दुनियां की थाती हैं मां गंगा, इनको स्वच्छ रखना जरूरी - प्रो विश्वंभरनाथ मिश्र



--हरेंद्र शुक्ला,
वाराणसी - उत्तर प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ संकटमोचन फाउंडेशन एवं मदर फार मदर्स के संयुक्त तत्वावधान में विश्व जल दिवस पर तुलसीघाट पर बनी विशाल मानव श्रृंखला

मां गंगा की स्वच्छता को लेकर बीते पांच दशक से युद्ध स्तर पर अभियान चलाने वाली संस्था संकटमोचन फाउंडेशन एवं मदर फार मदर्स के संयुक्त तत्वावधान में विश्व जल दिवस के अवसर पर मां गंगा की स्वच्छता और जल संरक्षण को लेकर वाराणसी के तुलसीघाट पर बुधवार की सुबह विशाल मानव श्रृंखला बनायी गयी। इस अवसर पर संकटमोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो विश्वंभरनाथ मिश्र एवं मदर फार मदर्स की अध्यक्षा आभा मिश्रा के नेतृत्व में मानव श्रृंखला में शामिल लोगों ने मां गंगा की स्वच्छता और जल संरक्षण की शपथ ली।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए संकटमोचन मंदिर के महंत एवं संकटमोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा कि मां गंगा दुनियां की थाती हैं इनको हर हाल में प्रदूषण से मुक्ति दिलाना हर नागरिकों का कर्तव्य है। काशी में गंगा को प्रदूषण से मुक्ति के लिए फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2000 से शुरू हुआ मानव श्रृंखला आंदोलन मां गंगा की स्वच्छता प्रदान करने तक चलती रहेगी। प्रो मिश्र ने कहा कि मां गंगा दुनिया की आस्था हैं पापों को हरने वाली हैं। गंगा की सेहत को ठीक रखने की जिम्मेदारी हम सभी पर है। प्रकृति हमे स्वच्छ जल देती है लेकिन अनियोजित विकास इसे गंदा कर रही है। उन्होंने कहा की यह दुख है कि देश की सरकारें खरबों रुपए की परियोजनाओं को गंगा की स्वच्छता के लिए लगाया लेकिन आज भी गंगा मैली की मैली ही है, बिना शोधित मलजल आज भी सीधे गंगा में गिराया जा रहा है यह दुखद है। संकटमोचन फाउंडेशन का आंदोलन गंगा में एक भी बूंद मलजल गिरने से रोकने तक चलता रहेगा।

मदर फार मदर्स की अध्यक्षा आभा मिश्रा ने कहा कि पानी जीवन के सभी पहलुओं के लिए अहम है। यह मानव स्वास्थ्य और कल्याण, ऊर्जा और खाद्य उत्पादन, स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र, जलवायु अनुकूलन, लैंगिक समानता और स्वास्थ्य आदि के लिए आवश्यक है। पानी सतत विकास के मूल में है। सुरक्षित पानी, स्वच्छता और स्वच्छता तक पहुंच एक मानव अधिकार है - हर किसी के स्वास्थ्य, गरिमा और समृद्धि के लिए अहम है। फिर भी, दुनिया भर में अरबों लोगों के पास सुरक्षित रूप से प्रबंधित पेयजल की कमी है।

साहित्यकार डॉ जितेंद्रनाथ मिश्र ने कहा कि जल के बिना जीवन की परिकल्पना नहीं की जा सकती। संपूर्णानंद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि तुलसीदास कृत श्रीरामचरित मानस में जल के महत्व को रेखांकित किया गया है। जीव और जीवन के लिए जल का संरक्षण जरूरी है।

इस अवसर पर मैत्री भवन के निदेशक फादर फिलिप डेनिस, बीएचयू विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ प्रो एन के दिवेदी, डा अनूप मिश्र आदि मौजूद रहे।

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