--विजया पाठक (एडिटर - जगत विजन),
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 50 किमी दूर राजगढ़ जिले के पार्वती नदी के तट पर बसा पीलूखेड़ी गांव किसी जमाने में पारंपरिक खेती और आपसी सौहार्द की मिसाल हुआ करता था। लेकिन आज यह गांव पर्यावरण की दृष्टि से दिन प्रतिदिन प्रदूषण के गर्त में घुसता जा रहा है। इसकी बड़ी वजह है यहां स्थापित औद्योगिक कंपनियां।
जिले के विकास के नाम पर शासन प्रशासन और सराकर ने पीलूखेडी को औद्योगिक क्षेत्र तो घोषित कर दिया, लेकिन किसी भी क्षेत्र में लगने वाले औद्योगिकरण के मानकों को अनदेखा कर दिया है। पीलूखेड़ी इंडस्ट्रियल एरिया मे शासन-सरकार की ओर से अनदेखी के कारण मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश जाने वाली प्रमुख नदी पार्वती नदी अब मौत के मुहाने पर खड़ी है। पीलूखेड़ी इंडस्ट्रियल एरिया स्थित फैक्ट्रीज के कारण पार्वती नदी पूरी तरह से प्रदूषित हो गई है इसके अलावा पीलूखेडी ग्राम का पुरा ग्राउंड वॉटर पीने योग्य ही नहीं बचा है। पीलूखेड़ी इंडस्ट्रियल एरिया मे छोटी बड़ी 50 फैक्ट्रियां है उनमे ओसवाल वूलन मिल्स लिमिटेड, विंध्याचल डिस्टलरीज लिमिटेड, भोपाल ग्लूज एंड केमिकल्स प्रमुख है इसके साथ ही टायर फैक्ट्री जैसी फैक्ट्रियां है। इनमे से प्रदूषण नियंत्रण मंडल सिर्फ दो फैक्ट्रियां ओसवाल वूलन मिल्स लिमिटेड और विंध्याचल डिस्टलरीज लिमिटेड को ईआरसी सर्विलेंस मेनेजमेंट सिस्टम मे रखा है बाकी की मोनिटरिंग नहीं होती। इसके साथ ही इंडस्ट्रियल एरिया मे शासन का कोई कॉमन एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) नहीं है और कंटीन्यूअस ऐयर मॉनिटरिंग सिस्टम(सीएएमएस) भी नहीं लगा है जिसके फल्स्वरूप फैक्ट्रियां अपने यहाँ का जहरीला कचरा जोकि बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी), केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) एवं हेवी मेटल्स से भरा हुआ है सीधा एफ्लूएंट पार्वती नदी और आसपास के क्षेत्रों में छोड़ते हैं। ओसवाल वूलन मिल्स लिमिटेड अपने रॉ मटेरिअल में राइस हसक का यूज करती है जिसके कारण वायु प्रदूषण अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है।
यही वजह है कि आज पीलूखेड़ी गांव का किसान कहीं न कहीं अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ता दिखाई दे रहा है। खास बात यह है कि यदि सरकार ने जल्द ही इस गांव में लगे औद्योगिक संयत्र से निकलने वाले प्रदूषण की ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में किसानों की परेशानियां और बढ़ सकती है। जाहिर है कि पीलूखेड़ी टप्पा कुरावर में बड़ी संख्या में इंडस्ट्रीज स्थापित है। रोज जहरीला पानी जहरीली गैस और केमिकल युक्त पाउडर का डिस्चार्ज यहां होता है। जिसकी वजह है कि फैक्ट्रीयों के आसपास के खेत और फसलें बुरी तरह से प्रभावित हो रहे है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन फैक्ट्रियों के कारण हमारी जमीन बंजर हो चुकी हैं फसलों में मेहनत करने के बावजूद हमें कुछ नहीं मिल पाता। सबसे ज्यादा कैमिकल और प्रदूषण ओसवाल और भोपाल ग्लूज लिमिटेड से निकलता है जिससे प्रदूषण दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत जिला प्रशासन से भी की, लेकिन न तो प्रशासन के अधिकारियों ने कोई कार्यवाही करना उचित समझा और ना ही इन औद्योगिक कंपनियों में जाकर जांच की कार्यवाही की। इससे साफ जाहिर होता है कि औद्योगिक कंपनियों के संचालन से निकलने वाला प्रदूषण कहीं न कहीं जिला प्रशासन के अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में मनमाने कार्य चल रहे हैं। ग्रामीण किसानों की जमीनें बंजर हो चुकी हैं और प्रदूषण विभाग को कोई सुध नहीं है सारे प्रमाण उपलब्ध कराने के बावजूद भी प्रदूषण विभाग के सर में जूं नहीं रेंगती। जानकारी के अनुसार कई अधिकारियों को और प्रदूषण विभाग को इन कंपनियों से निकलने वाला गंदे पानी का विजुअल दिया ,लेकिन कोई भी कार्यवाही करने को तैयार नहीं है यहां पर बड़े पैमाने में मनमानी चल रही है।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक प्रशासन इस तरह से चुप्पी साधे बैठा रहेगा। अगर जल्द ही यहां कोई कार्य़वाही नहीं की गई तो किसानों का यह गुस्सा जल्द ही एक आंदोलन का स्वरुप ले सकता है।