नई दिल्ली, 17 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(●) स्वास्थ्यपूर्ण जीवन शैली
चूंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है, अत: केंद्रीय सरकार, स्वस्थ जीवन-शैली को प्रोत्साहित करने तथा स्वास्थ्य परिचर्या में सुधार लाने के लिए जागरूकता का सृजन करने हेतु राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे प्रयासों में उनकी सहायता करती है।
सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत, कैंसर, मधुमेह, हृदवाहिका रोगों तथा अभिघात (एनपीसीडीसीएस) की रोकथाम एवं इनके नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम को कार्यान्वित कर रही है। एनपीसीडीसीएस गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के समुचित प्रबंधन हेतु उच्चतर सुविधा केंद्रों के लिए व्यवहार तथा जीवन-शैली परिवर्तनों के लिए जागरूकता सृजन, उच्च स्तरीय जोखिम कारकों वाले व्यक्तियों की जांच एवं शीघ्र निदान तथा उनके उपचार और रेफरल (यदि अपेक्षित हो) पर ध्यान देती है।
शीघ्र निदान हेतु, भारत सरकार द्वारा मौजूदा प्राथमिक स्वास्थ्य परिचर्या प्रणाली के तहत अग्रणी कार्यकर्ताओं तथा स्वास्थ्य कर्मियों की सेवाओं का उपयोग करकेमधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा सामान्य कैंसर अर्थात् मुख, स्तर एवं गर्भाश्य जैसी सामान्य गैर-संचारी रोगों के लिए जनसंख्या आधारित रोकथाम, नियंत्रण एवं जांच प्रारंभ की गई है। इस प्रक्रिया से सामान्य गैर-संचारी रोगों के जोखिम कारकों के संबंध में जागरूकता का सृजन भी होगा। साईकिल चलाने तथा पैदल चलने इत्यादि सहित किसी भी मौलिक व्यायाम को स्वस्थ जीवन-शैली उपायों के रूप में स्वीकार किया जाता है।
देश में खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए लोगों को इसके क्रॉस-कटिंग प्रभाव नामत: संपूर्ण विकास एकीकरण, लिंग समानता, स्वस्थ जीवन-शैली, खेल विकास से संबंधित राष्ट्रीय गर्व एवं आर्थिक उवसरों के माध्यम से खेल शक्ति का उपयोग करने की अनुमति देने हेतु, युवा कार्य और खेल मंत्रालय ‘खेलो इंडिया’ योजना को कार्यान्वित कर रहा है जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ ‘सामुदायिक कोचिंग विकास’ और ‘स्कूल जाने वाले बच्चों की शारीरिक योग्यता’’ नामक दो याजनाएं शामिल हैं।
राष्ट्रीय खेल फेडरेशन (एनएसएफ) की सहायता की येाजना के तहत, एनएसएफ को कोचिंग कैंप का आयोजन करने, राष्ट्रीय टूर्नामेंट, भारतीय टीमों की भारत तथा विदेश में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भागीदारिता तथा विभिन्न खेलों के लिए विदेशी कोचों को भाड़े पर लेने हेतु सहायता उपलब्ध कराई जाती है। सरकार ने देश में साईकिलिंग खेल को बढ़ावा देने हेतु भारतीय साईकिलिंग फेडरेशन (सीएफआई) को मान्यता दी है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के द्वारा लोकसभा में लिखित में उत्तर दिया गया।
(●) स्वास्थ्य निगरानी
भारत सरकार ने देश में स्वास्थ्य निगरानी को सुदृढ़ बनाने हेतु एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) प्रारंभ किया है। इसका कार्यान्वयन महामारी संभावित रोगों के कारण होने वाले रोग प्रकोपों का पता लगाने एवं उन पर कार्रवाई करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में किया जाता है। ऐसे प्रकोपों को फैलने से रोकने के लिए राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों को अतिरिक्त कार्मिकशक्ति, प्रकोप की जांच पड़ताल हेतु अभिज्ञात त्वरित प्रतिक्रियात्मक टीम (आरआरटी) के सदस्यों को प्रशिक्षण, महामारी संभावित रोगों की पहचान करने के लिए प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ बनाने, आंकड़ा प्रविष्टि विश्लेषण एवं आंकड़ा अंतरण हेतु सूचना प्रौद्योगिकी उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। कार्यक्रम के परिचालनीकरण हेतु निधियों का प्रावधान किया जाता है।
