नई दिल्ली, 13 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(●) नैदानिक परीक्षणों के परिणामों को सार्वजनिक करना
नैदानिक जांचों को भारत की पब्लिक रजिस्ट्री अर्थात् नैदानिक जांच रजिस्ट्री (www.ctri,nic.in) पर रजिस्टर कराना अनिवार्य है। वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना के अनुसार भारतीय नैदानिक जांच रजिस्ट्री यह सुनिश्चित करने के लिए कि सीटीआरआई में पंजीकृत सभी जांचों के परिणामों को जनता के लिए उपलब्ध कराया जाता है, डब्ल्यूएचओ-आईसीटीआरपी के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। सीटीआरआई का आयोजन भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा किया जाता है जो जांच पूरी होने पर इसके प्रायोजकों/सह-प्रायोजकों के लिए उसके परिणामों का खुलासा करना अनिवार्य करने हेतु प्रतिबद्ध है।
सीटीआरआई वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना के अनुसार, 1 अप्रैल, 2018 से भारतीय नैदानिक जांच रजिस्ट्री (सीटीआरआई) केवल प्रत्याशित रूप से ही अर्थात् जहां अभी तक प्रथम मरीज को नामांकित नहीं किया गया हैं, नैदानिक अध्ययनों को स्वीकार करेगी एवं उन्हें रजिस्टर करेगी। फिर भी, चालू वर्ष में 31 मार्च, 2018 तक भर्ती के लिए बंद तथा पूरी हो चुकी जांचों को भी पंजीकरण हेतु स्वीकार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के द्वारा राज्य सभा में लिखित में उत्तर दिया गया।
(●) ब्लॉक/पंचायत स्तर पर डायलिसिस इकाइयां
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत सरकारी निजी भागीदारी प्रणाली में राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम की शुरुआत करने के संबंध में केन्द्रीय बजट 2016-17 में घोषणा के अनुसरण में, जिला/उप-जिला स्तर पर डायलिसिस यूनिट की स्थापना हेतु,“प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम (पीएमएनडीटी)” को 2016 में शुरु किया गया था। पीएमएनडीपी हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश http://www.nhsrcindia.org/sites/default/files/practice_fine/TENDER%20ENQUIRY%20DOCUMENT.pdfपर उपलब्ध हैं।
वित्त वर्ष 2017-18 के लिए पीएमएनडीपी के तहत, राज्य कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (एसपीआईपी) अनुमोदन का विवरण अनुलग्नक में दिया गया है। एनएचएम के मानदंडों के अनुसार पूर्वोत्तर व पर्वतीय राज्यों में 90:10 के अनुपात को छोड़कर, अन्य राज्यों के लिए केन्द्र व राज्य के बीच 60:40 के अनुपात पर लागत साझा करते हुए वित्तीय सहायता दी जाती है।
निजी प्रदाताओंसे प्रस्ताव हेतु मॉडल अनुरोध (आरएफपी) सहित “प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम”के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। दिशा-निर्देशों के अनुसार,निजी भागीदार द्वारा चिकित्सीय मानव संसाधन,रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) जल संयंत्र अवसंरचना सहित डायलिसिस मशीन, डायलाईजर तथा उपभोज्य वस्तुएं उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है जबकि जिला अस्पतालों में स्थान, बिजली और जल आपूर्ति राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। एनएचएम के तहत राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों को निर्धन लोगों के लिए नि:शुल्क डायलिसिस सेवाओं के प्रावधान हेतु सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
वित्त वर्ष 2017-18 के लिए पीएमएनडीपी के तहत राज्य कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (एसपीआईपी) अनुमोदन का विवरण
लाख रू. में
क्र.सं.
