नई दिल्ली, 31 मार्च 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
॥●॥ आतंकवाद के प्रकोप को खत्म करें, जलवायु परिवर्तन से निपटें, सामाजिक विषमताओं को दूर करें, शांतिपूर्ण, सामंजस्यपूर्ण और खुशहाल राष्ट्र के निर्माण के लिए गरीबी को कम करें: उपराष्ट्रपति
भारत के उपराष्ट्रपति एम• वेंकैया नायडू ने आतंकवाद के प्रकोप को खत्म करने, जलवायु परिवर्तन से निपटने, सामाजिक विषमताओं को दूर करने, गरीबी को कम करने और एक शांतिपूर्ण, सामंजस्यपूर्ण और खुशहाल राष्ट्र बनाने हेतु शहरी ग्रामीण विभाजन को कम करने के लिए ठोस प्रयास करने का आह्वान किया है।
कानून के नियम, लोकतंत्र, सतत विकास और शांति के क्षेत्र में उनके योगदान के सम्मान में कोस्टा रिका के पीस विश्वविद्यालय द्वारा हाल में उन्हें प्रदत्त डॉक्टर ओनोरिस कोसा की उपाधि के बाद उपराष्ट्रपति के मित्रों और शुभचिंतकों द्वारा विशाखापट्टनम में आयोजित एक सम्मान समारोह में बोलते हुए, उन्होंने जोर देकर कहा कि शांति किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिए एक पूर्व शर्त है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का संघर्ष या अराजकता क्षेत्र के विकास की संभावनाओं को रोक देगी। उन्होंने कहा कि ‘’अगर कहीं कोई तनाव है तो विकास पर ध्यान नहीं दिया जा सकता।‘’
श्री नायडू ने कहा कि यह सुनिश्चित करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि हमारे देश में सामाजिक सद्भाव को किसी भी तरह से नुकसान न पहुंचे। उन्होंने मीडिया से आह्वान किया कि वे पार्टियों और उम्मीदवारों का एक प्रदर्शन लेखा परीक्षा करें और लोगों के सामने एक प्रगति रिपोर्ट रखें ताकि उन्हें चयन के लिए सुविज्ञ विकल्प दिया जा सके। उन्होंने कहा कि लोगों को भी उम्मीदवारों और पार्टियों से जवाबदेही और प्रदर्शन रिपोर्ट लेनी चाहिए।
राजनेताओं द्वारा दलों को बदलने की प्रवृत्ति का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे लोगों को फिर से चुनाव की इच्छा जताने से पहले अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
लोकतंत्र को मजबूत करने में चुनावी प्रक्रिया के महत्व का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि लोगों को चरित्र, योग्यता, क्षमता और अच्छे आचरण वाले प्रतिनिधियों का चयन करना चाहिए। लोगों से अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील करते हुए, श्री नायडू ने कहा कि मतदान करना केवल एक अधिकार नहीं है, बल्कि संविधान के निर्माताओं द्वारा नागरिकों पर एक जिम्मेदारी दी गई थी।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत हमेशा से शांति का समर्थक रहा है और "वसुधैव कुटुम्बकम" के दर्शन में विश्वास करता है जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानता है। उन्होंने कहा कि भारत अनादि काल से शांति और अहिंसा का उपासक रहा है जो हमेशा सभी देशों और दुनिया भर के लोगों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध रखना चाहता है।
मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित होने का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि सम्मान किसी व्यक्ति के लिए नहीं है बल्कि यह वैश्विक दर्शन और भारतीय दर्शन में अंतर्निहित शांति और सद्भाव के सदियों पुराने मूल्यों की मान्यता का प्रतिबिंब है।
उन्होंने कहा कि यह देखते हुए कि उन्होंने ऐसे समय मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है जब दुनिया गांधी जी की 150 वीं जयंती मना रही है, जिन्होंने दुनिया के समक्ष अहिंसा की शक्ति का प्रदर्शन किया था, वह दोगुना सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि शांति किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिए एक पूर्व शर्त है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का संघर्ष या अराजकता क्षेत्र के विकास की संभावनाओं को बाधित कर देगी।
इसका उल्लेख करते हुए कि भारत सीमापार आतंकवाद के खतरे का शिकार रहा है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि आतंकवाद का उपचार कभी भी नरम रवैये के साथ नहीं किया जा सकता है। उन्होंने विश्व समुदाय से अपील की कि वे एकजुट होकर आतंकवाद का समूल नाश कर दें।
श्री नायडू ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को भारत द्वारा प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन पर जल्द से जल्द विचार-विमर्श करना चाहिए और आतंक को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें उन लोगों का नाम उजागर करने और उनको दी जाने वाली सहायता में कटौती करने की जरूरत है जो देश की नीति के रूप में आतंक को बढ़ावा देते हैं।
उपराष्ट्रपति ने प्रत्येक नागरिक से पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रयास करने, प्रदूषण को कम करने, हरियाली को बढ़ावा देने, जल निकायों का संरक्षण करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि विकास से प्राकृतिक संसाधन बाधित न हों।
