--अभिजीत पाण्डेय (ब्यूरो),
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
बिहार में बेटियों की शिक्षा ने सामाजिक, स्वास्थ्य और आर्थिक बदलाव की नई इबारत लिखी है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2020 की रिपोर्ट बिहार में वर्ष 2015-16 में 26.4 प्रतिशत महिलाओं के पास अपना अपना बैंक एकाउंट था। जबकि अब 76.7 प्रतिशत महिलाओं के पास अपना बैंक खाता है। वहीं, मोबाइल का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या 40.9 फीसदी से बढ़कर 51.4 फीसदी हो गई है। शहरों में 61.8 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 49.3 फीसदी महिलाएं मोबाइल का इस्तेमाल करती हैं।
12 दिसम्बर को जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में बेटियों की शिक्षा ने सामाजिक, स्वास्थ्य और आर्थिक बदलाव की नई इबारत लिखी है। रिपोर्ट में दस सालों में बिहार में बेटियों को शिक्षित करने के लिए चलायी जा रही योजनाओं से चहुमुंखी विकास की झलक दिख रही है। खासकर बेटियों को शिक्षित करने के लिए चलायी जा रही साइकिल, पोशाक और छात्रवृत्ति योजना के कारण लड़कियों की शिक्षा में आठ प्रतिशत का सुधार हुआ है।
एनएफएचएस-4 में शिक्षा की यह दर 49.6 प्रतिशत थी अब 57.8 प्रतिशत हो गई है। शिक्षा का स्तर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी सुधरा है। शहरी क्षेत्र में चार प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में नौ प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यानी शिक्षा की लौ शहर से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में फैली है। बेटियों के शिक्षित होने का ही असर है कि राज्य में बाल विवाह के खिलाफ बेटियां अधिक मुखर हुई हैं। एनएफएचएच -4 के अनुसार, 42.5 प्रतिशत बेटियों की शादी 18 साल से पहले हो जाती थी। जबकि 2020 में यह आंकड़ा 40.8 फीसदी पर आ गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से 11 प्रतिशत अधिक महिलाएं अस्पताल जाने लगी हैं तो शहरी क्षेत्र की 14 प्रतिशत अधिक गर्भवती महिलाएं अस्पताल में प्रसव कराने पहुंच रही हैं।
महिलाओं ने हिंसा के खिलाफ आवाज बुलंद की है। 2015-16 में 43.2 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा से प्रताडित थी, अब यह आंकड़ा 40 प्रतिशत है।
महिलाओं में शिक्षा का स्तर बढ़ने का फायदा यह हुआ है कि वे स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक हुई हैं। वे बच्चों के जन्म के लिए अस्पताल को ही सुरक्षित समझ रही हैं। साल 2015-16 में 63.8 प्रतिशत बच्चों का जन्म अस्पताल में होता था, अब 76.2 फीसदी बच्चों का जन्म अस्पताल में हो रहा है।