आजाद हिंद फौज की तर्ज पर आजाद हिंद किसान फौज बनाने को तैयार है किसान आंदोलनकारी…



--विजया पाठक (एडिटर - जगत विजन),
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

अपनी मांगों को मनवाने के लिए महीनों से दिल्ली बॉर्डर की सड़कों पर डटे किसान अब केंद्र सरकार के साथ खुलकर लड़ने को तैयार है। दरअसल देश के किसान पिछले कई महीनों से हाल ही में पारित तीन कृषि कानून के वापसी की मांग उठा रहे है। ऐसे में पहले तो कई दौर की बैठके केंद्र सरकार के नुमाइंदों के साथ किसान नेताओं की हुई, लेकिन वे सभी बैठके बेनतीजा रही।

कई दौर की बैठकों के बाद नहीं मिले समाधान के बाद अब किसान आंदोलनकारी एक नई फौज बनाने को तैयार है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब यदि सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती है तो सड़क पर किसान ससंद लगाई जाएगी। सिंघु बॉर्डर पर 23-24 जनवरी को किसान संसद लगाए जाने की घोषणा भी कर दी है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती की याद में किसान नेता सड़क पर इस संसद का आयोजन कर रहे है जिसमें विपक्षी दलों के नेताओं के अलावा कई सामाजिक संगठनों से जुड़ी नामचीन हस्तियां शामिल होंगी। कुल मिलाकर अब यह आंदोलन धीरे-धीरे और गति पकड़ रहा है और अब जल्द ही आजाद हिंद फौज की तर्ज पर आजाद हिंद किसान फौज तैयार की जा रही है। फिर भी अभी तक केंद्र सरकार महज दर्शक बनी हुई है।

जब किसानों के इस हाल की तस्वीर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची तो कोर्ट ने किसान आंदोलन से जुड़े मुद्दे को सुलझाने के लिए 4 सदस्‍यीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी की जिम्‍मेदारी इन मुद्दों को सुलझाने की होगी लेकिन किसानों ने इस कमेटी को सिरे से नकार दिया है। किसानों ने अपनी मांग पर डटे रहने के साफ संकेत देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें कमेटी नहीं बल्कि फैसला चाहिए था, सरकार कृषि कानून के तीन नियमों को वापस ले या नहीं।

किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने स्पष्ट किया है कि ये सरकार की शरारत है कि ये सुप्रीम के ज़रिए कमेटी ले आए। कमेटी के सारे सदस्य सरकार को सही ठहराते रहे हैं। हमारा ये आंदोलन चलता रहेगा? कल को ये कमेटी के लोग बदल भी दें तो भी हम कमेटी के सामने नहीं जाएंगे। हमारा ये संघर्ष अनिश्चितकालीन है। हम शांतिपूर्ण तरीक़े से आंदोलन चलाते रहेंगे। कुल मिलाकर यदि समय रहते सरकार ने इस आंदोलन को रोका नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब अन्नदाता विद्रोह के रुप में दिखाई देंगे।

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