॥●॥ आईएएफ मिग-27 (अपग्रेड) दुर्घटनाग्रस्त
भारतीय वायु सेना का मिग -27 (अपग्रेड) विमान राजस्थान के एयरफोर्स स्टेशन उत्तरलाई से रविवार सुबह 1127 बजे एक नियमित उड़ान के लिए रवाना हुआ। विमान जोधपुर से लगभग 120 किलोमीटर दक्षिण में 1145 बजे दुर्घटनाग्रस्त हुआ। पायलट को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया गया और खोज और बचाव हेलीकॉप्टर द्वारा बरामद किया गया। पायलट सुरक्षित है और प्रारंभिक जांच में किसी व्यक्ति या संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है। दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए जांच न्यायालय का आदेश दे दिया गया है।
॥●॥ एलसीयू एल-56 को नौसेना में शामिल किया गया
यार्ड 2097 (एलएसयू एल- 56), लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी (एलसीयू) एमके- IV छठी श्रेणी का जहाज है। इस जहाज को मैसर्स जीआरएसई लिमिटेड द्वारा निर्मित कर 30 मार्च 19 को कोलकाता में शामिल किया गया। यह कोलकाता में डीपीएसयू द्वारा तैयार किया गया 100 वाँ जहाज है। जहाज के निर्माण की देखरेख वॉरशिप ओवरसीइंग टीम, कोलकाता द्वारा की गई थी।
जीआरएसई में आयोजित समारोह में शामिल होने वाले गणमान्य लोगों में रक्षा सचिव, वाइस एडमिरल बीके वर्मा एवीएसएम, एडीसी, सी-एनसी अंडमान और निकोबार कमांड तथा वाइस एडमिरल एमएस पवार एवीएसएम, वीएसएम, नौसेना प्रमुख उप-प्रमुख शामिल थे। इस लैंडिंग क्राफ्ट से सैनिकों, टैंकों और उपकरणों के परिवहन सहित भारतीय नौसेना की संचालन क्षमता भी बढ़ेगी जो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से संबंधित होगी। जहाज की कमान लेफ्टिनेंट कमांडर गोपीनाथ नारायण के पास है और इसमें पांच अधिकारियों के अलाव 50 नौसैनिक भी शामिल हैं।
॥●॥ औपनिवेशिक मानसिकता से अलग हटकर शिक्षा प्रणाली को पुन: स्थापित करें : उपराष्ट्रपति
भारत के उपराष्ट्रपति एम• वेंकैया नायडू ने कहा है कि औपनिवेशिक मानसिकता से अलग हटकर शिक्षा प्रणाली को पुन: स्थापित करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपने इतिहास से प्रेरणा और ऊर्जा प्राप्त नहीं करता है, उसके लिए भविष्य की चुनौतियों का सामना करना बहुत मुश्किल होगा।
उन्होंने आईआईएम विशाखापत्तनम के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा, "हमें इतिहास को वस्तुनिष्ठ तरीके से पढ़ाना चाहिए जैसा यह वास्तव में घटित हुआ’’।
इस पर जोर देते हुए कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार पाना नहीं था, उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा को ज्ञान और बुद्धिमत्ता के साथ लोगों को सशक्त बनाना होगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी विकास सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकने हेतु सभी के लिए और सभी स्तरों पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधा आवश्यक थी। उन्होंने छात्रों को 21 वीं सदी के वैश्विक रोजगार बाजार की बदलती जरूरतों के साथ अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि “नया ज्ञान पुराने प्रतिमानों को बदल देता है। आप इस ज्ञान क्रांति में खुद को आगे रख सकते हैं और आपको आगे रहना भी चाहिए। ”
श्री नायडू ने कहा कि भारत के लिए एक बार फिर वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में उभरने का समय आ गया है और उनका विचार था कि ऐसा होने के लिए, ज्ञान के केन्द्रों विशेष रूप से, विश्वविद्यालयों को गतिशील बौद्धिकता खोज और दृढ़ अनुसंधान तथा नवाचार के केंद्र के रूप में खुद का फिर से अन्वेषण करना चाहिए।
राष्ट्र के विकास में कृषि के महत्व की चर्चा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृषि को पुनर्जीवित करना और कायाकल्प करना अत्यंत महत्वपूर्ण था। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को लाभदायक बनाने के लिए इसमें संरचनात्मक परिवर्तन लाने में न हिचकिचाएं।
श्री नायडू ने सरकार, वैज्ञानिकों, कृषि अनुसंधान संस्थानों और किसानों से समेकित प्रयासों के लिए एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा यह मानता रहा हूं कि भारत का अस्तित्व आयातित खाद्य सुरक्षा पर बना नहीं रह सकता है।"
उपराष्ट्रपति ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की लगभग 25 आकांक्षी महिला उद्यमियों के संरक्षण और मार्गदर्शन के लिए आईआईएम विशाखापत्तनम की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण की ऐसी पहलें एक बल-गुणक के रूप में काम करेंगी और व्यापक स्तर पर परिवारों, अर्थव्यवस्था और समाज में बदलाव लाएंगी।
इस अवसर पर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, आईआईएम के चेयरपर्सन हरि एस भाटिया, आईआईएम विशाखापत्तनम के निदेशक प्रो• एम• चंद्रशेखर, संकाय और संस्थान के छात्र भी उपस्थित थे।