--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
बिहार के कई जिलों में पकड़ुआ विवाह आम है। पकडुआ विवाह उच्च जातियों में अधिक प्रचलित है, जहां दहेज की माँग भी अधिक है। बिहार के बेगूसराय, मुंगेर, बांका, खगड़िया, मधेपुरा, पूर्णिया, जहानाबाद, जमुई में इस तरह के जबरन विवाह या पकाडुआ विवाह को अजीब नहीं माना जाता है।
इस विवाह के लिए अक्सर योग्य कुंवारे लोगों को अगवा कर उन महिलाओं से शादी करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिनका परिवार दहेज नहीं दे सकते।
बेगूसराय में 1990 के दशक की शुरुआत में जबरन शादियां इतनी उग्र थीं कि 2010 में उन पर एक फिल्म 'अंतरद्वंद' बनाई गई थी। फिल्म ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था।
बिहार के कई जिलों में पकड़ुआ विवाह आम है। राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, जनवरी और नवंबर 2020 के बीच राज्य में 7,194 जबरन शादी के मामले दर्ज किए गए, 2019 में 10,925, 2018 में 10,310, 2017 में 8,972। आपराधिक गिरोह अक्सर पुरुषों का अपहरण करने और उन्हें शादी के लिए मजबूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। इन गिरोहों के डर के चलते बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने नहीं आ पाते हैं।
एक वरी पुलिस अधिकारी ने बताया कि पकाडुआ विवाह उच्च जातियों में अधिक प्रचलित है, जहां दहेज की माँग भी अधिक है। यह मुख्य रूप से भूमिहार और यादव जातियों के बीच प्रचलित है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह इन उच्च-लाभकारी और कम जोखिम वाले अपराधों पर जोर देते हैं और बहुत पैसा कमाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के जबरन शादी समारोहों की हमेशा के लिए वीडियो ग्राफी की जाती है और दुल्हन को उसके ससुराल भेज दिया जाता है। हालांकि, अक्सर ऐसी शादियां टिक जाती हैं।