--अभिजीत पाण्डेय (ब्यूरो),
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
25 साल का पढ़ा-लिखा बेटा आपको लखपति बना सकता है, तो 25 साल का आम का पेड़ भी। शर्त बस यह है कि पेड़ को भी बेटे की तरह प्यार-दुलार से पालिए। खाद-पानी और अच्छी देखभाल से आम का पेड़ बरगद जैसा विस्तार ले लेता है। एक स्वस्थ पेड़ हर साल 50 - 75 क्विंटल फल देता है।
यह कहना है, लखमिनियां (बेगूसराय, बिहार) के चर्चित बागवान अब्दुल बरकत अली का, जो अपने बगीचों और नर्सरी में तरह-तरह के प्रयोगों के लिए प्रतिष्ठित हो चुके हैं। वह एक पेड़ में 45 किस्म के आम देने वाले पौधे को विकसित कर चुके हैं। प्रशासन उनके बारे में डॉक्यूमेंट्री बनवा रहा है। इसे दिखाकर किसानों को प्रगतिशील बागवानी के लिए प्रेरित किया जाएगा।
अब्दुल बरकत अली, जो अब अली चाचा के नाम से भी मशहूर हैं, की कहानी बड़ी दिलचस्प है। बात 1970 की है। बरकत अली के सिर पर मालदह आम का बगीचा लगाने का जुनून सवार था। वह हाजीपुर की एक नर्सरी से मालदह आम के 25 पौधे ले लाए। आठ-दस साल खूब सेवा और देखभाल करके इन्हें पाला-पोसा, पर इनमें फल आते ही उन पर मानो वज्रपात हो गया। 25 पेड़ों में सिर्फ दो मालदह निकले, बाकी देसी जंगली। मेहनत मिट्टी में मिल गई और मालदह बगीचे का ख्वाब चूर-चूर हो गया, पर इस ठगी ने उनके सिर पर नया जुनून सवार कर दिया।
उन्होंने संकल्प लिया कि वह खुद ऐसी नर्सरी विकसित करेंगे, जहां कोई ठगा न जाए। अब 75 साल के इन जनाब की सिर्फ एक बीघा क्षेत्र की नर्सरी हरियाली प्रेमियों के बीच खास पहचान बना चुकी है। यहां दर्जनों किस्म के आम, लीची और अमरूद के पौधे हैं। कहते हैं कि सूरज की तरफ चेहरा रखिए तो आपको काली छाया नहीं दिखेगी।
एक साधारण पंप मिस्त्री के पुत्र बरकत अली इसी सकारात्मक सोच से इस मुकाम पर पहुंचे। उन्होंने सपने देखना बंद नहीं किया है। उनका लक्ष्य ऐसे पौधे विकसित करना है जिनमें 200 किस्म के आम और 15-15 किस्म की लीची व अमरूद फले। उनके प्रयोग और शोध को देखने कृषि और उद्यान विज्ञानी भी लखमिनियां आते रहते हैं। उनके जुनून ने उनका जीवन स्तर भी बदल दिया है। नर्सरी से वह हर महीने 70-80 हजार रुपये कमा लेते हैं।
उनका दावा है कि आम का सिर्फ एक पेड़ साल में एक लाख रुपये तक आमदनी करा सकता है। वह अब तक हजारों किसानों को बागवानी का निस्वार्थ प्रशिक्षण दे चुके हैं। वह बिहार के कई जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में भी किसानों के साथ कार्यशालाएं कर चुके हैं।
दशहरी आम के लिए विख्यात मलिहाबाद (लखनऊ) में एक बागवान हैं कलीमुल्ला खां। इन्हें उनकी बागवानी संबंधी असाधारण उपलब्धियों के लिए पद्मश्री सम्मान मिल चुका है। कलीमुल्ला ने आम की 300 किस्मों वाला पौधा विकसित किया है। उनका नाम सुनकर बरकत अली मलिहाबाद गए और काफी दिन उनके पास रहकर बागवानी के गुण सीखे। फिर लखमिनियां लौटकर आम, लीची और अमरूद के एक पेड़ में कई किस्में पैदा करने का करिश्माई प्रयोग किया।