--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
बिहार में पशुपालन घोटाला से लेकर सृजन घोटाले तक की लंबी फेहरिस्त है, जिसने देश भर में राज्य की छवि धूमिल की है। अब प्रदेश में एक और घोटाला सामने आया है। मामला समाज कल्याण विभाग से जुड़ा है। नियम है कि सरकारी कायदे और कानून के अनुसार अगर कोई जिंदा है तो उसे सरकारी लाभ मिलेगा और स्वर्ग सिधार गया तो उसका नाम सूची से कट जाएगा, लेकिन बिहार में आज भी हजारों मुर्दे सरकारी पेंशन का लाभ उठा रहे हैं।
दरअसल बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के एक गोपनीय पत्र ने इस घोटाले को बेनकाब करने का काम किया है।
सूत्रों के अनुसार समाज कल्याण विभाग के सामाजिक सुरक्षा निदेशालय की ओर से सभी जिलाधिकारियों को जारी किए गए पत्र में आगाह किया गया है कि बिहार में मुर्दे भी पेंशन उठा रहे हैं और यह सिलसिला बदस्तूर जारी है।
सामाजिक सुरक्षा निदेशालय को यह जानकारी मिली कि पेंशनधारियों के मृत्यु के पश्चात भी उनके खाते में रकम ट्रांसफर हो रहा है। निदेशालय ने इसे वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला मानते हुए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी मृतकों की सूची जल्द से जल्द तैयार कर समाज कल्याण विभाग की सूची से उनका नाम हटाएं। जिससे कि सरकारी राशि का दुरुपयोग, जैसे- वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन और विकलांग पेंशन समेत सभी मदों में रोकी जा सके।
• सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल
बता दें कि पहले शिविर के माध्यम से पेंशनधारियों की उस्थिति दर्ज कर उन्हें पेंशन दिया जाता था जिससे उनके जीवित होने का भौतिक सत्यापन त्वरित हो जाता था, लेकिन हाल के महीनों में डीबीटी प्रक्रिया शुरू की गई है और लाइफ सर्टिफिकेट से सत्यापन सही रूप से नहीं हो रहा है। जाहिर सी बात है ये केवल एक या दो जिले का मामला नहीं है बल्कि राज्य के सभी जिलों में ऐसी ही स्थिति है।
बहरहाल सच तो यह है कि समाजिक सुरक्षा निदेशालय के इस पत्र ने सरकारी महकमे में हड़कंप मचा दिया है।