नई दिल्ली, 21 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
● परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा : राधामोहन सिंह
कृषि में रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग चिंता का विषय है और पर्यावरण, सामाजिक-आर्थिक एवं उत्पादन के मोर्चों पर इसके व्यापक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए इस ओर सरकार का ध्यान गया है। यह बात कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने नई दिल्ली में जैविक खेती पर आयोजित एसोचैम के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि भारत परम्परागत रूप से विश्व में जैविक खेती करने वाला सबसे बड़ा देश है। भारत के अनेक हिस्सों में जैविक खेती पहले से ही परम्परागत ज्ञान के आधार पर की जा रही है। सरकार भारत को कृषि क्षेत्र में आधुनिकता के पथ पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है और वह नई प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करना चाहती है। उन्होंने कहा कि उत्पादन में सतत वृद्धि के लिए सरकार प्राथमिकता के आधार पर जैविक खेती को बढ़ावा देती रही है।
राधामोहन सिंह ने कहा कि यह प्रधानमंत्री का मिशन है कि ‘हरित क्रांति’ की तर्ज पर भारत में सफल ‘जैविक खेती क्रांति’ सुनिश्चित की जाए, ताकि कृषक समुदाय इससे लाभान्वित हो। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए लगभग 23 लाख हेक्टेयर भूमि को जैविक खेती के लिए उपयुक्त बनाया गया है। इसी तरह सरकार ने परम्परागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) शुरू की है जिसके तहत दो लाख हेक्टेयर भूमि को जैविक खेती के लिए उपयुक्त बनाया गया है और इस तरह से पांच लाख किसान लाभान्वित हुए है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जैविक खेती केन्द्र का मुख्य उद्देश्य देश में जैविक खेती को बढ़ावा देना है। अन्य सरकारी संस्थान जैसे कि एपीडा और वाणिज्य मंत्रालय प्रमाणन प्रणाली में सुधार एवं नियंत्रण में मुख्य भूमिका निभाते हुए जैविक उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दे रहे हैं। सरकार ने ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास’ की शुरुआत की है। मंत्रालय का उद्देश्य पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में जैविक खेती को बढ़ावा देना है क्योंकि इन क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के उपयोग का स्तर अत्यंत कम है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती के दायरे में 50,000 हेक्टेयर भूमि को लाना है जिनमें से 45,918 हेक्टेयर भूमि को जैविक खेती के लिए उपयुक्त बना दिया गया है और 2429 किसान हित समूह गठित किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप 48949 किसान इस योजना से जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के स्वप्न के अनुरूप भारत को एक ‘रसायन मुक्त जैविक देश’ बनने की दिशा में अग्रसर होना चाहिए।
(●) राज्यों से कहा गया है कि वे कृषि पर केन्द्रीय योजनाओं से संबंधित फंड का तत्काल वितरण करने के लिए 15 अप्रैल, 2018 तक केन्द्र को अपनी वार्षिक कार्य योजना 2018-19 पेश कर दें : राधामोहन सिंह
● केन्द्रीय कृषि मंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों (कृषि) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित किया
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने नई दिल्ली में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के मुख्य सचिवों और राज्यों के कृषि विभागों के प्रधान सचिवों एवं वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित किया। कृषि मंत्रालय के लिए इस तरह की अपनी पहली बैठक में राधामोहन सिंह ने राज्यों से कहा कि वे मंत्रालय को अपनी वार्षिक कार्य योजना 2018-19 को 15 अप्रैल, 2018 तक पेश कर दें, ताकि कृषि एवं उससे संबद्ध क्षेत्रों पर केन्द्रीय योजनाओं से संबंधित धनराशि (फंड) का तत्काल वितरण हो सके। उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) से संबंधित अंतर-राज्य मापदंड संबंधी सूचनाएं तत्काल भेजने को कहा।
श्री सिंह ने राज्यों से कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (एटीएमए) योजना पर गठित संचालन समिति की नियमित बैठकें करने और रिक्त पदों को भरने के लिए भी कहा। उन्होंने वर्ष 2017-18 में राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों की अप्रयुक्त धनराशि के बारे में भी जानकारी ली और उनसे पहली किस्त के रूप में प्राप्त धनराशि के उपयोग संबंधी प्रमाण पत्रों को अगले दो दिनों में पेश करने को कहा, ताकि वित्त वर्ष 2017-18 की समाप्ति से पहले दूसरी किस्त जारी की जा सके। उन्होंने राज्यों से वित्त वर्ष 2017-18 की समाप्ति से पहले बची हुई धनराशि का उपयोग करने का भी अनुरोध किया।
राधामोहन सिंह ने राज्यों से सभी योजनाओं के सुगम संचालन का आह्वान करने के साथ-साथ उनसे सुझाव मांगे और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।