राज्य
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम, एसपीआईपीअनुमोदन
●क. उच्च फोकस राज्य
1
बिहार
1600.00
2
छत्तीसगढ़
0.00
3
हिमाचल प्रदेश
200.00
4
जम्मू और कश्मीर
200.00
5
झारखंड
50.40
6
मध्य प्रदेश
571.44
7
ओडिशा
358.45
8
राजस्थान
1000.00
9
उत्तर प्रदेश
0.00
10
उत्तराखंड
0.00
उप कुल
3980.29
●ख. पूर्वोत्तर राज्य
11
अरुणाचल प्रदेश
0.00
12
असम
500.00
13
मणिपुर
300.00
14
मेघालय
0.00
15
मिजोरम
0.00
16
नगालैंड
46.74
17
सिक्किम
152.96
18
त्रिपुरा
0.00
उप कुल
999.70
●ग. गैर-उच्च फोकस राज्य
19
आंध्र प्रदेश
1129.92
20
गोवा
0.00
21
गुजरात
2162.42
22
हरियाणा
0.00
23
कर्नाटक
0.00
24
केरल
0.00
25
महाराष्ट्र
0.00
26
पंजाब
0.00
27
तमिलनाडु
0.00
28
तेलंगाना
400.00
29
पश्चिम बंगाल
0.00
उप कुल
3692.34
●घ. छोटे राज्य/संघ राज्य क्षेत्र
30
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
0.00
31
चंडीगढ़
0.00
32
दादरा और नगर हवेली
0.00
33
दमन और दीव
0.00
34
दिल्ली
0.00
35
लक्षद्वीप
0.00
36
पुद्दुचेरी
99.00
उप कुल
99.00
कुल योग
8771.33
• ध्यान दें:
1. उपर्युक्त आंकड़े राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों से सूचित एफएमआर के अनुसार है।
2. एसपीआईपी से आशय राज्य कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के द्वारा राज्य सभा में लिखित में उत्तर दिया गया।
(●) मासिक धर्म के दौरान स्वास्थ्य में सुधार के लिए पहल
वर्ष 2011 से ग्रामीण किशोरियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता योजना कार्यान्वित की जा रही है, जिन्हें मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में पर्याप्त ज्ञान एवं जानकारी के साथ राजसहायता-प्राप्त दरों पर सेनेटरी नेपकिन्स उपलब्ध कराए जाते हैं।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के द्वारा राज्य सभा में लिखित में उत्तर दिया गया।
(●) स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र में अन्वेषकों/प्रवर्तकों हेतु प्रोत्साहन
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने 2 जुलाई, 2015 को एक राष्ट्रीय नवोन्मेष पहल शुरू की थी । राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिचर्या नवोन्मेष सम्मेलन, शिमला में एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिचर्या नवोन्मेष पोर्टल शुरू किया गया था। यह पोर्टल नवोन्मेषकों की जन स्वास्थ्य परिचर्या में नवोन्मेषों को दर्शाने में मदद करता है (www.nhinp.org) । यह उत्तम परिपाटियों और ऐसे नवोन्मेषों के संग्रह और प्रचार-प्रसार में मदद करने हेतु पब्लिक डोमेन में एक मंच के रूप में कार्य करती है जो अनुकरणीय हो। यह पोर्टल नवोन्मेषों को स्वास्थ्य परिचर्या की मुख्यधारा में एकीकृत करने के लिए एक गेट-वे के रूप में कार्य करता है और इसमें उत्पादों, प्रक्रियाओं और कार्यक्रमों के सफल नवोन्मेषों में तेजी लाकर स्वास्थ्य परिचर्या प्रर्दानगी में परिवर्तनकारी सुधार लाने की क्षमता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिचर्या नवोन्मेष पोर्टल भारत के सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों नवोन्मेष कार्यक्रम डिजाइन, प्रेक्टिस, तकनीकी समाधान और उत्पादों के पूल-इन और प्रदर्शन हेतु एक प्रयास है। इन समाधानों ने विशेष संदर्भों में स्वास्थ्य प्रणालियों की चुनौतियों से निपटने हेतु क्षमता दर्शाई है अथवा भविष्य के लिए आश्वासन दिया है। यह मंच स्वास्थ्य उद्यमियों के लिए प्रेरणा के रूप में कार्य करता है और स्वास्थ्य परिचर्या की अत्यधिक आवश्यकता वाले व्यक्त्यिों को कवर करने हेतु नए कार्यक्रम डिजाइन, उपकरण और दृष्टिकोण प्रदान करता है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय नवोन्मेष प्रतिष्ठान, अहमदाबाद के साथ हर्बल चिकित्सकों के दावों की वैधता हेतु अनुसंधान में सहायता करता है।
जैव-प्रौद्यौगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) के जरिए जैव-प्रौद्योगिकी विभाग, स्वास्थ्य परिचर्या क्षेत्र में कार्यरत नवोन्मेषों/प्रवर्तकों को बढ़ावा और प्रोत्साहन देता है। संकल्पना को सिद्ध करने हेतु विचार और स्वास्थ्य परिचर्या के क्षेत्र में उत्पाद विकास के लिए सहायता देने के लिए स्कीमें विद्यमान हैं। प्रमुख स्कीमें बॉयोटेक इग्नीशन ग्रांट लघु व्यवसाय नवोन्मेष अनुसंधान पहल, बॉयटेक्नोलॉजी उद्योग भागीदारी कार्यक्रम, सामाजिक स्वास्थ्य और जैव-प्रौद्योगिकी एसीई निधि के लिए वहनीय एवं संगत उत्पादों के एक सामजिक नवोन्मेष कार्यक्रम (स्पर्श)।
विभिन्न कार्यक्रमों हेतु अनुप्रयोज्य नवोन्मेषकों की सूची उपलब्ध है और वित्त पोषण सहायता प्राप्त करने वाले सफल नवोन्मेषकों की सूची भी उपलब्ध है।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने स्वास्थ्य परिचर्या सहित जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवोन्मेषकों/प्रवर्तकों को सहायता और प्रोत्साहन देने के अधिदेश के साथ बीआईआरएसी में ‘मेक इन इंडिया के लिए जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग सुविधा एकक’ का गठन किया है। यह एकक इस क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न अवसरों के बारे में नवोन्मेषकों में जागरुकता भी फैलाती है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के द्वारा राज्य सभा में लिखित में उत्तर दिया गया।