माता पहली शिक्षक होती हैः प्रो. कमलाकर त्रिपाठी



वाराणसी-उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के के.एन. उडुप्पा प्रेक्षागृह में आज पूर्वान्ह शिक्षक दिवस समारोह आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक पदमश्री प्रो. कमलाकर त्रिपाठी थे, अध्यक्षता बीएचयू के कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त 41 शिक्षको को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

अपने उदबोधन में प्रो. कमलाकर त्रिपाठी ने कहा कि यह विश्वविद्यालय उनके अध्यापकों का है जिन्होने यहाँ तपस्या की, उडुप्पा जी जैसे अनेक संत स्वरुप शिक्षको ने यहाँ अपनी सेवाएँ दी। उन्होने कहा कि शिक्षक मन की पवित्रता से कार्य करते है वे कभी भी सेवानिवृत्त नहीं होते है। प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि माता हमारी पहली शिक्षक होती है। हम सभी सौभाग्यशाली है कि हमे यहाँ काम करने का अवसर मिला।

अपने अध्यक्षीय उदबोधन में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने कहा कि शिक्षकों का सामाजिक उत्थान में जो योगदान होता है उसे समाज को ठीक से बताना चाहिए। मै अपने कई शिक्षको की वजह से आज यहाँ तक पहुॅचा हूँ, शिक्षकों का योगदान एवं मार्गदर्शन अनन्त तक होता है। प्रो. जैन ने कहा कि किसी भी संस्था के लिए शिक्षक रीढ़ की हड्डी के समान होते है। अमुक संस्था के शिक्षकों में कितनी योग्यता एवं संस्कार है इसी पर संस्था का विकास निर्भर रहता है।

उन्होने कहा कि हमे सोचना चाहिए कि क्या हम शिक्षक के रुप में अपना दायित्व, निष्ठा समर्पण एवं इमानदारी से निर्वहन कर पा रहे है। हमें यह भी सोचना चाहिए कि हम विश्वविद्यालय के वातावरण एवं व्यवस्था को बेहतर बनाने में कितना योगदान दे सकते है।

कार्यक्रम के आरम्भ में स्वागत सम्बोधन कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह ने दिया। रेक्टर प्रो. वी.के. शुक्ला ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया। प्रो. महेन्द्र कुमार सिंह एवं प्रो. विद्योत्तमा मिश्रा ने सेवानिवृत्त शिक्षको की ओर से अपने विचार व्यक्त किये एवं अनुभव साझा किये। कार्यक्रम का संचालन हिन्दी विभाग के प्रो. नीरज खरे तथा धन्यवाद ज्ञापन छात्र अधिष्ठाता प्रो. अनुपम कुमार नेमा ने दिया।

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