भारतीय वायुसेना के एएन-32 विमान को स्वदेशी बायो-जेट ईंधन से संचालित करने के लिए प्रमाणित किया गया



नई दिल्ली/चंडीगढ़, 26 मई 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

भारतीय वायुसेना के दुर्जेय विमान, रूस निर्मित एएन-32 को शुक्रवार 24 मई को मिश्रित विमानन ईंधन से संचालित करने के लिए औपचारिक रूप से प्रमाणित किया गया। मिश्रित विमानन ईंधन में 10 प्रतिशत तक स्वदेशी बायो-जेट ईंधन का उपयोग किया जायेगा। वायुसेना की ओर से एयर कमोडोर संजीव घुरटिया, वीएसएम, एयर ऑफिसर कमांडिंग, 3 बीआरडी, वायुसेना ने विमान-इंजन परीक्षण केन्द्र, चंडीगढ़ में सीईएमआईएलएसी के मुख्य कार्यकारी पी• जयपाल से अनुमोदन प्रमाण पत्र प्राप्त किया।

वायुसेना ने पिछले एक वर्ष में इस हरित विमानन ईंधन के लिए कई परीक्षण किये हैं। इन परीक्षणों में अंतर्राष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखा गया है। शुक्रवार के दिन के अनुमोदन से स्वदेशी बायो-जेट ईंधन के उपयोग के लिए किए गये विभिन्न परीक्षणों को स्वीकृति मिली है।

सीएसआईआर-आईआईपी प्रयोगशाला, देहरादून ने 2013 में पहली बार स्वदेशी बायो-जेट ईंधन का उत्पादन किया था। परन्तु व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए ईंधन का परीक्षण नहीं हो पाया क्योंकि विमानन क्षेत्र में परीक्षण सुविधाओं का अभाव था। वायुसेना प्रमुख बी एस धनोआ, पीवीएसएमएवीएसएम वाईएसएम वीएम एडीसी ने 27 जुलाई 2018 को स्वदेशी ईंधन के परीक्षण व प्रमाणन के लिए अपने संसाधनों के उपयोग की स्वीकृति देने से संबंधित घोषणा की थी। इसके बाद वायुसेना के विमान-परीक्षण दल और इंजीनियरों ने अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप इस ईंधन का मूल्यांकन किया है। “मेक इन इंडिया” मिशन के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। यह जैव-ईंधन वृक्षों द्वारा प्राप्त तेल (टीबीओ) की सहायता से तैयार किया जाएगा।

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