नई दिल्ली/जम्मू कश्मीर, 12 जून 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
आयकर विभाग ने मंगलवार को श्रीनगर के एक प्रमुख व्यापार समूह के विरूद्ध जांच और जब्ती की कार्रवाई की। इस कार्रवाई में श्रीनगर के 8 परिसर और बेंगलुरू तथा दिल्ली के 1-1 परिसर शामिल हैं। यह व्यापार समूह परिवहन, रेशम धागे के निर्माण, आतिथ्य, कश्मीर कला और शिल्प कला आदि के खुदरा व्यापार से जुड़ा है।
इस व्यापार समूह का कोई भी सदस्य अपनी आयकर विवरणी नियमित रूप से दाखिल नहीं करता है। एकबारगी निपटारे के तौर पर समूह ने जे एंड के बैंक से कुल 77 करोड़ रुपए के पुनर्निर्मित ऋण सहित 170 करोड़ रुपए के ऋण प्राप्त किए। समूह ने अब तक इनमें से जे एंड के बैंक को केवल 50.34 करोड़ रुपए का भुगतान किया है और शेष 27.66 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है। जांच के दौरान इस बात का साक्ष्य मिला है कि जे एंड के बैंक से ऋण का एकबारगी निपटारा जें एंड के बैंक के एक ऐसे वरिष्ठ अधिकारी की पहल पर किया गया था, जिसे बारी से पहले कई पदोन्नतियां मिली थीं। इसके अलावा इस बात का भी साक्ष्य मिला कि उपर्युक्त ऋण से संबंधित 50.34 करोड़ रुपए के ऋण वापसी एक ऐसे सागिर्द को उतनी ही धनराशि का ऋण देकर महज एक खानापूर्ति की है, जिसने इस पूरे लेन-देन में अपनी भूमिका को लेकर अपनी गलती कबूल की है।
■ जांच के दौरान निम्नलिखित से संबंधित गड़बडि़यों के साक्ष्य भी मिले हैं:
• 22 करोड़ रुपए मूल्य की अघोषित संपत्ति की बिक्री।
• 9.10 करोड़ रुपए में परिवहन कारोबार को बेचने के लिए समझौता।
• लस्सीपोरा में शीत भंडार संयंत्र के विक्रय के कारण 15-20 करोड़ रुपए का अघोषित लाभ। ऐसा पाया गया कि सरकार से अधिक सब्सिडी पाने के लिए फर्जी बिलों द्वारा इस परियोजना की वास्तविक लागत 17 करोड़ की जगह उसे बढ़ाकर 47 करोड़ रुपए दिखाया गया। इस परियोजना के लिए जे एंड के बैंक से ऋण लिया गया था।
• सोनमर्ग में 2.68 करोड़ रुपए, पहलगाम में 3.55 करोड़ रुपए और बेंगलुरू में 1 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्तियां।
• दिल्ली में साझेदारी के तहत 1.02 करोड़ रुपए में एक दुकान खरीदी गई।
• जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्य को जब्त किया गया है, जिसका विश्लेषण किया जा रहा है।