिए नही बल्कि जनता और सरकार के पक्ष में कार्य करने के लिए बनते है।
जानकारी के अनुसार सेंट्रल इलेक्शन कमीशन की बैंच जल्द ही दोबारा मुख्य सचिव और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को फिर से तलब कर सकती है क्योंकि, पिछली मुलाकात में मिला दो सप्ताह का समय 19 जनवरी को पूरा हो गया है। बैंच के पास जाने से पहले इन अफसरों पर एफआईआर की जा सकती है। देखा जाए तो चुनाव में कालेधन के इस्तेमाल से जुड़े केस में केंद्रीय गृह मंत्रालय से मिली रिपोर्ट के आधार पर मप्र के गृह विभाग ने विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया तकरीबन पूरी कर ली है। जिन पुलिस अफसरों के नाम के आगे बड़ी रकम के लेन-देन का जिक्र है, उनकी चार्जशीट तकरीबन तैयार हो गई है। किसी भी दिन यह चार्जशीट उन्हें सौंपी जा सकती है। तीनों अफसरों के नाम के आगे लिखी गई उस राशि का जिक्र है, जो सीबीडीटी की अप्रेजल रिपोर्ट में दर्ज है। यह राशि 20 करोड़ रुपए से अधिक है। कुल मिलाकर अब वो दिन दूर नहीं जब यह चारों ही पुलिस अफसर भ्रष्टाचार के आरोप में जेल के पीछे होंगे।