--एकलव्य कुमार,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
"गीत लोगों को न सिर्फ संवेदनशील बनाने में सहायक होता है बल्कि समय-समय पर यह लोगों में जोश भी भरता है। स्वाधीनता संग्राम के दौरान भी जो गीत रचे गए, उसने स्वतंत्रता संग्राम में नई जान फूंकी। वर्तमान समय में भी गीतकार ऐसे गीतों की रचना कर रहे हैं, जो सिर्फ प्रेम की अभिव्यक्ति ही नहीं, वरन लोगों को अपने अधिकारों और राष्ट्र के प्रति जागरूक भी करते हैं।”
ऐसे ही भाव विन्यास साहित्य मंच के तत्वावधान में आयोजित गीत गोष्ठी में गीतकारों ने अपने गीतों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। वरिष्ठ गीतकार और सुप्रसिद्ध साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी की अध्यक्षता में तीन घंटे तक चले इस कार्यक्रम का शुभारम्भ भागलपुर के वरिष्ठ गीतकार राजकुमार ने वाणी वंदना से किया।
वहीं कार्यक्रम में देशभर के कई राज्यों से शामिल चर्चित गीतकारों ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत और प्रेम गीतों की प्रस्तुति दी। गीत गोष्ठी में गाज़ियाबाद से पीयूष कांति सक्सेना, गजरौला (उप्र) से सुविख्यात गीतकार एवं वरिष्ठ कवियित्री मधु चतुर्वेदी, मुंगेर से शिवनंदन सलिल, दिल्ली से शैल भदावरी, कुसुमलता कुसुम, बिहारशरीफ से अल्पना ने प्रतुति दी।