विभिन्न राज्य एवं केंद्रीय सरकार के अस्पतालों में स्वास्थ्य परिचर्या सेवाओं को समर्थ बनाने तथा उनमें सुधार लाने के लिए सरकार द्वारा जो कम्प्यूटरीकृत उपाय किए गए हैं उनमें अस्पताल सूचना प्रणाली, ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली तथा रोगी फीडबैक प्रणाली शामिल हैं।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के ई-अस्पताल एप्लीकेशन को केंद्रीय सरकार के तथा स्वायत्तशासी अस्पतालों सहित लगभग 200 सरकारी अस्पतालों में कार्यान्वित किया जा चुका है।
ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली (ओआरएस) को कार्यान्वित किया गया है, जहां रोगी अपनी लैब रिपोर्टो को देख सकते हैं, रक्त की उपलब्धता की जांच कर सकते हैं, ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं तथा ऑनलाइन पंजीकरण तथा डॉक्टर से समय ले सकते हैं। इस ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली का अब लगभग 140 सरकारी अस्पताल उपयोग कर रहे हैं।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के द्वारा लोकसभा में लिखित में उत्तर दिया गया।
(●) मानसिक स्वास्थ्य
अवसाद और अन्य मानसिक बीमारियों और इससे जुड़ी कैज्युलटियों से पीड़ित व्यक्तियों की संख्या का ब्यौरा केंद्रीय स्तर पर नहीं रखा जाता है। तथापि, सरकार ने देश में 12 राजयों में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) के जरिए एक राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण करवाया था। 26 दिसंबर, 2016 को जारी इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार आम मानसिक विकारों, गंभीर मानसिक विकृतियों तथा 18 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों में मद्यपान और नशीली पदार्थों के सेवन संबंधी विकारों (तंबाकू सेवन संबंधी विकार को छोड़कर) सहित मानसिक विकारों की व्याप्तता लगभग 10.6% है। इस सर्वेक्षण के मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:
· मानसिक रुग्णता की व्याप्तता शहरी महानगरों में ज्यादा है।
· मानसिक विकार अनेक गैर-संचारी विकृतियों के कारण और परिणाम दोनों से करीबी रूप से जुड़े हुए हैं।
· 40 में से लगभग 1 और 20 में से लगभग 1 व्यक्ति क्रमश: पूर्व अथवा वर्तमान अवसाद से गस्त होता है।
· न्यूरोसिस और तनाव संबंधी विकार 3.5% जनसंख्या को प्रभावित करते हैं और इनकी महिलाओं में ज्यादा होने की सूचना थी (पुरुषों की तुलना में लगभग दोगुनी)।
· आंकड़े यह दर्शाते हैं कि सर्वेक्षण की जाने वाली 0.9% जनसंख्या आत्महत्या के उच्च जोखिम पर थी।
· मुख्य अवसादात्मक विकारों से ग्रस्त लगभग 50% व्यक्तियों द्वारा अपने दैनिक कामकाज के निर्वहन में कठिनाइयों की सूचना थी।
भारत सरकार देश के 517 जिलों में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ कार्यान्वित कर रही है:
(i) जिला स्वास्थ्य परिचर्या प्रदानगी प्रणाली के विभिन्न स्तरों पर निवारण, संवर्धक और दीर्घावधिक सतत परिचर्या सहित मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना।
(ii) मानसिक स्वास्थ्य परिचर्या के लिए अवसंरचना, उपकरण तथा मानव संसाधन के संदर्भ में सांस्थानिक क्षमता का संवर्धन करना।
