--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
रेलवे के साथ सैलून शब्द सुनते ही मन में किसी वीआईपी के निरीक्षण की फीलिंग आती है लेकिन अब रेलवे सैलून की सुविधा खास के साथ-साथ आम लोगों को भी देने की तैयारी में है। रेल की सवारी है सबसे न्यारी इस स्लोगन को भारतीय रेल चरितार्थ करने में जुटा है और अब रेलवे सैलून आम लोगों के लिये भी उपलब्ध होंगे।
सैलून जिसका अर्थ होता है एक छोटा केबिन। इस शब्द की शुरुआत अंग्रेजों ने की थी। आजादी के पहले जिस छोटे केविन सैलून की शुरुआत हुई थी, तब इसका इस्तेमाल उस समय के अधिकारी और गवर्नर करते थे। इससे एक जगह से दूसरे जगह जा कर लोग विश्राम भी करते थे। आज़ादी के बाद इस सैलून का इस्तेमाल रेल मंत्री, और रेलवे बोर्ड के चेयरमेन, जीएम और उच्च अधिकारी करने लगे खास कर इसका इस्तेमाल जांच के लिये किया जाता रहा है, मगर अब रेलवे ने इसे आम लोगों के लिये उपलब्ध कराया है।
इस सैलून के संबंध मे जानकारी देते हुए पटना जंक्शन के निदेशक निलेश कुमार ने बताया कि सैलून की खासियत ये है कि इसमें नहाने के लिये लग्जरी बाथरुम, दो विशेष वातानुकूलित बेडरूम, बैठने के लिये आरामदायक सोफे, किचन, टॉयलेट, लग्जरी चेयर, पीछे की खिड़की से नजारा देखने का आनंद होगा। यानी सैलून एक चलता फिरता सुसज्जित घर।
इस सैलून में 8 से 10 लोग आराम से एक साथ यात्रा कर सकते हैं। लिविंग रुम में एसी और टेलीविजन के साथ सोफ़ा और चेयर सेट, सेंटर टेबल सब कुछ है। जब इस सैलून के अन्दर आप घूमेंगे तो आश्चर्य में पड़ जायेंगे।
अगर आप पटना से दिल्ली की बात करें तो इस सैलून का खर्च करीब दो लाख पचह्त्तर हजार रुपए आएगा। जिसमे पटना से दिल्ली जाना, फिर आना और एक दिन ये सैलून आपके लिये वहां लगी रहेगी।
अगर एक दिन से ज्यादा आप इस सैलून को रखेंगे तो फिर अलग से चार्ज होगा। इस सैलून की एक और खासियत ये है कि इसमें एक मॉड्यूलर किचन भी है जिसमें आरओ से लेकर आधुनित किचन यानि चिमनी, गैस स्टोव, सिलेंडर, रेफ्रिजरेटर सब कुछ है। रेलवे मे अभी ऐसे 300 कोच उप्लब्ध हैं। इन कोच के साथ अटेंडेंट होते हैं। अगर आपको कुक चाहिए तो आईआरसीटीसी की ओर से उप्लब्ध कराया जा सकता है।