--विजया पाठक (एडिटर - जगत विजन),
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
एक दिन पहले दिल्ली के लाल किले पर गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह हुआ। इस समारोह में देश का हर राज्य सहभागी बनें, यह राज्य की जनता का सपना होता है। लेकिन मध्य प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह सपना इस बार पूरा नहीं हो सका।
दरअसल दिल्ली के राजपथ पर झंडावंदन के बाद हर राज्य अपने प्रदेश के सांस्कृतिक वैभव, जनता के मान अभिमान और प्रदेश की बदलती तस्वीर पर केंद्रित झांकी का निर्माण कर देश की जनता के सामने प्रदर्शित करता है। लेकिन इस बार समारोह में मध्य प्रदेश से कोई झांकी नहीं भेजी गई। इससे राष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश की जमकर किरकिरी हुई।
आपको बता दें कि प्रदेश सरकार की ओर से झांकी निर्माण की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश माध्यम को दी जाती है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की टीम दिल्ली में झांकियों के प्राप्त प्रस्तावों पर चर्चा करके उन्हें फाइनल करने का काम करता है। मप्र की ओर से इस बैठक में मध्यप्रदेश माध्यम के एक ऐसे शख्स हेमंत वायंगणकर को भेजा गया जो महज हाई सेकंडरी पास है औऱ जिसके पास फाइन आर्ट महज एक डिप्लोमा है। बैठक में वे कमेटी के सामने आत्म निर्भऱ मध्य प्रदेश का प्रस्तुतिकरण ठीक ढंग से नहीं कर सके और कमेटी ने मध्य प्रदेश के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। खास बात यह है कि खुद को आईएएस अफसर के समतुल्य समझने वाले हेमंत ने इस पूरे प्रस्ताव पर परिचर्चा के लिए किसी सीनियर आईएएस अफसर के साथ भी चर्चा करना उचित नहीं समझा। हेमंत की नाकामी और नासमझी के कारण आज प्रदेशवासियों को राष्ट्रीय स्तर पर नीचा देखने पड़ा।
महाप्रबंधक जी की खासियत है कि वो शासकीय काम को छोड़ दुनिया के सारे काम करने में मशगूल रहते है। ऑफिस पॉलिटिक्स करने और माध्यम के कर्मचारियों में आपसी लड़ाई-झगड़ा कराने का इन्हें बेहद शौक है। कुल मिलाकर मध्य प्रदेश माध्यम के एक लापरवाह और गैर जिम्मेदार अधिकारी हेमंत वायंगणकर के कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आत्म निर्भऱ मध्य प्रदेश का सपना महज सपना बनकर रह गया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को काफी ठेस पहुंची है। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार इस बात को लेकर मुख्यमंत्री बहुत नाराज है। आत्म निर्भर मध्य प्रदेश के सपने को साकार करने की दिशा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद 24 घंटे जुटे रहते है। इस संबंध में पूरा रोड मेप तैयार कर उसे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी सौंप चुके है। उसी आत्म निर्भऱ मध्य प्रदेश को झांकी के रुप में परिकल्पित नहीं कर पाना प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है। राजपथ पर प्रदेश की झांकी की अनुपस्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर भी प्रदेश सरकार की दूरदर्शिता पर सवालियां निशान खड़े किए गए है। ध्यान देने वाली बात यह है कि पूरे प्रदेश की राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह से किरकिरी होने के बाद मुख्यमंत्री को तत्काल प्रभाव से हेमंत को इस पद से हटाकर किसी वरिष्ठ अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपना चाहिए जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बनें।