(iii) मानसिक स्वास्थ्य परिचर्या सेवाओं की प्रदानगी में सामुदायिक जागरूकता और भागीदारी को प्रोत्साहन देना।
(iv) अन्य संबद्ध कार्यक्रमों में मानसिक स्वास्थ्य के आधार को व्यापक बनाना।
देश में दक्ष मानसिक स्वास्थ्य व्यावसायिकों की अत्यंत कमी को पूरा करने के लिए सरकार एनएमएचपी के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञताओं में स्नातकोत्तर विभागों के सुदृढ़ीकरण/स्थापना और उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए कार्मिक शक्ति विकास योजनाएं कार्यान्वित कर रही हैं। आज की तारीख तक देश में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञताओं में 47 स्नातकोत्तर विभागों के सुदृढ़ीकरण/स्थापना और 25 उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए सहायता प्रदान की गई है।
मानसिक बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को बीमार कवर प्रदान करने के लिए अथवा मानसिक स्वास्थ्य कार्मिकों के लिए सरकार की कोई विशेष स्कीम नहीं है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के द्वारा लोकसभा में लिखित में उत्तर दिया गया।
(●) विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत भारत सरकार 30 चयनित स्वास्थ्य स्थितियों के लिए विशिष्ट रोग सहित 4डी अर्थात कमी, विकार और विकास में विलंबहेतु स्कूली बच्चों सहित 0-18 वर्ष की आयु समूह के सभी बच्चों की जांच हेतु वर्ष 2013 से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) चला रही है।
बाल स्वास्थ्य जांच सेवा प्रत्येक ब्लॉक में तैनात प्रतिबद्ध मोबाइल स्वास्थ्य टीम के माध्यम से प्रदान की जा रही है। इस कार्यक्रम के तहत कक्षा 1 से कक्षा 12 के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में नामित बच्चों की वर्ष में एक बार जांच की जाती है। ये दल आंगनवाड़ी केन्द्रों में 0-6 वर्ष आयु के बच्चों की वर्ष दो बार जांच करते हैं।
इन स्थितियों से ग्रस्त पहचाने गए बच्चों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सर्जरी सहित निःशुल्क उपचार प्रदान किया जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत रिपोर्टों की तिमाही समीक्षा, क्षेत्रीय दौरे व राज्य नोडल अधिकारियों के साथ आवधिक बैठकों के माध्यम से इस कार्यक्रम की नियमित निगरानी की जाती है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के द्वारा लोकसभा में लिखित में उत्तर दिया गया।
(●) विदेशों में अध्ययन हेतु स्क्रीनिंग टेस्ट
भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 की धारा 13 (4ख) के अनुसार, विदेशी चिकित्सा संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करने के इच्छुक भारतीय विद्यार्थियों को एमसीआई से पात्रता प्रमाण-पत्र प्राप्त करना होगा। इसके अतिरिक्त, विदेश संस्थान से चिकित्सा उपाधि प्राप्त एमसीआई या राज्य चिकित्सा परिषद के साथ स्थायी या अस्थायी रूप से पंजीकरण करवाने के इच्छुक व्यक्तियों को एक स्क्रीनिंग परीक्षा अर्थात् एफएमजीई पास करनी होगी।
मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि विदेशी चिकित्सा संस्थान/विश्वविद्यालय चिकित्सा शिक्षा की आवश्यकता को पूरा करने के लिए विद्यार्थी की शैक्षिक योग्यता का समुचित आकलन अथवा स्क्रीनिंग किए बिना भारतीय विद्यार्थियों को प्रवेश दे देते हैं जिसके परिणामस्वरूप कई विद्यार्थी स्क्रीनिंग परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाते हैं।
