--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
●नक्सलवाद अब खत्मे की कगार पर - अमित शाह
● भारत “लाल आतंक” को खत्म करने के कितना करीब है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज कहा कि देश से माओवादी खतरे का साया हट गया है और इसका आखिरी गढ़, छत्तीसगढ़ का बस्तर, अब "विकास के रास्ते" पर आगे बढ़ रहा है। माओवादी हिंसा को खत्म करने के लिए सरकार की समय सीमा 31 मार्च है, जिसके पहले लोकसभा में इस विषय पर चर्चा हुई। चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने कहा, "देश में अब नक्सलवाद खत्म होने की कगार पर है।"
2010 में माओवादियों द्वारा किए गए जानलेवा दंतेवाड़ा हमले के बाद - जिसमें सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे - तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नक्सलवादी-माओवादी आंदोलन को "हमारे देश के सामने मौजूद सबसे बड़ा आंतरिक सुरक्षा खतरा" बताया था। सोलह साल बाद, भारत के खनिज-संपन्न भीतरी इलाकों से 'लाल आतंक' का साया काफी हद तक छंट चुका है।
उन्होंने कहा, "आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है। बस्तर के हर एक गाँव में स्कूल खोलने के लिए एक अभियान चलाया गया। इस इलाके के हर गाँव में राशन की दुकान खोलने के लिए एक मुहिम शुरू की गई। हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं, और अब उन्हें पाँच किलोग्राम अनाज मिल रहा है।"
उन्होंने कहा, "बस्तर के लोग इसलिए पीछे रह गए क्योंकि इस इलाके पर 'लाल आतंक' का साया मंडरा रहा था; इसीलिए विकास उन तक नहीं पहुँच पाया।
मोदी सरकार की नक्सलवाद के खात्मे को लेकर दी गई डेडलाइन कल पूरी हो रही है। इससे पहले आज गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा में हिस्सा लिया। शाह इस दौरान कुख्यात नक्सलियों के अंत और उनके मुख्यधारा में लौटने, सुरक्षा बलों की भूमिका और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों की समीक्षा भी की।
अमित शाह ने एक साल पहले घोषणा किया था कि 31 मार्च 2026 को देश से नक्सलवाद के अंत की तारीख होगी। इस पर छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना, गढ़चिरौली, बालाघाट जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों के साहस और पराक्रम ने काफी सुधार लाया है।
शाह ने लोकसभा में कहा कि सबसे पहले मैं रेड कॉरिडोर के नाम से पहचाने जाने वाले पूरे क्षेत्र, जिसमें 12 राज्य और 70 प्रतिशत का भूभाग शामिल थे, उसमें रह रही जनसंख्या की तरफ से सदन को धन्यवाद देना चाहता हूं।
गृह मंत्री ने कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग-लगभग समाप्त हो चुका है। बस्तर के अंदर हर गांव में स्कूल बनाने की मुहिम चली। बस्तर के अंदर हर गांव में राशन की दुकान खोलने की मुहिम चली। उन्होंने कहा कि आज वामपंथ उग्रवाद समाप्त हो रहा है, उसमें जनता का भी साथ है और जो जवान शहीद हुए जिन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबकुछ बलिदान कर दिया। इस विचारधारा का विकास से कोई ताल्लुक नहीं। इनका कहना है कि सत्ता बंदूक की नोंक से निकलती है।
शाह ने कहा कि जैसे ही रूस में कम्युनिस्ट सरकार बनी, उसी के प्रभाव और समर्थन से 1925 में भारत में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) का गठन हुआ और दुनिया भर में कम्युनिस्ट पार्टियों की स्थापना की गई। उन्होंने बताया कि 1964 में सीपीआई(एम) बनी और 1969 में विशेष रूप से संसदीय राजनीति का विरोध करने के लिए सीपीआई(एमएल) का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य न तो विकास का शून्य पैदा करना था और न ही अधिकारों की रक्षा करना, बल्कि संसदीय राजनीति का विरोध करते हुए सशस्त्र क्रांति को अंजाम देना था।
2010 में, नक्सलवादी-माओवादी आंदोलन को भारत के लिए सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा खतरा बताया गया था। 2026 तक, वामपंथी उग्रवाद अपने पहले के रूप का महज़ एक साया बनकर रह गया है। 2024 में, गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि माओवादी आंदोलन अपने अंतिम चरण में है, और "31 मार्च, 2026 तक, देश से सशस्त्र नक्सलवाद का पूरी तरह से सफाया कर दिया जाएगा।"
आज वह साया हट गया है, और बस्तर अब विकास के रास्ते पर है।" मैंने बस्तर में कई बार सार्वजनिक मंचों से कही है कि नकस्ली अपने हथियार डाल दें, और सरकार आपके पुनर्वास को सुनिश्चित करेगी। हालाँकि, वे हथियार डालने से मना करते हैं, हमारी सरकार की नीति स्पष्ट है -हम उन लोगों से बातचीत के लिए तैयार हैं जो अपने हथियार डाल देते हैं। जो लोग हिंसा का रास्ता चुनेंगे, उन्हें कड़ा जवाब दिया जाएगा।"
हालाँकि, इस चर्चा ने भाजपा और कांग्रेस के बीच एक और मोर्चा खोल दिया, जिसमें सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों ने देश में माओवाद के फैलने के लिए कांग्रेस के 60 साल के शासन को दोषी ठहराया।