तमिल भाषा के साहित्यकार सुब्रह्मण्यम भारती की जयंती अब भाषा दिवस के रूप में मनाई जाएगी



--हरेंद्र शुक्ला,
वाराणसी-उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

तमिल भाषा के महान साहित्यकार व राष्ट्रकवि सुब्रह्मण्यम भारती की जयंती अब भाषा दिवस के रूप में मनाया जाएगा। शुक्रवार को वाराणसी के हनुमान घाट पर सुब्रह्मण्यम भारती के भांजे और परिजनों से मुलाकात के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसकी घोषणा की। महाकवि सुब्रह्मण्यम भारती की जयंती 11 दिसंबर को मनाई जाती है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री हनुमान घाट पहुंचे जहां पूर्व राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन द्वारा स्थापित सुब्रह्मण्यम भारती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और नमन किया। वहीं, हनुमान घाट स्थित महाकवि के 100 साल पुराने घर में उनके परिजनों से मुलाकात की।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारी अब तक के सबसे महान तमिल साहित्यकारों में से एक, महाकवि भारती का काशी हनुमान घाट स्थित घर ज्ञान का केंद्र और पावन तीर्थ है। सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण पर सुब्रह्मण्यम भारती की रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उनके व्यक्त्वि पर काशी ने अमिट प्रभाव छोड़ी है। महाकवि का जीवन, विचार और लेखन हमारी आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। महान संस्कृतियों के बीच एकता और समानता का ही उत्सव है और संस्कृतियों और संस्कारों के संगमम् के तहत ही आज काशी में महाकवि सुब्रह्मण्यम भारती के 96 वर्षीय भांजे के. वी. कृष्णन व उनके परिवार से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

हाल ही में भाषा समिति ने 11 दिसंबर की तारीख को भारतीय भाषा दिवस या भारतीय भाषा उत्सव के रूप में प्रस्तावित किया था। इसके बाद यूजीसी ने सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को 11 दिसंबर को ‘भारतीय भाषा दिवस’ मनाने का निर्देश दिया। ये संस्थान अपने पड़ोसी संस्थानों/महाविद्यालयों/विद्यालयों के छात्रों को भी उत्सव में आमंत्रित कर सकते हैं। जिसके उद्देश्य निम्न हैं।

• विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं के बारे में जानकारी देना।

• लोगों को कुछ और भारतीय भाषाएं सीखने के लिए प्रोत्साहित करना।

• संस्कृति, कला आदि में विविधता का उत्सव मनाने के लिए और लोगों को भारतीय भाषाओं के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और अखंडता का अनुभव कराना।

• यह दिखाना कि भाषा सीखना कैसे एक मनोरंजक आनंनदायी अनुभव हो सकता है।

• राष्ट्र के विकास और 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' के लक्ष्य को साकार करने के लिए भारतीय भाषाओं की आवश्यता को रेखांकित करना।

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