प्रेस को संविधान में चौथे स्तंभ का दर्जा दिया जाए: प्रदीप फुटेला



रुद्रपुर - उत्तराखंड
इंडिया इनसाइड न्यूज।

गोवा में आयोजित सीनियर जर्नलिस्ट फेडरेशन ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में पत्रकारों की सुरक्षा, पेंशन और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर मंथन किया गया। देशभर से आए वरिष्ठ पत्रकारों ने एक स्वर में पत्रकार हितों की रक्षा के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने की मांग की।

बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप फुटेला ने कहा कि प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, लेकिन भारतीय संविधान में इसे औपचारिक रूप से यह दर्जा प्राप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार तो दिया गया है, परन्तु पत्रकारों की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और अधिकारों को लेकर स्पष्ट प्रावधानों का अभाव है।

फुटेला ने कहा कि पत्रकार समाज और लोकतंत्र की मजबूती में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन कई बार उन्हें जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। ऐसे में देशभर में प्रभावी पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाना जरूरी है, ताकि पत्रकार निर्भय होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।

उन्होंने वरिष्ठ पत्रकारों की पेंशन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उत्तराखंड में वर्तमान में मात्र 8 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है, जो आज की परिस्थितियों में बेहद कम है। उन्होंने इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने और पेंशन के लिए आय सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये वार्षिक करने की मांग की।

इसके अलावा उन्होंने वरिष्ठ पत्रकारों के लिए आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने, डिजिटल उपकरण जैसे लैपटॉप, कंप्यूटर और मोबाइल खरीदने पर 50 प्रतिशत अनुदान देने, आवास हेतु बिना ब्याज ऋण की व्यवस्था करने तथा निरस्त मान्यताओं को पुनः बहाल करने की मांग रखी। साथ ही रेल यात्रा में पूर्व की तरह 50 प्रतिशत छूट बहाल करने का भी मुद्दा उठाया गया।

बैठक में उपस्थित पत्रकारों ने उम्मीद जताई कि पारित प्रस्ताव सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचेंगे और पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान, लोकतंत्र की मजबूती से सीधे जुड़ा हुआ विषय है।

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