तदनुसार, एमसीआई ने केंद्रीय सरकार के पुर्वानुमोदन से स्क्रीनिंग परीक्षा विनियम, 2002 में संशोधन किए हैं तथा विदेशी चिकित्सा संस्थान विनियम, 2002 में स्नातक स्तरीय चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त करने के लिए पात्रता आवश्यकता को विदेश में चिकित्सा पाठ्यक्रम करने के लिए भारतीय विद्यार्थियों को राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश (एनईईटी) परीक्षा पास करना अनिवार्य बनाया गया है। एनईईटी परीक्षा का परिणाम ऐसे व्यक्तियों के लिए पात्रता प्रमाण-पत्र माना जाएगा, बशर्ते कि ऐसे व्यक्ति स्नातक चिकित्सा शिक्षा 1997 संबंधी विनियमों में निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करते हों।
उक्त विनियम के प्रावधान भविष्य में अर्थात् मई 2018 से कार्यान्वित किए जाएंगे। अत: एमसीआई से पात्रता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के द्वारा प्राथमिक चिकित्सा पाठ्यक्रम करने के लिए पहले से विदेश में गए हुए विद्यार्थियों को एनईईटी परीक्षा पास करने से छूट प्रदान की गई है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के द्वारा लोकसभा में लिखित में उत्तर दिया गया।
(●) यूजी और पीजी मेडिकल सीटों में वृद्धि
भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, 30 सितंबर, 2017 को राज्य चिकित्सा परिषदों/भारतीय चिकित्सा परिषद में कुल 10,41,395 एलोपैथिक डॉक्टर पंजीकृत हैं। यदि हम इनकी 80% उपलब्धता माने, तो अनुमान है कि सक्रिय सेवा के लिए लगभग 8.33 लाख डॉक्टर वास्तव में उपलब्ध हो सकते हैं। 1.33 बिलियन की वर्तमान जनसंख्या अनुमान के अनुसार यह संख्या डॉक्टरों की 1:1596 जनसंख्या अनुपात को दर्शाती है।
एलोपैथिक डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार ने विभिन्न कदम उठाए हैं। इन प्रयासों में निम्नलिखित शामिल हैं:-
(i) एमबीबीएस स्तर पर अधिकतम भर्ती क्षमता को 150 से बढ़ाकर 250 करना।
(ii) चिकित्सा कॉलेजों की स्थापना के लिए भूमि, संकाय, स्टॉफ, बिस्तर/बिस्तरों की संख्या और अन्य अवसंरचना की आवश्यकताओं के संबंध में मानदंडों में छूट देना।
(iii) नए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ करने / स्नातकोत्तर सीटें बढ़ाने के लिए राज्य सरकार के चिकित्सा कॉलेजों को सुदृढ़/उन्नत करना।
(iv) विद्यमान जिला/रेफरल अस्पतालों से संबद्ध नए चिकित्सा कॉलेजों की स्थापना करना।
(v) एमबीबीएस सीटें बढ़ाने के लिए वर्तमान राज्य सरकारी / केंद्र सरकारी चिकित्सा कॉलेजों को सुदृढ़ / उन्नत करना।
(vi) देश भर में चिकित्सा कॉलेजों में सभी एमडी / एमएस विषयों के लिए छात्रों की तुलना में अध्यापकों का अनुपात 1:1 से बढ़ाकर 1:2 और सेंवदनाहरण विज्ञान, न्यायिक औषधि, रेडियोथैरेपी,चिकित्सा आंकोलॉजी, शल्य चिकित्सा आंकोलॉजी और मनश्चिकित्सा विज्ञान के विषयों में 1:1 से बढ़ाकर 1:3 कर दी गई है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक निजी सहायता प्राप्त सरकारी चिकित्सा कॉलेजों में प्रोफेसर के लिए सभी नैदानिक विषयों में अध्यापक:छात्र अनुपात 1:2 से बढ़ाकर 1:3 और जहां सहायक प्रोफेसर यूनिट के अध्यक्ष हैं, वहां पर अनुपात 1:1 से बढ़ाकर 1:2 कर दिया गया है। इससे देश में विशेषज्ञों की संख्या में वृद्धि होगी।
(vii) चिकित्सा कॉलेजों में अध्यापकों/डीन/प्रिंसिपल/निदेशक के पदों पर नियुक्ति/विस्तार/ पुन: रोजगार के लिए आयु-सीमा 65 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष करना।
(viii) संकाय की कमी को पूरा करने के लिए संकाय के रूप में नियुक्ति हेतु डीएनबी अर्हता और विदेशी अर्हता को मान्यता दी गई है।
