जूता सुंघाने और झाड़-फूंक से नहीं दूर होती मिर्गी, समय पर इलाज कराना जरूरी



--हरेंद्र शुक्ला,
वाराणसी-उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक एवं न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो विजयनाथ मिश्रा मिर्गी रोग जागरूकता के लिए छुट्टी के दिनों में भी छानते है ग्रामीण इलाकों की खाक

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय चिकित्सा विज्ञान संस्थान के न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर विजय नाथ मिश्रा देश के पहले ऐसे चिकित्सक हैं जिन्होंने मिर्गी रोग से निजात और इसके इलाज में फैली अंधविश्वास के विरुद्ध खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में अभियान छेड़ रखा है। यही वजह है कि प्रो. विजय नाथ मिश्रा छुट्टी के दिनों में भी अपनी टीम के साथ ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा शिविर के माध्यम से मिर्गी रोग के प्रति फैली अंधविश्वास को तोड़ने के साथ ही मरीजों का इलाज कर नया जीवन दे रहे हैं।

इस बाबत प्रो. विजय नाथ मिश्रा कहते हैं कि देश में जागरूकता की कमी और उपचार में देरी से मिर्गी का मर्ज बढ़ रहा है। इसकी बड़ी वजह अंधविश्वास भी है। विश्व में मिर्गी के मरीजों की संख्या सात करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है। जबकि भारत में मरीजों की संख्या करीब 1.20 करोड़ है, हर साल एक लाख मरीज बढ़ रहे हैं। जागरूकता के अभाव में ग्रामीण क्षेत्र में सबसे ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं। बड़ी संख्या में मरीज डॉक्टर तक पहुंचते ही नहीं है और समय पर सही उपचार कराने की जगह अंधविश्वास के जंजीर में बंधकर जूता सुंघाने और झाड़-फूंक कराने के कारण मर्ज को बढ़ा लेते हैं। देश में हर साल 17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है। इसके माध्यम से पीड़ितों व परिजनों को जागरूक किया जाता है।

● यह बरतें सावधानी, लाइलाज नहीं यह बीमारी

पर्याप्त नींद लें, तेज रोशनी से बचें, शराब व नशीली दवाओं का सेवन न करें, वाहन चलाते समय हेलमेट का इस्तेमाल अवश्य करें, टीवी और कंप्यूटर के आगे ज्यादा देर तक नहीं बैठें, फास्ट फूड खाने से बचें, हरी एवं पत्तेदार सब्जियां अच्छे से धोकर खाएं।

बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर विजय नाथ मिश्रा ने बताया कि मिर्गी लाइलाज नहीं है, बल्कि दवा से इसका इलाज संभव है। इलाज में देरी से बीमारी जानलेवा बन रही है। लक्षण दिखने पर उपचार शुरू करें। मिर्गी से ग्रसित व्यक्ति को कभी भी दौरा पड़ सकता है। उसे अकेले कभी नहीं छोड़ना चाहिए। चार से पांच माह दवा का सेवन और तनाव मुक्त रहने से बीमारी से जीत सकते हैं।

● मरीजों को डॉक्टरों के पास ले जाने की जरूरत

इस रोग से पीड़ित हर व्यक्ति की परेशानी अलग-अलग हो सकती है। विकासशील देशों में तीन चौथाई लोगों को आवश्यक उपचार नहीं मिल पाता है। लोगों को इसे समझने की जरूरत है और मरीजों को डॉक्टरों के पास ले जाने की जरूरत है।

● किसी भी उम्र में हो सकती है बीमारी

वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. कपिल के सिंघल ने बताया कि यह रोग बच्चे के पैदा होने से लेकर किसी भी उम्र में हो सकता है। दिमाग में इसका ट्यूमर कभी भी पनप सकता है। ट्यूमर के अलावा किसी हादसे में ब्रेन हैमरेज होने के बाद भी यह रोग हो सकता है। अधिकांश लोगों को नहीं पता कि रोग कई प्रकार का होता है।

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