उक्त उल्लिखित उपायों को कार्यान्वित करने के लिए केंद्र सरकार प्रतिवर्ष स्नातक एवं स्नातकोत्तर सीटों में वृद्धि करती है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के द्वारा लोकसभा में लिखित में उत्तर दिया गया।
(●) क्षय रोग के उन्मूलन हेतु राष्ट्रीय कार्यनीतिक योजना
सरकार ने 2012-2017 अवधि के दौरान देश में क्षय रोग के मामलों को नियोजित करने के लिए राष्ट्रीय कार्यनीतिगत योजना (एनएसपी) प्रारंभ की थी। एनएसपी (2012-2017) के मुख्य घटक इस प्रकार हैं:
(क) आधारभूत डॉट्स सेवाओं की गुणवतता का सुदृढ़ीकरण एवं उसमें सुधार लाना।
(ख) क्षेत्रीय स्तर पर उन्नत त्वरित नैदानिकों की तैनाती।
(ग) सभी परिचर्या प्रदाताओं को इस कार्य में लगाने के लिए प्रयासों का विस्तार करना।
(घ) औषधि प्रतिरोधी क्षयरोग के मामलों के नैदानिकों एवं उपचार का विस्तार करना।
(ङ) संप्रेषण, आउटरीच एचं सामाजिक एकजुटता में सुधार लाना।
(च) विकास के लिए अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा उन्नत उपायों एवं कार्यनीतियों को कार्यान्वित करना।
(छ) क्षय रोग निगरानी के सुदृढ़ीकरण हेतु सूचना संप्रेषण प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का उपयोग करना।
क्षय रोग उन्मूलन हेतु राष्ट्रीय कार्यनीतिक योजना (एनएसपी 2017-25) का कार्यान्वयन जनवरी, 2017 में प्रारंभ कर दिया गया था। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 2770.91 करोड़ रु• की निधियां आवंटित की गई हैं, जिसमें नकद अंतरण एवं समाज कल्याण योजनाओं के लिए निधियां भी शामिल हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ग्लोबल रिपोर्ट 2017 के अनुसार, भारत में एमडीआर-आरआर के लगभग 1,47,000 मामले पाए गए हैं, जो कि कुल ग्लोबल मामलों का 24% है।
फिर भी इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में टीबी के मामलों की संख्या वर्ष 2015 में प्रतिवर्ष प्रति लाख की आबादी पर 217 से घटकर वर्ष 2016 में प्रतिवर्ष प्रति लाख आबादी पर 211 रह गई है।
निक्षय पोर्टल एवं सक्रिय मामला परिणाम योजना प्रारंभ होने के पश्चात् प्राइवेट प्रैक्टिशनरों द्वारा रिपोर्ट किए गए मामलों की उच्चतर संख्या को क्षयरोग मामला परिणाम के राष्ट्रीय आंकड़ों में शामिल किया गया था, जिस कारण क्षयरोग मामलों के आंकड़ों में वृद्धि हुई।
उपर्युक्त के अतिरिक्त, क्षयरोग मामलों में वृद्धि के लिए उन विभिन्न सामाजिक निर्धारकों को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है, जो क्षय रोग संक्रमण का फैलना जारी रखते हैं।
गरीबी, कुपोषण, भीड़भाड़ तथा घनी बस्तियों में रहना, वायु प्रदूषण, मद्यपान, धूम्रपान इत्यादि जैसे संक्रमण को टीबी रोग में परिवर्तित करने की संभावना में बढ़ोत्तरी करते हैं।
सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्यौरा निम्नवत् है:
· टीबी के सभी मरीजों की शीघ्र पहचान करना, गुणवत्ता आश्वासित औषधियों एवं उपचार रेजीमेंस के साथ तुरंत उपचार।
· अनुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए समुचित रोगी सहायता प्रणालियां।
· निजी क्षेत्र में रोगी परिचर्या की मांग करना।
· सक्रिय मामला परिणाम सहित रोकथाम कार्यनीतियां तथा
· उच्च जोखिम/उपेक्षित आबादी में संपर्क का पता लगाना।
· वायुजनित संक्रमण नियंत्रण।
· सामाजिक निर्धारकों के निवारण हेतु बहु-क्षेत्रीय कार्रवाई।
· समाज के सभी समुदायों के बीच टीबी के संबंध में जागरूकता को बढ़ावा देने हेतु समर्थन, संप्रेषण तथा सामाजिक एकजुटता क्रियाकलाप।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के द्वारा लोकसभा में लिखित में उत्तर दिया गया।